दीपावली की रोशनी अंधेरे में, अब होली के रंग फीके पड़ने का डर कब तक?
दिल्ली में सफाई कर्मियों को झेलनी पड़ रही वेतन संकट की मार

दिल्ली के एसकेवी नंबर 2 मोलरबंद स्कूल के बाहर वेतन भुगतान की मांग को लेकर खड़े सफाई और गार्ड कर्मचारी

✍️परवेज़ अंसारी की रिपोर्ट
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में ठेकेदारी व्यवस्था के तहत कार्यरत सफाई एवं गार्ड कर्मचारियों का वेतन संकट अब लंबा खिंचता जा रहा है। दीपावली से पहले वेतन अटकने की शिकायतें सामने आई थीं और अब होली से पहले भी भुगतान को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। प्रबल सफाई सैनिक व गार्ड्स यूनियन (रजि.) द्वारा संबंधित विभागों को भेजे गए पत्रों में दावा किया गया है कि कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि आंशिक भुगतान में भी लगभग ₹1500 तक की कटौती की गई। इससे हजारों परिवार आर्थिक दबाव में हैं।

त्योहारों के बीच वेतन संकट

समाचार दर्पण 24 में प्रकाशित पूर्व रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया था कि दीपावली से पहले कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिला, जिससे कई परिवारों की खुशियां प्रभावित हुईं। अब होली के करीब आते ही वही आशंका दोबारा गहराने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहारों के समय अतिरिक्त खर्च बढ़ जाते हैं और वेतन न मिलने से मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

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वेतन कटौती के आरोप

यूनियन के अनुसार, वर्तमान ठेकेदार कंपनी द्वारा वेतन भुगतान में देरी के साथ-साथ निर्धारित राशि से कम भुगतान किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन आयोग के मानकों का पालन नहीं हो रहा। कई कर्मचारियों ने बताया कि किराया, बच्चों की फीस और दवाइयों का खर्च निकालना कठिन हो गया है।

सुनवाई को लेकर असंतोष

यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि जब वे शिकायत लेकर संबंधित कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें पर्याप्त सुनवाई नहीं मिली। यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो कर्मचारियों का विश्वास प्रशासनिक प्रक्रिया पर कम हो सकता है। यूनियन ने अधिकारियों से पारदर्शी और समयबद्ध समाधान की मांग की है।

ठेकेदारी मॉडल पर उठते सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्सिंग मॉडल में निगरानी तंत्र मजबूत न हो तो भुगतान और सामाजिक सुरक्षा लाभों में अनियमितता की आशंका बढ़ जाती है। EPFO और ESIC जैसे लाभों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें केवल समय पर वेतन और सम्मानजनक व्यवहार चाहिए।

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आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने संकेत दिया है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो कर्मचारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। राजधानी के स्कूलों और सरकारी परिसरों की स्वच्छता व्यवस्था इन कर्मचारियों पर निर्भर है, इसलिए समाधान में देरी व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

सरकार से अपेक्षित कदम

यूनियन ने बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, वेतन कटौती की जांच और भविष्य में समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही ठेकेदार कंपनियों की जवाबदेही तय करने और सामाजिक सुरक्षा अंशदान की नियमित निगरानी की भी आवश्यकता बताई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या कर्मचारियों का वेतन दो महीने से लंबित है?

यूनियन के अनुसार दो महीनों का भुगतान लंबित है और आंशिक भुगतान में कटौती का आरोप है।

दीपावली और होली पर इसका क्या असर?

त्योहारों के समय वेतन न मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है और अतिरिक्त खर्चों का दबाव बढ़ता है।

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यूनियन की मुख्य मांग क्या है?

तत्काल बकाया वेतन भुगतान, वेतन कटौती की जांच और समयबद्ध भुगतान प्रणाली लागू करना।

क्या आंदोलन की चेतावनी दी गई है?

यदि समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।


समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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