प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली सूची से मचा घमासान राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत बन्थरा में इन दिनों चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। योजना की पहली सूची जारी होते ही पात्र और अपात्र लाभार्थियों को लेकर क्षेत्र में असंतोष, आक्रोश और गंभीर आरोप सामने आने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और कार्यदाई संस्था व नगर पंचायत के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
सवाल यह नहीं है कि सूची में नाम कैसे जुड़े, सवाल यह है कि क्या वास्तव में जरूरतमंदों तक योजना का लाभ पहुंच पाया?
चयन सूची को लेकर क्यों उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली सूची तैयार करते समय शासनादेशों और पात्रता मानकों की अनदेखी की गई। कहा जा रहा है कि जिन परिवारों के पास पहले से पक्के मकान, पर्याप्त भूमि, या सरकारी सेवा व पेंशन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, उनके नाम भी सूची में शामिल कर दिए गए, जबकि वास्तव में जरूरतमंद और बेघर परिवार सूची से बाहर रह गए।
खलिहान और सुरक्षित भूमि पर निर्माण का आरोप
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। नगर पंचायत बन्थरा के वार्ड संख्या 12, रानी लक्ष्मीबाई नगर में गाटा संख्या 375, 376, 377, 443 और 445 जैसी खलिहान एवं सुरक्षित श्रेणी की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कराए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। शासनादेश के अनुसार ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है, इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां होने की बात कही जा रही है।
तहसील समाधान दिवस में दी गई शिकायत
सूत्रों के अनुसार इन कथित अवैध निर्माणों को लेकर 7 फरवरी 2026 को सरोजिनी नगर तहसील में आयोजित समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी की अध्यक्षता में लिखित शिकायत भी दी गई थी। शिकायत में अवैध निर्माण रोकने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई, हालांकि शिकायत के बाद भी स्थिति में कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देने का आरोप लगाया जा रहा है।
RTI में भी नहीं मिली स्पष्ट जानकारी
प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए नगर पंचायत बन्थरा से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सूची की छायाप्रति मांगी गई, लेकिन आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा पात्र और अपात्र लाभार्थियों की स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा गया। इससे संदेह और गहराता चला गया।
धन उगाही के आरोप और पहली किस्त
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पहली सूची में लगभग 840 लाभार्थियों के खातों में धनराशि जारी की गई। आरोप है कि कई ऐसे लोग, जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते थे, उनसे 15 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की राशि कथित रूप से वसूली गई। इस संबंध में कुछ समाचार पत्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है।
योजना के उद्देश्य पर सवाल
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य उन गरीब, असहाय और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। लेकिन यदि चयन प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों, रसूखदारों और कथित हितैषियों को प्राथमिकता दी जाती है, तो योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हटाए गए नामों से बढ़ा असंतोष
नगर पंचायत बन्थरा में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई ऐसे परिवारों के नाम सूची से हटा दिए गए जो वास्तव में पात्र थे। इससे क्षेत्र में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी का माहौल बनता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो असंतोष और गहराएगा।
जांच की मांग और प्रशासनिक जिम्मेदारी
पूरा मामला फिलहाल आरोपों और शिकायतों पर आधारित है और इस खबर की स्वतंत्र पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता। यह एक गंभीर जांच का विषय है। यदि जनता द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं, तो प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और वास्तविक पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिले।
मुख्यमंत्री से भी की गई शिकायत
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार से भी लिखित शिकायत की जा चुकी है और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई गई है। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जनता अब जांच और कार्रवाई की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की प्रतीक्षा कर रही है।






