भारत–नेपाल सीमावर्ती जिलों में बदला जमीन रजिस्ट्री का नियम, अब बिना पैन कार्ड नहीं होगी रजिस्ट्री

भारत नेपाल सीमा क्षेत्र में जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा प्रतीकात्मक दृश्य, पैन कार्ड, घर का मॉडल और दस्तावेज, अब बिना पैन कार्ड रजिस्ट्री नहीं

✍️दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
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भारत–नेपाल सीमावर्ती जिलों में जमीन रजिस्ट्री का नियम अब पूरी तरह बदल दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में संपत्ति लेन-देन को पारदर्शी और निगरानी योग्य बनाने के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। अब तक लागू फॉर्म-60 के माध्यम से रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। यह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और सीमा पार संदिग्ध निवेश पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।

समाचार सार: नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में अब जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री बिना पैन कार्ड संभव नहीं होगी। फॉर्म-60 की व्यवस्था खत्म कर सरकार ने अवैध धन और फर्जी लेन-देन पर सख्ती की है।

सरकार ने क्यों बदला जमीन रजिस्ट्री का नियम

भारत–नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों में लंबे समय से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ लोग फर्जी पहचान, बेनामी नामों और संदिग्ध माध्यमों से जमीन और संपत्तियां खरीद रहे हैं। इन लेन-देन में अवैध धन के निवेश और सीमा पार नेटवर्क की आशंकाएं भी जताई जाती रही हैं। भारत–नेपाल सीमावर्ती जिलों में जमीन रजिस्ट्री का नियम बदलकर सरकार ने ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में कदम उठाया है।

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महानिरीक्षक निबंधन ने जारी किए निर्देश

इस संबंध में उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार विभागीय ऑनलाइन लेखपत्र पंजीकरण सॉफ्टवेयर में खरीदार और विक्रेता—दोनों पक्षों के पैन कार्ड की अनिवार्य प्रविष्टि और डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। पैन कार्ड के बिना कोई भी रजिस्ट्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।

इन सीमावर्ती जिलों में लागू हुआ नया नियम

नया नियम विशेष रूप से नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में लागू किया गया है। इनमें गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में सीमा पार आवाजाही और जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर पहले भी प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत पड़ती रही है।

फॉर्म-60 की व्यवस्था क्यों की गई समाप्त

अब तक जिन लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होता था, वे फॉर्म-60 भरकर जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री करा सकते थे। जांच में सामने आया कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर कई बार फर्जी और अप्रमाणित लेन-देन किए गए। भारत–नेपाल सीमावर्ती जिलों में जमीन रजिस्ट्री का नियम बदलने के साथ ही यह रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

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आयकर विभाग और एजेंसियों को मिलेगी सीधी जानकारी

नई व्यवस्था लागू होने से संपत्ति से जुड़े सभी बड़े लेन-देन सीधे आयकर विभाग और अन्य संबंधित जांच एजेंसियों की निगरानी में आ जाएंगे। इससे टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अघोषित संपत्ति के मामलों की पहचान आसान होगी। यदि कोई पक्षकार पैन कार्ड प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसकी रजिस्ट्री स्वीकार नहीं की जाएगी।

सीमावर्ती सुरक्षा और पारदर्शिता की दिशा में कदम

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह निर्णय केवल राजस्व सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीमावर्ती सुरक्षा और आर्थिक पारदर्शिता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि जमीन और संपत्ति बाजार को निगरानी के दायरे में लाकर संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाई जा सकेगी।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर

ईमानदार खरीदार और विक्रेताओं के लिए इस नियम से कोई अतिरिक्त समस्या नहीं मानी जा रही है। हालांकि जिन लोगों के पास अभी तक पैन कार्ड नहीं है, उन्हें जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले पैन कार्ड बनवाना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सरल और ऑनलाइन है।

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कुल मिलाकर, भारत–नेपाल सीमावर्ती जिलों में जमीन रजिस्ट्री के नियम में किया गया यह बदलाव संपत्ति बाजार को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके प्रभाव के आधार पर अन्य जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

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