मोमोज खिलाकर उड़ाए 85 लाख के गहने—यह पंक्ति जितनी चौंकाने वाली लगती है, उससे कहीं अधिक हैरान करने वाली है इस घटना की पूरी कहानी। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सामने आया यह मामला न सिर्फ अपराध की नई शैली को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह मासूम बच्चों को निशाना बनाकर शातिर अपराधी बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। यह घटना केवल चोरी या ठगी भर नहीं है, बल्कि सामाजिक लापरवाही, पारिवारिक सतर्कता की कमी और बच्चों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों पर सीधा सवाल खड़ा करती है।
मोमोज के ठेले से शुरू हुई कहानी
देवरिया-कसया मार्ग स्थित डुमरी चौराहे पर रोज़ की तरह मोमोज का एक ठेला लगा था। यहां आने-जाने वालों के बीच यह ठेला कोई नई बात नहीं थी। लेकिन इसी ठेले पर तीन युवकों की नजर एक ऐसे किशोर पर पड़ी, जिसकी मासूमियत उनके लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला यह किशोर अक्सर इस रास्ते से आता-जाता था और मोमोज का शौकीन था। यही शौक धीरे-धीरे अपराधियों की योजना का हिस्सा बन गया।
दोस्ती, भरोसा और फिर बहलावा
शिकायत के अनुसार, मोमोज बेचने वाले तीन युवकों ने पहले किशोर से सामान्य बातचीत शुरू की। हाल-चाल पूछना, नाम जानना और फिर रोज़ाना मुस्कान के साथ मोमोज देना—यही उनकी रणनीति थी। किशोर को लगा कि उसे मुफ्त में मोमोज मिल रहे हैं, और बदले में बस थोड़ी-सी दोस्ती करनी है। लेकिन यही दोस्ती धीरे-धीरे भरोसे में बदली और भरोसा लालच में।
अपराधियों ने किशोर के मन में यह बात बैठा दी कि अगर वह उनके लिए कुछ “छोटा-सा काम” कर दे, तो उसे और भी चीजें मिलेंगी। मासूम दिमाग ने यह समझने की कोशिश ही नहीं की कि यह खेल कितना खतरनाक हो सकता है।
घर की अलमारी तक पहुंची साजिश
युवकों ने धीरे-धीरे किशोर से उसके परिवार, घर और अलमारी में रखे गहनों के बारे में जानकारी हासिल की। किशोर को यह एहसास ही नहीं हुआ कि वह अनजाने में कितनी बड़ी जानकारी साझा कर रहा है। फिर एक दिन उसे बहला-फुसलाकर कहा गया कि अगर वह घर से कुछ गहने ले आए, तो बदले में उसे पैसे और खाने-पीने की चीजें मिलेंगी।
यही वह क्षण था, जब मोमोज का लालच 85 लाख रुपये के गहनों पर भारी पड़ गया। किशोर ने बिना किसी भय या संदेह के घर की अलमारी से गहने निकाले और ठेले पर मौजूद युवकों को सौंप दिए।
गहने गायब, परिवार में मचा हड़कंप
मामले का खुलासा तब हुआ, जब किशोर की बहन ने अपने गहने मांगे। अलमारी खोली गई तो वह खाली मिली। पहले तो परिवार को लगा कि शायद गहने कहीं और रख दिए गए होंगे, लेकिन जब तलाश के बाद भी कुछ नहीं मिला, तो घबराहट बढ़ गई।
कड़ी पूछताछ के बाद किशोर ने पूरी बात बताई—कैसे मोमोज के बदले उसने गहने दे दिए। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। अनुमान लगाया गया कि गहनों की कुल कीमत करीब 85 लाख रुपये है, जिनमें बेटे और बेटी दोनों के जेवर शामिल थे।
पुलिस जांच और दर्ज हुई एफआईआर
पीड़ित पिता विमलेश मिश्रा, जो वाराणसी के एक मंदिर में पुजारी हैं, ने रामपुर कारखाना थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, फरार आरोपियों की तलाश जारी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।
अपराध की नई शैली पर चिंता
यह मामला केवल देवरिया तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में बच्चों को निशाना बनाकर ठगी और चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। अपराधी जानते हैं कि बच्चे जल्दी भरोसा कर लेते हैं और लालच में आ जाते हैं। मोमोज, चॉकलेट या मोबाइल गेम्स—इन सबका इस्तेमाल अब अपराध की रणनीति में होने लगा है।
परिवार और समाज के लिए चेतावनी
इस घटना ने अभिभावकों के लिए एक गंभीर संदेश छोड़ा है। बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि यह भी सिखाना ज़रूरी है कि अजनबियों से कैसे व्यवहार करना है, लालच से कैसे बचना है और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत बड़ों को कैसे बताना है।
साथ ही समाज को भी सतर्क रहना होगा। ठेले, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
निष्कर्ष: मोमोज से सबक तक
मोमोज खिलाकर उड़ाए 85 लाख के गहने सिर्फ एक सनसनीखेज हेडलाइन नहीं, बल्कि यह हमारे समय की एक कड़वी सच्चाई है। यह घटना बताती है कि अपराध अब बंदूक या ताले से नहीं, बल्कि भरोसे और लालच से भी किए जा रहे हैं। पुलिस की जांच आगे क्या मोड़ लेती है, यह देखना बाकी है, लेकिन यह मामला लंबे समय तक एक चेतावनी बनकर याद रखा जाएगा।










