मेरठ में नौचंदी थाने से चंद कदमों की दूरी पर दिनदहाड़े गैंगवार, करीब 20 राउंड फायरिंग, पुरानी दुश्मनी में युवक की हत्या और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल।
गोलियों की तड़तड़ाहट में असलम की हत्या—यह महज़ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मेरठ में पनप रही संगठित आपराधिक रंजिशों, पुलिस तंत्र की निष्क्रियता और खुलेआम कानून को चुनौती देने की प्रवृत्ति की भयावह तस्वीर है।
शुक्रवार को नौचंदी थाना क्षेत्र में जो कुछ हुआ, उसने न सिर्फ इलाके को दहला दिया, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा को लेकर गहरे प्रश्न भी खड़े कर दिए।
थाने से सौ मीटर दूर दिनदहाड़े खूनी खेल
मेरठ के नौचंदी थाने से महज सौ मीटर की दूरी पर स्थित जैदी फार्म इलाके में दिनदहाड़े हुई इस गैंगवार की घटना ने पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र की पोल खोल दी।
दो गुटों के बीच चली पुरानी दुश्मनी शुक्रवार को उस समय खूनी रूप ले बैठी, जब हिस्ट्रीशीटर से जुड़े एक मामले में आरोपी रहे बिलाल का भाई असलम अपने दोस्त शुएब के साथ घर से बाहर निकला।
बताया जाता है कि जैसे ही असलम स्कूटी लेने के लिए गली में पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे पांच हमलावरों ने उसे चारों ओर से घेर लिया।
इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। करीब 20 राउंड गोलियां चलने की बात सामने आ रही है, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
चार गोलियां लगीं, दोस्त को घर में घुसकर मारी गोली
हमलावरों की गोलीबारी का मुख्य निशाना असलम ही था।
उसे चार गोलियां लगीं और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।
असलम के साथ मौजूद शुएब जान बचाने के लिए भागा,
लेकिन हमलावर यहीं नहीं रुके।
उन्होंने शुएब का पीछा किया और उसके घर में घुसकर उस पर भी गोली चला दी, जो उसके कंधे में जा लगी।
इस पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर खुलेआम हथियार लहराते हुए फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जाते-जाते उन्होंने यह धमकी भी दी कि उन्होंने अपने साथी की हत्या का बदला ले लिया है
और आगे भी दुश्मनी रखने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा।
इलाके में दहशत, सड़कें सूनी पड़ीं
गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज से जैदी फार्म और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। दुकानें आनन-फानन में बंद हो गईं और लोग अपने घरों में दुबक गए। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं और उन्हें कानून का कोई भय नहीं रह गया है।
घायल शुएब को तुरंत लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वहीं असलम की हालत नाजुक होने के चलते उसे दिल्ली रेफर किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
20 माह पुरानी दुश्मनी की जड़
इस खूनी संघर्ष की जड़ करीब 20 महीने पुरानी है। चार जून 2024 को वर्चस्व की लड़ाई में बिजली बंबा मार्ग स्थित एक स्विमिंग पूल पर हिस्ट्रीशीटर मोहम्मद अरशद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में बिलाल और उसके साथियों को आरोपी बनाया गया था।
पुलिस ने उस समय बिलाल समेत पांच लोगों को जेल भेजा था। बिलाल अभी भी जेल में बंद है, जबकि उसके पिता इमरान, भाई असलम और अन्य आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके थे।
इसी हत्या के बाद से अरशद का परिवार बदले की आग में सुलग रहा था।
खुलेआम बदले की चेतावनी
अरशद का भाई असद, जो स्वयं नौचंदी थाने का हिस्ट्रीशीटर है, ने असलम के जेल से बाहर आने के बाद खुलेआम बदले की चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया पर भी उसने खून के बदले खून की बात लिखी थी।
इस संबंध में बिलाल के परिजनों ने पुलिस को जानकारी भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यदि समय रहते पुलिस ने सख्ती दिखाई होती, तो शायद यह वारदात टाली जा सकती थी।
जिला बदर के बावजूद सक्रिय आरोपी
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी असद को पहले ही जिला बदर किया जा चुका था। इसके बावजूद उसका शहर में सक्रिय रहना और इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी असद समेत 11 लोगों के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
सीओ अभिषेक तिवारी और एसपी सिटी आयुष विक्रम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जबकि अरशद के परिवार से जुड़े पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।
कानून व्यवस्था पर फिर सवाल
नौचंदी थाने के पास दिनदहाड़े हुई यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या अपराधियों को अब पुलिस का डर नहीं रहा? क्या हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखने की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है?
गोलियों की तड़तड़ाहट में असलम की हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि यह कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में और बड़े खतरे को न्योता दे सकता है।
“हम खबर को चीखने नहीं देंगे,
असर छोड़ने देंगे।”






