ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत : खेल मैदान के पास देर रात हादसा, तीसरा मजदूर गंभीर

खेल मैदान के पास पलटी ट्रैक्टर-ट्रॉली और मौके पर मौजूद ग्रामीण व पुलिस, हादसे में दबे मजदूरों को निकालते हुए

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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हूक प्वाइंट: ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत की इस दर्दनाक घटना ने मजदूरों की सुरक्षा, ईंट-भट्ठों पर कार्यस्थितियों और ग्रामीण सड़कों की हालत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देर रात हुए हादसे में बिहार के गया जिले के दो युवकों की जान चली गई, जबकि एक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत की खबर ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जनपद के भाटपार रानी थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरैना गांव के खेल मैदान के समीप देर रात ईंट-भट्ठे की ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसके नीचे दबकर दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवहन व्यवस्था और मजदूर सुरक्षा के प्रति लापरवाही का भी आईना बनकर सामने आया है।

देर रात लौट रहे थे मजदूर, अचानक पलटी ट्रॉली

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वेलपार पंडित गांव निवासी राकेश पांडे के ईंट-भट्ठे पर कार्यरत मजदूर रात में ईंट उतारने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि सड़क के एक मोड़ पर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक पलट गई। चूंकि ट्रॉली पर मजदूर सवार थे, इसलिए वे सीधे नीचे दब गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

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जेसीबी की मदद से निकाले गए दबे मजदूर

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और पुलिस मौके पर पहुंच गए। प्रारंभिक प्रयासों में ग्रामीणों ने स्वयं मजदूरों को निकालने की कोशिश की, लेकिन ट्रॉली का वजन अधिक होने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद भट्ठे से जेसीबी मशीन मंगाई गई, जिसकी सहायता से ट्रॉली को हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। घायलों को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भाटपार रानी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने राहुल कुमार (25) और विकट (26) को मृत घोषित कर दिया।

तीसरा मजदूर जिंदगी के लिए संघर्षरत

हादसे में गंभीर रूप से घायल तीसरे मजदूर कृष्ण कुमार (25) को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि घायल मजदूर के इलाज में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

बिहार के गया जिले के थे तीनों मजदूर

मृतक और घायल तीनों मजदूर मूल रूप से बिहार के गया जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। वे पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र के ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर रहे थे। बेहतर रोज़गार की तलाश में सैकड़ों मजदूर हर वर्ष दूसरे राज्यों में आते हैं, लेकिन कई बार उन्हें बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पातीं। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित परिस्थितियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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पुलिस ने शुरू की जांच, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया

थानाध्यक्ष अभिषेक राय ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत हुई है। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह दुर्घटना वाहन के अनियंत्रित होने से हुई प्रतीत हो रही है, हालांकि पुलिस अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। यदि लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण सड़कों की हालत और सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना उस समय हुई जब मजदूर दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद लौट रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का मोड़ संकरा और असमतल है, जहां पहले भी छोटे हादसे हो चुके हैं। सवाल यह है कि क्या ऐसे संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेत या सुरक्षा प्रबंध पर्याप्त हैं? अक्सर देखा गया है कि ईंट-भट्ठों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में अधिक मजदूरों को बैठाकर ले जाया जाता है, जो स्वयं में जोखिमपूर्ण है।

मजदूर सुरक्षा मानकों पर गंभीर चिंतन आवश्यक

ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत की इस घटना ने श्रम सुरक्षा कानूनों के अनुपालन पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्या मजदूरों को यात्रा के दौरान सुरक्षा उपकरण या वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध कराया जाता है? क्या वाहन चालकों का प्रशिक्षण और लाइसेंस की जांच नियमित होती है? विशेषज्ञों का मानना है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा नियमों का पालन अक्सर कागजों तक सीमित रह जाता है।

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परिजनों में मचा कोहराम, गांव में शोक

हादसे की सूचना मृतकों के परिजनों को दे दी गई है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। उनके असामयिक निधन से परिवार पर आर्थिक और भावनात्मक संकट गहरा गया है। गांव में शोक की लहर है और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है।

प्रशासन से मुआवजा और जवाबदेही की मांग

स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतक मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए अलग से परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवारी बैठाने पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

अंततः, ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से दो मजदूरों की मौत की यह घटना केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह हमें याद दिलाती है कि विकास की दौड़ में कहीं न कहीं श्रमिकों की सुरक्षा और जीवन की कीमत को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जाते रहेंगे।

समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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