प्रजापति समाज का होली मिलन समारोह जारी,
काव्य पाठ, सम्मान और शुभकामनाओं के रंग में सराबोर हुआ कामवन

होली पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में मंच पर अतिथियों का सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुति और कार्यक्रम का आनंद लेते ग्रामीण दर्शक

✍️हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
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ब्रज क्षेत्र की फिज़ाओं में जैसे ही फागुन का रंग घुलता है, वैसे ही गांव-कस्बों की चौपालों और बाग-बगीचियों में गीत, हंसी और रंगों का उल्लास जीवित हो उठता है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कामवन कस्बे के प्रजापति मोहल्ला स्थित प्रजापति बगीची में मंगलवार शाम एक भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन जाएंट्स ग्रुप ऑफ कामवन के सौजन्य से किया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, कवियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

शाम लगभग सात बजे शुरू हुए इस समारोह में वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा कस्बा फागुन के रंगों में डूब गया हो। मंच पर रंग-बिरंगे गुलाल की खुशबू, पीछे सजी झालरें और सामने बैठे लोगों के मुस्कुराते चेहरे—इन सबने मिलकर इस आयोजन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय कवियों द्वारा प्रस्तुत फाग, रसिया और होली के पारंपरिक छंद रहे, जिन्होंने श्रोताओं को ब्रज संस्कृति की मिठास से सराबोर कर दिया।

🎨 काव्य पाठ में झलका फागुन का उल्लास

होली मिलन समारोह में मंच पर आए कवियों ने अपने काव्यपाठ से माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया। कवि कमल सिंह ‘कमल’ ने फागुन की मस्ती और प्रेम की कोमल अनुभूतियों को शब्दों में पिरोते हुए ऐसा काव्य पाठ किया कि श्रोता देर तक तालियां बजाते रहे। इसके बाद दुलीचंद लोधा ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में होली के पारंपरिक रसिया प्रस्तुत किए, जिनमें ब्रज की लोकधारा की झलक साफ दिखाई देती थी।

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इसी क्रम में शीशराम गोला ने अपने छंदों में ग्रामीण जीवन और उत्सवधर्मिता का चित्र खींचा, जबकि पंकज प्रखर ने फागुन की उमंग और सामाजिक सौहार्द को स्वर दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में रामकिशन ‘दुश्मन’ ने व्यंग्य और हास्य से भरी होली रचनाओं के माध्यम से लोगों को हंसी से लोटपोट कर दिया।

इन कविताओं और छंदों के बीच बार-बार यह अनुभूति होती रही कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक परंपरा है। श्रोताओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कवियों का स्वागत किया और हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज से वातावरण भर उठा।

🌸 सर्व समाज के लोगों का हुआ सम्मान

इस समारोह का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि यहां सर्व समाज के विभिन्न लोगों का सम्मान किया गया। आयोजकों का मानना था कि होली का पर्व केवल रंग खेलने का अवसर नहीं, बल्कि समाज के उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का भी अवसर है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों को गुलाल लगाकर और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और पारस्परिक सहयोग की भावना तभी मजबूत होती है, जब हम एक-दूसरे के कार्यों का सम्मान करना सीखते हैं।

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🤝 सामाजिक सद्भाव का संदेश

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि होली जैसे त्योहार समाज में सद्भाव, भाईचारा और आपसी प्रेम को मजबूत करने का माध्यम होते हैं। आज के समय में जब सामाजिक रिश्तों में दूरी बढ़ती दिखाई देती है, तब ऐसे आयोजन लोगों को एक मंच पर लाकर संवाद और संबंधों को फिर से जीवित कर देते हैं।

जाएंट्स ग्रुप ऑफ कामवन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक वातावरण बनाना भी है। इसी भावना से इस होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया, ताकि विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ बैठकर उत्सव का आनंद ले सकें।

🎤 इन प्रमुख लोगों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख सामाजिक और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ा दी। इस अवसर पर जाएंट्स ग्रुप ऑफ कामवन के अध्यक्ष खैमराज खंडेलवाल, डॉ. मुकेश, महेंद्र अरोड़ा, पूर्व एयरफोर्स वारंट ऑफिसर उमाकांत शर्मा, अपना घर सेवा समिति के अध्यक्ष प्रमोद पुजारी, अध्यापक दिगंबर प्रजापति, गोविंद गुर्जर, संजय भारती, वेदप्रकाश ‘कल्लू मातुकी वाले’ तथा यूनिट डायरेक्टर संजय बड़जात्या सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

इन सभी ने मंच से एक स्वर में लोगों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रंगों का यह पर्व समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश लेकर आता है। इसलिए हमें इस अवसर पर मन की सभी दूरियों को मिटाकर एक-दूसरे के करीब आना चाहिए।

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🌼 उत्सव, संस्कृति और संवाद का संगम

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। बगीची में गूंजते गीत, हंसी और तालियों की आवाज़ इस बात का प्रमाण थीं कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोगों के दिलों को जोड़ने वाला एक उत्सव बन गया था।

दरअसल, ब्रजभूमि की परंपरा में होली केवल एक त्योहार नहीं बल्कि लोकसंस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल सांस्कृतिक विरासत जीवित रहती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

कामवन में आयोजित यह होली मिलन समारोह भी उसी परंपरा का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया, जहां रंगों के साथ-साथ शब्दों, सम्मान और सद्भाव के रंग भी बराबर बिखरे।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कामवन में होली मिलन समारोह कहाँ आयोजित हुआ?

यह समारोह कामवन कस्बे के प्रजापति मोहल्ला स्थित प्रजापति बगीची में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन किस संस्था ने किया?

इस होली मिलन समारोह का आयोजन जाएंट्स ग्रुप ऑफ कामवन के सौजन्य से किया गया।

कार्यक्रम में कौन-कौन से कवि शामिल हुए?

कवि कमल सिंह कमल, दुलीचंद लोधा, शीशराम गोला, पंकज प्रखर और रामकिशन दुश्मन सहित कई कवियों ने काव्य पाठ किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इस आयोजन का उद्देश्य होली के अवसर पर सामाजिक सद्भाव बढ़ाना, सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखना और समाज के विभिन्न लोगों का सम्मान करना था।

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