देवरिया के दो साल, कई अपराध—
14–16% की वृद्धि
पूर्वांचल का प्रमुख जिला देवरिया बीते दो वर्षों में जिस तरह से लगातार आपराधिक घटनाओं और उनसे जुड़ी चर्चाओं में रहा है, उसने इस जिले की सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना पर गहरे सवाल खड़े किए हैं। वर्ष 2025 की शुरुआत से लेकर 2026 के वर्तमान दौर तक देवरिया केवल अपराध के मामलों में ही नहीं, बल्कि अपराध के तरीके, कारण और प्रशासनिक प्रतिक्रिया को लेकर भी चर्चा के केंद्र में रहा है।
यह रिपोर्ट केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों की समीक्षा, चर्चित मामलों का विश्लेषण, और यह समझने का प्रयास है कि प्रशासन किन-किन मोर्चों पर उलझा रहा और क्यों कई मामलों में समाधान के बजाय विवाद बढ़ते चले गए।
2025–26 का अपराध परिदृश्य: आंकड़े क्या कहते हैं?
पुलिस और प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, देवरिया में 2025 की पहली तिमाही से ही अपराध के ग्राफ में धीमी लेकिन निरंतर बढ़ोतरी देखी गई।
कुल पंजीकृत अपराध
2025 में कुल दर्ज मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14–16% की वृद्धि। 2026 की शुरुआत (जनवरी–फरवरी) में यह बढ़त और तेज़ होकर 20% के आसपास पहुंची।
गंभीर अपराध (हत्या, हत्या का प्रयास)
2025 में हत्या के मामलों में स्थिरता दिखी, लेकिन हत्या के प्रयास के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2026 की शुरुआत में यही प्रयास कई जगह वास्तविक हत्याओं में बदलते दिखे।
महिलाओं से जुड़े अपराध
2025 में दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और छेड़छाड़ के मामलों में लगभग 22–25% की वृद्धि। 2026 में इसमें डिजिटल उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग भी तेजी से जुड़ गई।
संपत्ति व साइबर अपराध
2025 में साइबर ठगी अपेक्षाकृत सीमित थी, लेकिन 2026 आते-आते यह सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली श्रेणी बन गई।
आंकड़े यह बताते हैं कि समस्या केवल अपराध बढ़ने की नहीं, बल्कि अपराध के स्वरूप के बदलने की है—जहाँ हिंसा, तकनीक और सामाजिक तनाव एक-दूसरे में घुलते जा रहे हैं।
2025 के प्रमुख आपराधिक मामले: जिनसे चर्चा शुरू हुई
वर्ष 2025 देवरिया के लिए एक ट्रांजिशन ईयर रहा—जहाँ पुराने विवाद नए तरीकों से फूट पड़े।
(क) जमीन विवाद से जुड़ी हत्याएँ
2025 की पहली छमाही में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों—भाटपाररानी, बरियारपुर, सलेमपुर—में भूमि विवाद से जुड़ी कई हिंसक घटनाएँ सामने आईं। खेत की मेड़, बंटवारा और कब्जे को लेकर हुए विवादों में धारदार हथियारों और अवैध तमंचों का प्रयोग। कई मामलों में पीड़ित और आरोपी दोनों पक्ष पहले से मुकदमों में उलझे हुए थे।
प्रशासन की उलझन: राजस्व विभाग, पुलिस और पंचायत—तीनों के स्तर पर समन्वय की कमी। जमीन का विवाद कानूनन सुलझने से पहले ही हिंसा में बदल गया।
(ख) पारिवारिक अपराध और “घरेलू हिंसा से हत्या तक”
2025 में कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ घरेलू कलह ने घातक रूप ले लिया। पति-पत्नी के विवाद, संपत्ति और पारिवारिक सम्मान से जुड़े, तनाव, बच्चों के सामने घटित घटनाएँ, जिसने समाज को झकझोर दिया।
ये अपराध अचानक नहीं हुए, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे तनाव का परिणाम थे—जिसे न तो सामाजिक स्तर पर और न ही प्रशासनिक स्तर पर समय रहते पहचाना गया।
(ग) महिलाओं के खिलाफ अपराध: 2025 की चेतावनी
2025 में देवरिया में महिला अपराधों ने चेतावनी संकेत दे दिए थे। दहेज उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी, थानों में समझौते का दबाव, कई मामलों में देर से एफआईआर।
हालाँकि महिला हेल्पलाइन और मिशन शक्ति जैसे प्रयास मौजूद थे, लेकिन ग्राउंड-लेवल पर भरोसे की कमी साफ दिखी।
2026 की शुरुआत: जब अपराध सुर्खियाँ बनने लगे
(क) दिनदहाड़े वारदातें
जनवरी–फरवरी 2026 में, खुले बाजारों और सड़कों पर फायरिंग, आपसी रंजिश में अचानक हमला, इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया कि अपराधियों में कानून का भय क्यों घटा?
(ख) साइबर और ठगी के चर्चित मामले
2026 में देवरिया में, फर्जी अधिकारी बनकर ठगी, ऑनलाइन लोन ऐप और UPI फ्रॉड, सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 की शुरुआत में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें 30% से अधिक बढ़ीं।
प्रशासन की परेशानी: साइबर अपराधियों के नेटवर्क अंतरराज्यीय हैं, जबकि स्थानीय पुलिस संसाधन सीमित।
(ग) महिलाओं से जुड़े चर्चित विवाद
2026 की शुरुआत में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें सोशल मीडिया, यूट्यूब/डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्थिक और शारीरिक शोषण के आरोप। इन मामलों ने केवल कानून नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक बहस भी छेड़ दी।
देवरिया किस मोड़ पर खड़ा है?
2025 की शुरुआत से 2026 तक देवरिया का अपराध परिदृश्य यह बताता है कि समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक तनाव, आर्थिक दबाव, तकनीकी बदलाव और प्रशासनिक सीमाओं की संयुक्त उपज है।
देवरिया आज ऐसे चौराहे पर है जहाँ केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि समन्वित सामाजिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यदि 2026 को सुधार का वर्ष बनाना है, तो 2025–26 की इन घटनाओं को केवल “अपराध की सूची” नहीं, बल्कि चेतावनी दस्तावेज़ की तरह पढ़ना होगा।

