जब गांव पोस्टर से पट रहे हैं, तभी शासन ने बिछा दिया ब्रॉडबैंड
पंचायत चुनाव से पहले 415 ग्राम पंचायतें बनेंगी डिजिटल मॉडल

डबल स्टैंडर्ड कलर रुल्ड बॉक्स में लैंडस्केप डिजाइन की गई स्प्लिट इमेज, जिसमें एक ओर गांव में चुनावी पोस्टर और प्रचार करते लोग, दूसरी ओर ग्रामीणों को लैपटॉप व ब्रॉडबैंड के साथ डिजिटल सेवाओं से जुड़ते दिखाया गया है।

✍️कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश के गांव इन दिनों दो समानांतर धाराओं से गुजर रहे हैं। एक तरफ पंचायत चुनाव की आहट है—दीवारों पर पोस्टर, चौपालों में रणनीति और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता। दूसरी तरफ शासन ने डिजिटल सशक्तिकरण की नई बुनियाद रख दी है। पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश की 415 ग्राम पंचायतों में “ग्राम पंचायत डिजिटल एक्सेस समिति” (डीएसी) के गठन के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन पंचायतों को डिजिटल मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है। गोरखपुर मंडल की 23 ग्राम पंचायतें भी इस सूची में शामिल हैं।

डिजिटल पंचायत का खाका

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्रत्येक विकास खंड में एक समृद्ध ग्राम पंचायत विकसित की जाएगी। यह पंचायत हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। गोरखपुर और महराजगंज में 7-7, देवरिया में 5 तथा कुशीनगर में 4 ग्राम पंचायतों में डीएसी का गठन किया जाएगा।

डीएसी समिति में ग्राम प्रधान पदेन अध्यक्ष होंगे और पंचायत सचिव सदस्य संयोजक की भूमिका निभाएंगे। विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक, स्वास्थ्य केंद्र या कृषि संस्थान के प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, एनजीओ प्रतिनिधि और भारत नेट उद्यमी को भी समिति में शामिल किया जाएगा। समिति का उद्देश्य डिजिटल साक्षरता, समावेशन और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना है।

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चुनावी सरगर्मी और डिजिटल पहल

गांवों में पंचायत चुनाव का माहौल धीरे-धीरे बन रहा है। कई स्थानों पर पोस्टर वार शुरू हो चुका है। वर्तमान प्रधान और संभावित प्रत्याशी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में जुटे हैं। लेकिन इसी बीच चुनाव की तिथि, आरक्षण सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे ग्राम प्रधानों और भावी उम्मीदवारों में संशय और तनाव दोनों हैं।

यही वह समय है जब शासन की डिजिटल पंचायत योजना ने गांव की राजनीति के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है—क्या डिजिटल सशक्तिकरण चुनावी रणनीति का हिस्सा है या यह दीर्घकालिक ग्रामीण विकास का रोडमैप?

डिजिटल अर्थव्यवस्था की संभावनाएं

समृद्ध ग्राम पंचायत मॉडल का उद्देश्य केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए ऑनलाइन सेवाएं, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और सरकारी योजनाओं की पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सेवाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से गांव तक पहुंचेंगी। इससे ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी मिल सकते हैं।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि डीएसी समिति प्रभावी ढंग से कार्य करती है तो पंचायत स्तर पर डिजिटल क्रांति संभव है। इससे ग्राम सभाओं की कार्यवाही, योजनाओं का क्रियान्वयन और शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकती है।

संशय का माहौल

हालांकि चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आरक्षण सूची जारी न होने और एसआईआर की समयावधि बढ़ने से ग्राम प्रधान और प्रत्याशी खुलकर चुनावी अभियान शुरू नहीं कर पा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संशय का असर पंचायतों की सक्रियता पर पड़ सकता है।

लेकिन दूसरी ओर डिजिटल पंचायत की योजना ने प्रशासनिक स्तर पर तेजी ला दी है। उप निदेशक पंचायती राज हिमांशु शेखर ठाकुर ने सभी अधिकारियों को समिति गठन शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि विकास योजनाओं की रफ्तार चुनावी गणित से अलग रखी जा रही है।

गांव की बदलती तस्वीर

गांवों में जहां एक ओर चौपालों में राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल कनेक्टिविटी की चर्चा भी होने लगी है। युवाओं के बीच ऑनलाइन शिक्षा, सरकारी पोर्टल और डिजिटल भुगतान को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है। यह बदलाव संकेत देता है कि ग्रामीण भारत अब केवल चुनावी नारों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विकास की ठोस दिशा भी चाहता है।

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निष्कर्ष: संतुलन की चुनौती

पंचायत चुनाव की आहट और डिजिटल पंचायत की पहल—दोनों मिलकर यूपी के गांवों की नई कहानी लिख रहे हैं। एक ओर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है, दूसरी ओर तकनीकी सशक्तिकरण। यदि दोनों के बीच संतुलन बना रहा तो गांव केवल पोस्टर से नहीं, बल्कि ब्रॉडबैंड से भी पहचाने जाएंगे। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि डिजिटल मॉडल पंचायतें ग्रामीण विकास का स्थायी आधार बनती हैं या चुनावी मौसम की एक पहल भर साबित होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएसी समिति का उद्देश्य क्या है?

ग्राम स्तर पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड उपयोग, डिजिटल साक्षरता और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना।

कितनी ग्राम पंचायतें इस योजना में शामिल हैं?

उत्तर प्रदेश की 415 ग्राम पंचायतें इस योजना में चयनित हुई हैं।

गोरखपुर मंडल की कितनी पंचायतें शामिल हैं?

कुल 23 पंचायतें—गोरखपुर और महराजगंज में 7-7, देवरिया में 5 तथा कुशीनगर में 4।

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