SIR प्रक्रिया पर राजभर का तीखा प्रहार — अखिलेश यादव पर भ्रम फैलाने का आरोप

जौनपुर में मीडिया से बातचीत करते पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर बयान देते हुए

✍️विकास पाठक की रिपोर्ट
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“जो चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं करता, उसे पहले सांसद-विधायक बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं” — ओमप्रकाश राजभर

SIR प्रक्रिया को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। शुक्रवार को जौनपुर पहुंचे पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे जानबूझकर भ्रामक बयान देकर समाज को गुमराह कर रहे हैं। राजभर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि SIR प्रक्रिया किसी सरकार की नहीं, बल्कि पूरी तरह भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

समाचार सार :
• SIR प्रक्रिया पर अखिलेश यादव के आरोपों को राजभर ने बताया भ्रामक
• PDA वर्ग के वोट काटे जाने के दावे को किया खारिज
• चुनाव आयोग पर सवाल उठाने वालों को इस्तीफे की नसीहत
• 2027 में सपा की स्थिति 2017 से भी खराब होने का दावा
• 22 फरवरी को आजमगढ़ में बड़ी जनसभा का ऐलान

भ्रामक बयान देकर समाज को गुमराह कर रहे हैं अखिलेश यादव

ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि SIR प्रक्रिया को लेकर PDA वर्ग के वोट काटे जाने का आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में किसी वर्ग को निशाना बनाया जा रहा होता, तो NDA में शामिल वे नेता, जो स्वयं PDA समाज से आते हैं, उनके नाम मतदाता सूची से क्यों नहीं हटाए गए।

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राजभर ने कहा कि वे स्वयं, केशव प्रसाद मौर्य, संजय चौहान और अनुप्रिया पटेल PDA वर्ग से आते हैं। यदि चुनाव आयोग पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता, तो सबसे पहले इन्हीं लोगों के वोट प्रभावित होते।

बूथ स्तर पर सपा कार्यकर्ता कर रहे हैं नाम संशोधन

कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव सार्वजनिक मंचों पर बयानबाज़ी कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बूथ स्तर पर वोट जोड़ने, नाम संशोधन कराने और कटवाने की प्रक्रिया में स्वयं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाद में इसी प्रक्रिया का दोष चुनाव आयोग और सरकार पर मढ़ दिया जाता है।

राजभर ने कहा कि जब चुनाव में हार की आशंका दिखने लगती है, तब संस्थाओं पर सवाल खड़े करना विपक्ष की पुरानी रणनीति रही है।

चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं तो पहले इस्तीफा दें

ओमप्रकाश राजभर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लोकतंत्र के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि जो नेता इसी आयोग के माध्यम से सांसद और विधायक बने हैं, उन्हें पहले नैतिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यदि उन्हें आयोग पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग ने SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाकर यह भरोसा दिलाया है कि बिना सूचना के किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जाएगा।

2027 में 2017 से भी खराब होगी सपा की स्थिति

राजभर ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की स्थिति 2017 से भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सड़कों, इंफ्रास्ट्रक्चर, आवास और बिजली जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है, जिसे जनता अब साफ़ देख रही है।

22 फरवरी को आजमगढ़ में बड़ी जनसभा

ओमप्रकाश राजभर ने आगामी चुनावी रणनीति की जानकारी देते हुए कहा कि 22 फरवरी को आजमगढ़ के अहिरौला गांव में एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी, जहां से 2027 के चुनाव का बिगुल फूंका जाएगा। पंचायत चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और समय पर चुनाव होंगे।

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उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में 62 सीटों पर पूरी ताकत से मैदान में उतरेगी और सीटों का अंतिम फैसला भाजपा के साथ आपसी सहमति से किया जाएगा।


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