बेलपार पंडित की भागवत कथा का दिव्य संदेश:
भक्त रक्षा और अहंकार त्याग का आह्वान

बेलपार पंडित में आयोजित भागवत कथा के दौरान कथा व्यास मानस मणि शास्त्री गोवर्धन लीला का प्रवचन देते हुए, मंच पर बैठे श्रद्धालुओं और आयोजकों की उपस्थिति

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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बेलपार पंडित की भागवत कथा का दिव्य संदेश स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम बेलपार पंडित में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन विशेष रूप से प्रतिध्वनित हुआ। काशी से पधारे कथा व्यास मानस मणि शास्त्री ने गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रोताओं को बताया कि जब-जब संसार में अहंकार बढ़ता है, तब-तब ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए।

गोवर्धन लीला: अहंकार पर आस्था की विजय

कथा व्यास ने बताया कि द्वापर युग में ब्रजवासी इंद्र देव की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि प्रकृति ही जीवन का आधार है और गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश दिया। जब ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा आरंभ की, तब इंद्र का अभिमान आहत हुआ और उन्होंने क्रोधित होकर ब्रजभूमि पर भीषण वर्षा कर दी।

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संकट की इस घड़ी में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाईं हाथ की छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया। सात दिनों तक मूसलाधार वर्षा होती रही, लेकिन किसी भी भक्त को कष्ट नहीं हुआ। अंततः इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।

भक्त रक्षा का शाश्वत सिद्धांत

मानस मणि शास्त्री ने कहा कि बेलपार पंडित की भागवत कथा का दिव्य संदेश केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, यदि उनका मन निर्मल और आचरण धर्ममय हो। गोवर्धन लीला हमें धैर्य, विश्वास और सामूहिक एकता का महत्व सिखाती है।

धर्म और नैतिक मूल्यों का आह्वान

कथा के दौरान धर्म, सत्य और कर्तव्य पालन को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी गई। कथा व्यास ने कहा कि जब मनुष्य अहंकार का त्याग कर सेवा और सहयोग की भावना अपनाता है, तब ईश्वर की कृपा सदैव उस पर बनी रहती है।

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प्रकृति संरक्षण का संदेश

गोवर्धन लीला पर्यावरणीय चेतना का भी प्रतीक है। श्रीकृष्ण ने प्रकृति की पूजा का संदेश देकर यह स्पष्ट किया कि जीवन का संतुलन प्रकृति के सम्मान से ही संभव है। वर्तमान समय में यह संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति

इस अवसर पर पूर्व विधायक आशुतोष उपाध्याय, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जितेंद्र उपाध्याय, आचार्य आनंद तिवारी, आचार्य तरुण मिश्र, पंडित मोहित द्विवेदी, सत्य प्रकाश मणि तिवारी, हरिओम उपाध्याय, ओमकार मिश्रा, प्रदीप उपाध्याय, ठाकुर प्रसाद मिश्रा, बालमुनि पांडेय, राजू सिंह, कमलेश तिवारी, महावीर पांडेय, मुख्य यजमान रमा तिवारी, मुकेश तिवारी, संजय तिवारी और रमावती देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन लीला का मुख्य संदेश क्या है?

गोवर्धन लीला का मुख्य संदेश यह है कि अहंकार का अंत निश्चित है और भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह कथा विश्वास और एकता की शक्ति दर्शाती है।

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कथा व्यास मानस मणि शास्त्री ने क्या कहा?

उन्होंने धर्म, सत्य और कर्तव्य पालन को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया तथा समाज में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।

यह कथा आज के समय में क्यों महत्वपूर्ण है?

यह कथा प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और अहंकार त्याग का संदेश देती है, जो वर्तमान समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।

समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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