गणतंत्र दिवस पर मंच बना ‘मज़ाक’ का मैदान!
बुर्का पहनकर डांस करती छात्राएं, गोंडा का इंटर कॉलेज जांच के घेरे में

गोंडा के इंटर कॉलेज में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान हिंदू लड़कियां बुर्का पहनकर मंच पर नृत्य करती हुईं ।

🖊️ चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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गणतंत्र दिवस पर बुर्का पहनकर डांस विवाद ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सामाजिक,
धार्मिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। जिस मंच से संविधान, राष्ट्रीय एकता और
लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक दिखनी चाहिए थी, वही मंच अब सवालों, नाराज़गी और प्रशासनिक जांच का केंद्र बन गया है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान बुर्का पहनकर डांस करती छात्राओं के
वायरल वीडियो ने न सिर्फ स्कूल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर किया है
कि क्या शैक्षणिक संस्थानों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की कोई स्पष्ट मर्यादा बची है।

समाचार सार: गणतंत्र दिवस के मंच पर हुई एक ‘मनोरंजन प्रस्तुति’ कैसे धार्मिक भावनाओं,
सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक जिम्मेदारी की कसौटी बन गई—यही सवाल अब गोंडा से लखनऊ तक गूंज रहा है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाया तनाव

मामला गोंडा जिले के
गुरु चरण श्रीवास्तव ए.आर इंटर कॉलेज
का है, जहां 26 जनवरी के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के तीन अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर
तेजी से वायरल हो गए। इन वीडियो में हिंदू समाज की छात्राएं बुर्का पहनकर हरियाणवी और बॉलीवुड गानों पर
डांस करती दिखाई दे रही हैं, जबकि एक वीडियो में छात्राएं ‘भूतों का नाटक’ करती भी नजर आ रही हैं।

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बताया जा रहा है कि पहला वीडियो करीब 23 सेकंड का है, जिसमें बुर्का पहनी छात्राएं हरियाणवी गाने पर थिरकती नजर आती हैं।
दूसरा वीडियो 37 सेकंड का है, जिसमें फिल्मी गानों पर नृत्य किया गया है, जबकि तीसरा 27 सेकंड का वीडियो
डांस के साथ-साथ भूतों की प्रस्तुति को दिखाता है। इन दृश्यों के सामने आते ही मामला सोशल मीडिया से निकलकर
सड़कों और समाज तक पहुंच गया।

दोनों समुदायों में गुस्सा, सवाल प्रशासन पर

गणतंत्र दिवस पर बुर्का पहनकर डांस विवाद की सबसे संवेदनशील परत यह है कि इस मामले में
हिंदू और मुस्लिम—दोनों समाजों में नाराज़गी देखने को मिली है। हिंदू समाज के लोगों का कहना है कि
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह की प्रस्तुति देश की गरिमा और सांस्कृतिक मर्यादा के खिलाफ है।

वहीं मुस्लिम समाज के लोगों ने भी इस प्रस्तुति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बुर्का
धार्मिक पहचान से जुड़ा विषय है और उसे नृत्य या भूतों के नाटक के साथ जोड़ना अपमानजनक है।
दोनों ही पक्षों की नाराज़गी का केंद्र अंततः कॉलेज प्रशासन और कार्यक्रम की अनुमति देने वाली व्यवस्था बन गई।

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गणतंत्र दिवस की गरिमा पर उठे सवाल

26 जनवरी का दिन केवल एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है।
स्कूलों और कॉलेजों में इस दिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से अपेक्षा की जाती है कि वे
देश की विविधता, एकता और सांस्कृतिक संतुलन को दर्शाएं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस प्रस्तुति को तैयार करते समय किसी स्तर पर यह सोचा गया कि
इसका सामाजिक प्रभाव क्या होगा? क्या शिक्षकों और प्रबंधन की जिम्मेदारी यहीं खत्म हो जाती है
कि छात्र जो चाहें मंच पर प्रस्तुत कर दें, या फिर मार्गदर्शन और विवेक भी शिक्षा का हिस्सा है?

प्रिंसिपल ने लिखित रूप में मांगी माफी

विवाद बढ़ने और माहौल गरमाने के बाद इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल राजू श्रीवास्तव ने पूरे मामले पर
लिखित रूप में माफी मांगी है। उन्होंने न केवल सार्वजनिक तौर पर क्षमा प्रार्थना की,
बल्कि मनकापुर कोतवाली में भी अपना लिखित माफीनामा सौंपा।

प्रिंसिपल ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था,
जिसमें “भूतों की टोली मिक्स सॉन्ग” नामक प्रस्तुति दी गई। यह प्रस्तुति स्कूल की छात्राओं द्वारा ही की गई थी।
यदि इससे किसी भी समाज या व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं, तो स्कूल परिवार की ओर से वे क्षमा प्रार्थी हैं
और भविष्य में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं किया जाएगा।

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DIOS जांच में जुटे, जवाब तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) डॉ. रामचंद्र ने जांच शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।

DIOS के अनुसार, विद्यालय के प्रबंधक और प्रिंसिपल—दोनों से जवाब मांगा गया है।
जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शिक्षा विभाग इस बात को भी देख रहा है कि क्या सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति और निगरानी में कोई चूक हुई।

शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी

गणतंत्र दिवस पर बुर्का पहनकर डांस विवाद केवल एक स्कूल की घटना नहीं है।
यह पूरे शैक्षणिक तंत्र के लिए चेतावनी है कि आज के डिजिटल दौर में मंच पर हुआ हर कार्यक्रम
पलों में सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है।

शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक समझ और
जिम्मेदार नागरिक बनाने की प्रक्रिया भी है। यदि इसी स्तर पर संतुलन नहीं रखा गया,
तो ऐसे विवाद भविष्य में और गहराते जाएंगे।

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