पूंछरी क्षेत्र के विकास हेतु ₹67 करोड़ की कार्ययोजना के अंतर्गत सौंदर्यीकरण, परिक्रमा मार्ग, ड्रेनेज, जल प्रबंधन और धार्मिक विरासत संरक्षण से जुड़े कार्य तेज़ी से प्रगति पर हैं। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने स्पष्ट किया है कि आगामी पखवाड़े में अधिकांश कार्य पूर्णता की दिशा में होंगे, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा।
पूंछरी क्षेत्र के विकास हेतु ₹67 करोड़ की कार्ययोजना को राजस्थान सरकार ने ऐतिहासिक प्राथमिकता देते हुए धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। डीग जिले के अंतर्गत स्थित इस धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र को राज्य की विरासत नीति के केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने क्षेत्र का दौरा कर प्रगति की गहन समीक्षा की।
₹67 करोड़ की विकास परियोजनाएं और प्रशासनिक प्रतिबद्धता
निरीक्षण के पश्चात मीडिया से बातचीत में लखावत ने बताया कि पूंछरी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु लगभग 67 करोड़ रुपये के कार्यादेश पूर्व में ही स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन योजनाओं में परिक्रमा मार्ग का सुदृढ़ीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और जल निकासी जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए और समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
आगामी पखवाड़े में कार्य पूर्णता की संभावना
अध्यक्ष लखावत ने भरोसा जताया कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आगामी पखवाड़े के भीतर अधिकांश विकास कार्य पूर्णता की ओर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को असुविधा से बचाने के लिए कार्यों को चरणबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम और जल प्रबंधन पर विशेष ज़ोर
निरीक्षण के दौरान ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था को लेकर विशेष समीक्षा की गई। लखावत ने स्पष्ट किया कि जलभराव जैसी समस्याएं धार्मिक स्थलों की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों के लिए बाधक होती हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप भरतपुर विकास प्राधिकरण को वैज्ञानिक और स्थायी जल निकासी प्रणाली सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके साथ ही जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए कि कुंडों, पोखरों और जल संरचनाओं से पानी की निर्बाध निकासी सुनिश्चित की जाए। उद्देश्य यह है कि परिक्रमा मार्ग वर्ष भर सुगम, स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे, चाहे मौसम कोई भी हो।
‘कृष्ण गमन पथ’ और पौराणिक विरासत का संरक्षण
विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए लखावत ने स्पष्ट किया कि पूंछरी क्षेत्र केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी जीवंत विरासत है। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास योजनाओं में ऐसे कलात्मक और सांस्कृतिक तत्वों का समावेश हो, जो कृष्ण की दिव्य कथाओं को श्रद्धालुओं के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत करें।
मथुरा से उज्जैन तक प्रस्तावित ‘कृष्ण गमन पथ’ कॉरिडोर और बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग के सुदृढ़ीकरण को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। लखावत के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े निविदा कार्य आगामी दिनों में पूरे कर लिए जाएंगे, जिससे यह महत्त्वाकांक्षी योजना गति पकड़ सके।
प्रशासनिक निरीक्षण, मानचित्र अवलोकन और ज़मीनी सत्यापन
दौरे के दौरान जिला कलेक्टर डीग उत्सव कौशल और तहसीलदार जुगीता मीना ने अध्यक्ष को क्षेत्रीय विकास का विस्तृत मानचित्र प्रस्तुत किया। मानचित्र के माध्यम से सड़क, ड्रेनेज, सौंदर्यीकरण और अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों की प्रगति को समझाया गया। इसके बाद लखावत ने स्वयं मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया और परिक्रमा मार्ग की पक्की सड़कों को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
धार्मिक मर्यादा और गुणवत्ता सर्वोपरि
निरीक्षण के समापन पर लखावत ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान भी झलकना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूंछरी क्षेत्र का विकास राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है और इसे उदाहरण के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी को निर्देशित किया गया कि समन्वय और जवाबदेही के साथ कार्य पूरे किए जाएं, ताकि यह परियोजना समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण रूप से पूर्ण हो सके।






