सामूहिक आत्महत्या मामला : बंद कमरे में पिता का खौफनाक फैसला, पत्नी और तीन मासूमों की मौत ने झकझोरा

सामूहिक आत्महत्या मामले में सुसाइड नोट, तीन मासूम बच्चों और पति-पत्नी की संयुक्त तस्वीर

✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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एक बंद कमरे में बिखरा हुआ परिवार, दीवार पर लिखा आखिरी पैग़ाम, मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया मौत से पहले का वीडियो और फर्श पर पड़े सवाल—यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस चुप्पी की कहानी है जिसे कोई सुन नहीं पाया।

सामूहिक आत्महत्या मामला एक बार फिर समाज, पुलिस और पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा करता है। एक ही कमरे में पति, पत्नी और तीन मासूम बच्चों की लाशें मिलना केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक दबाव, पारिवारिक टूटन और भीतर ही भीतर पलते दर्द का भयावह परिणाम है, जो समय रहते सामने नहीं आ सका। सुबह जब घर में बच्चों की हलचल नहीं दिखी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि दरवाजा खुलते ही एक पूरा परिवार हमेशा के लिए खामोश मिल जाएगा।

सुबह की खामोशी और टूटा हुआ दरवाजा

घटना का खुलासा तब हुआ, जब सुबह काफी देर तक बच्चे बाहर दिखाई नहीं दिए। पड़ोस में रहने वाले मनीष के भाई को शक हुआ। जब अंदर से कोई जवाब नहीं मिला और दरवाजा बंद पाया गया, तो उन्होंने मेन गेट फांदकर भीतर प्रवेश किया। कमरे का दरवाजा तोड़ते ही जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को सन्न कर दिया। एक कमरे में पांच शव पड़े थे—किसी की सांसें थम चुकी थीं, किसी की आंखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थीं।

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एक कमरे में पूरा परिवार, अलग-अलग हालात

जिस कमरे में यह त्रासदी सामने आई, उसका आकार लगभग 10×15 फीट था। इसी कमरे में किचन भी बना हुआ था। कमरे में एक बेड और एक चारपाई रखी थी। बेड पर महिला और दो छोटे बच्चे पड़े थे, जबकि तीसरी बच्ची चारपाई पर थी। पति का शव फर्श पर मिला। यह दृश्य खुद में कई सवाल खड़े करता है—किस क्रम में घटनाएं घटीं, किसने क्या सहा और किस पल उम्मीद पूरी तरह टूट गई।

पुलिस का शुरुआती आकलन

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति ने पहले पत्नी की हत्या की, फिर बच्चों की जान ली और अंत में खुद करंट लगाकर आत्महत्या कर ली। पति के हाथ जले हुए मिले हैं, जबकि महिला के सिर पर चोट के निशान पाए गए। कमरे से एक मूसल, रस्सी और दूध से भरा गिलास भी बरामद हुआ है। ये सभी साक्ष्य पुलिस की जांच की दिशा तय कर रहे हैं।

दीवार पर लिखा आखिरी सच

पुलिस को मौके से तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। पहला नोट रसोई की दीवार पर लिखा था। इसमें पति ने लिखा कि वह और उसकी पत्नी अपने पूरे होशोहवास में यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने किसी को दोषी न ठहराने और पुलिस से किसी को परेशान न करने की अपील की है। नोट में यह भी लिखा है कि उनके ऊपर किसी का कर्ज नहीं है और यदि कोई दावा करे तो उसे स्वीकार न किया जाए।

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पैसों और प्लॉट का जिक्र

दूसरे और तीसरे नोट में जमीन के लेन-देन का जिक्र है। लिखा गया है कि एक प्लॉट बेचा गया था, जिसके कुछ पैसे एक परिचित के पास हैं। जमीन की नाप के बाद बाकी रकम मिलने की बात कही गई थी। नोट में स्पष्ट किया गया है कि कुल कितनी रकम मिली और कितनी बाकी थी। यह विवरण बताता है कि परिवार आर्थिक लेन-देन को लेकर किसी भ्रम में नहीं था, फिर भी मानसिक दबाव बना हुआ था।

मोबाइल वीडियो में दर्ज दर्द

मृतक के मोबाइल से एक वीडियो भी बरामद हुआ है। इसमें वह खुद को परिचय देते हुए कहते हैं कि वह और उनका परिवार अपने दुखों से बेहद परेशान हैं और अपनी मर्जी से जान दे रहे हैं। उन्होंने फिर दोहराया कि इसमें किसी की कोई गलती नहीं है और पुलिस किसी को परेशान न करे। यह वीडियो जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

तंत्र-मंत्र एंगल पर भी जांच

पुलिस तंत्र-मंत्र के एंगल पर भी जांच कर रही है। जिस मंदिर में मृतक अक्सर पूजा करने जाता था, उसके पुजारी से भी पूछताछ की गई। हालांकि पुजारी ने साफ कहा कि मृतक का तंत्र-मंत्र से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने बताया कि वह सीधा-सादा और मेहनती व्यक्ति था, जिसने कुछ साल पहले शराब भी छोड़ दी थी।

परिवार और रिश्तों की पृष्ठभूमि

पत्नी अपने मायके की इकलौती बेटी थी। पति खेती करता था और परिवार की जिम्मेदारियां उसी पर थीं। पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। भाई पास में ही रहते थे। ससुराल और मायके दोनों तरफ से किसी तरह के गंभीर पारिवारिक विवाद की बात सामने नहीं आई है, जिससे यह मामला और भी उलझा हुआ प्रतीत होता है।

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प्रशासन और पुलिस के बयान

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह सामूहिक आत्महत्या का मामला लग रहा है, लेकिन हर एंगल से जांच की जा रही है। सुसाइड नोट, डायरी, वीडियो और मौके से मिले साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। प्रशासन ने भी इसे बेहद दुखद घटना बताया है और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

समाज के लिए चेतावनी

सामूहिक आत्महत्या मामला केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। यह समाज के लिए चेतावनी है कि मानसिक तनाव, अवसाद और पारिवारिक दबाव को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता है। जब दुख भीतर ही भीतर पनपते हैं और कोई सुनने वाला नहीं होता, तब परिणाम ऐसा ही भयावह होता है।

जांच जारी, सवाल बाकी

फिलहाल पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है। सवाल अभी भी कायम हैं—क्या यह पूरी तरह स्वैच्छिक था, या किसी अदृश्य दबाव ने इसे अंजाम तक पहुंचाया? क्या समय रहते मदद मिलती तो पांच जिंदगियां बच सकती थीं? इन सवालों के जवाब जांच के साथ सामने आएंगे, लेकिन जो चला गया, वह कभी वापस नहीं आएगा।

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