बिना अनुमति 20 कीमती पेड़ काटने का आरोप
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार, जांच की मांग तेज

लैंडस्केप डबल स्टैंडर्ड कलर रुल्ड बॉक्स में पेड़ काटते हुए दृश्य, शिकायत पत्र और न्यायिक प्रतीक का न्यूज़ ग्राफिक


✍️ राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
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ग्रामीण ने आम, शीशम, चिलबिल और महुआ के पेड़ों की अवैध कटान का लगाया आरोप; धमकी देने की भी शिकायत

जौनपुर जिले के केराकत तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवकलीपुर में पेड़ों की कथित अवैध कटान का मामला प्रकाश में आया है। गांव निवासी लालमन यादव पुत्र कैलाश यादव ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि उनकी भूमि पर खड़े आम, शीशम, चिलबिल और महुआ के लगभग 20 पुराने एवं कीमती पेड़ों को गांव के ही कुछ व्यक्तियों द्वारा बिना अनुमति जबरन कटवा लिया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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आवेदन में लगाए गए आरोप

मुख्यमंत्री को संबोधित अपने प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया है कि संबंधित व्यक्तियों ने कथित रूप से मजदूरों की सहायता से उनकी भूमि पर खड़े पेड़ों को कटवाया। आवेदन के अनुसार ये पेड़ वर्षों पुराने थे और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान थे। कुल 20 पेड़ों की अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पेड़ों की लकड़ी का कुछ हिस्सा मौके से हटाकर बेच दिया गया, जबकि कुछ अभी भी वहीं पड़ा है।

समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

विरोध करने पर धमकी का आरोप

प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब शिकायतकर्ता ने कथित कटान का विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई। शिकायतकर्ता ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि यदि अवैध कटान की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

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पर्यावरणीय और कानूनी पहलू

यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह मामला केवल निजी आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है। आम, शीशम और महुआ जैसे वृक्ष ग्रामीण पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में वृक्षों की कटान के लिए नियमानुसार अनुमति आवश्यक होती है। बिना अनुमति कटान दंडनीय अपराध की श्रेणी में आती है।

प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा

इस मामले में अभी तक स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों के बीच यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि शिकायत पर किस स्तर पर और कितनी शीघ्र कार्रवाई की जाती है।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरोप एक पक्ष द्वारा लगाए गए हैं और इनकी सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस विवाद का समाधान कर सकती है।

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❓FAQ

प्रश्न 1: कितने पेड़ काटे जाने का आरोप है?
उत्तर: शिकायतकर्ता के अनुसार लगभग 20 पेड़ों की अवैध कटान का आरोप लगाया गया है।
प्रश्न 2: क्या प्रशासन की ओर से बयान आया है?
उत्तर: समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रश्न 3: बिना अनुमति पेड़ काटना क्या अपराध है?
उत्तर: हाँ, नियमानुसार अनुमति के बिना पेड़ काटना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।


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