निजी प्रवास में आश्रम दर्शन ,
हिमाचल से उठी ‘सनातन सड़क योजना’ की चर्चा

अखिलेश यादव लाल टोपी और काले जैकेट में आधिकारिक पोर्ट्रेट शैली में

✍️रामपाल पहाड़ी की खास रिपोर्ट
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हूक प्वाइंट: हिमाचल के निजी प्रवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बद्रिका आश्रम में दर्शन किए और सड़क अवसंरचना पर सवाल उठाते हुए ‘सनातन सड़क योजना’ का सुझाव दिया। आस्था, अवकाश और विकास—तीनों पहलुओं ने इस यात्रा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों निजी प्रवास पर हिमाचल प्रदेश में हैं। मंगलवार सुबह वह जिला सिरमौर के मरयोग स्थित बद्रिका आश्रम पहुंचे, जहां उनकी पत्नी डिंपल यादव और बेटी पिछले एक सप्ताह से ठहरी हुई थीं। इस यात्रा को पूरी तरह निजी बताया गया है, किंतु पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण नियमानुसार सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। हिमाचल पुलिस ने प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक इंतजाम किए और डीएसपी राजगढ़ वीसी नेगी स्वयं सुरक्षा प्रबंधों की निगरानी करते रहे।

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आश्रम में आध्यात्मिक विराम

गिरि गंगा नदी के तट पर स्थित बद्रिका आश्रम में उन्होंने संत ओम स्वामी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। आश्रम परिसर में कोई सार्वजनिक कार्यक्रम या राजनीतिक संबोधन आयोजित नहीं किया गया। स्थानीय स्तर पर उत्सुकता अवश्य रही, परंतु कार्यक्रम को सार्वजनिक न किए जाने के कारण आमजन की सीधी पहुंच सीमित रही। आश्रम सूत्रों के अनुसार यह प्रवास पारिवारिक और आध्यात्मिक विश्राम के उद्देश्य से था।

कसौली में ठहराव और सुरक्षा घेरा

इससे पहले वह सोमवार शाम कसौली विधानसभा क्षेत्र के काबा स्थित एक होटल में रुके थे। उनके साथ पंजाब नंबर की लगभग एक दर्जन गाड़ियों का काफिला और 21 सुरक्षा कर्मी मौजूद रहे। होटल परिसर में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया और बाहरी गतिविधियों पर नजर रखी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल प्रोटोकॉल के अनुरूप थी और आम नागरिकों को असुविधा न हो, इसका ध्यान रखा गया।

‘सनातन सड़क योजना’ का सुझाव

हिमाचल प्रवास के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रदेश की सुंदर वादियों और कुछ स्थानों पर सड़कों की खस्ता हालत का वीडियो साझा किया। वीडियो के साथ उन्होंने टिप्पणी की कि जब ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ बन सकती है तो आश्रमों को जोड़ने के लिए ‘सनातन सड़क योजना’ क्यों नहीं बनाई जा सकती। उनके अनुसार इससे धर्मस्थलों तक पहुंच आसान होगी और सत्संग व आध्यात्मिक संवाद को बढ़ावा मिलेगा। इस टिप्पणी ने विकास और आस्था के संतुलन पर नई बहस को जन्म दिया है।

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निजी यात्रा, सार्वजनिक विमर्श

हालांकि इस दौरे को औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम का स्वरूप नहीं दिया गया, फिर भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेता के हर वक्तव्य का व्यापक प्रभाव होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी अवसंरचना पर चर्चा भविष्य में नीति विमर्श का हिस्सा बन सकती है। वहीं स्थानीय लोगों ने इसे सामान्य प्रवास और आध्यात्मिक विश्राम के रूप में देखा।

आस्था और विकास का संगम

अखिलेश यादव का यह प्रवास पहाड़ों की शांत वादियों में बीता एक निजी क्षण हो सकता है, परंतु ‘सनातन सड़क योजना’ जैसी अवधारणा ने इसे व्यापक चर्चा का विषय बना दिया है। आस्था, सड़क संपर्क और सार्वजनिक नीति—इन तीनों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर यह यात्रा एक संकेत अवश्य देती है।

FAQ

क्या यह दौरा आधिकारिक था?

यह प्रवास निजी बताया गया है और कोई औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

‘सनातन सड़क योजना’ क्या है?
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यह एक प्रस्तावित विचार है जिसमें आश्रमों और धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की बात कही गई है।

सुरक्षा व्यवस्था क्यों की गई?

पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण नियमानुसार सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया।



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