योगी सरकार पर साधु समाज का सीधा प्रहार :
अविमुक्तेश्वरानंद का 11 मार्च को लखनऊ कूच का ऐलान

योगी आदित्यनाथ, ब्रजेश पाठक और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की संयुक्त तस्वीर, माघ मेला शिखा विवाद से जुड़ा राजनीतिक बयान

✍️अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
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समाचार सार: प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन वेदपाठी बटुकों की शिखा खींचे जाने के विवाद पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखा बयान दिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों के सम्मान को उन्होंने सरकार के लिए एक संकेत बताया और 11 मार्च को समर्थकों के साथ लखनऊ कूच का ऐलान किया।

प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन कथित रूप से वेदपाठी बटुकों की शिखा खींचे जाने की घटना अब धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। इस पूरे प्रकरण पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा प्रहार किया है। उनका कहना है कि यदि सरकार के शीर्ष पदाधिकारी स्वयं इस घटना को ‘पाप’ कह रहे हैं, तो यह अपने आप में स्वीकारोक्ति है कि कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।

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माघ मेले की घटना से बढ़ा विवाद

मौनी अमावस्या के अवसर पर आयोजित माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मौजूद वेदपाठी बटुकों और पुलिस के बीच कथित धक्का-मुक्की का मामला सामने आया था। आरोप है कि इस दौरान कुछ बटुकों की शिखा खींची गई, जिसे साधु समाज ने सनातन परंपरा और धार्मिक अस्मिता का अपमान बताया। इस घटना ने संत समाज में रोष पैदा कर दिया।

डिप्टी सीएम का सम्मान कार्यक्रम

विवाद बढ़ने के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 वेदपाठी बटुकों को अपने आवास पर आमंत्रित किया। उन्होंने माल्यार्पण कर उनकी शिखा का सम्मान किया और सार्वजनिक रूप से कहा कि बटुकों के साथ जो हुआ, वह ‘पाप’ की श्रेणी में आता है। इस कदम को सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के रूप में भी देखा गया।

‘यह सरकार के लिए संदेश है’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ब्रजेश पाठक समझदार व्यक्ति हैं और संभवतः राजनीतिक नुकसान से बचने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि जब सरकार के भीतर का कोई वरिष्ठ नेता इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि नीति या निर्णय में कहीं त्रुटि हुई है। उनके अनुसार यह केवल प्रतीकात्मक सम्मान से समाप्त होने वाला मामला नहीं है।

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सीएम के बयान पर पलटवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सदन में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि बड़ा पद किसी को अन्याय करने का लाइसेंस नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन में सनातन धर्म के प्रतीकों और शिखा का सम्मान सुनिश्चित नहीं किया जा रहा। उनके अनुसार गेरुआ वस्त्र धारण करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके अनुरूप आचरण भी आवश्यक है।

सपा की एंट्री से सियासी तापमान तेज

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष बोल रहा है, तो सत्तापक्ष के अन्य नेता चुप क्यों हैं। उन्होंने इसे व्यापक राजनीतिक विमर्श का विषय बताया।

11 मार्च को लखनऊ कूच

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल बयानबाजी या प्रतीकात्मक सम्मान से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इसे सनातन धर्म की शिखा पर प्रहार बताते हुए कहा कि न्याय की मांग को लेकर वे अपने समर्थकों और बटुकों के साथ 11 मार्च को लखनऊ कूच करेंगे। उनके अनुसार यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, किंतु अपनी बात स्पष्ट रूप से रखेगा।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में कथित रूप से वेदपाठी बटुकों की शिखा खींचे जाने के आरोप के बाद यह विवाद शुरू हुआ।

प्रश्न 2: डिप्टी सीएम ने क्या कदम उठाया?

ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों को सम्मानित कर घटना को ‘पाप’ बताया और शिखा का सम्मान किया।

प्रश्न 3: आगे क्या होगा?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 मार्च को समर्थकों के साथ लखनऊ कूच का ऐलान किया है।

समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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