लखनऊ नगर आयुक्त औचक निरीक्षण : जोन-5 ऑफिस में गैरहाजिरी पर सख्ती, एक दिन का वेतन काटने के आदेश

लखनऊ नगर आयुक्त गौरव कुमार जोन-5 कार्यालय का औचक निरीक्षण करते हुए, कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य व्यवस्था की समीक्षा

सर्वेश यादव की रिपोर्ट
IMG-20260131-WA0029
previous arrow
next arrow

हूक पॉइंट: सरकारी कार्यालयों में समय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार नगर आयुक्त खुद मैदान में उतरे और जोन-5 कार्यालय में लापरवाही को मौके पर ही दर्ज कर सख्त संदेश दे दिया।

लखनऊ नगर आयुक्त औचक निरीक्षण के तहत नगर निगम प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया, जब शुक्रवार सुबह नगर आयुक्त गौरव कुमार ने जोन-5 कार्यालय का बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया। सुबह करीब 11 बजे तक कई कर्मचारी कार्यालय से नदारद पाए गए। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालती है।

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने खुद उपस्थिति रजिस्टर मंगवाया और कर्मचारियों की हाजिरी की बारीकी से जांच की। जो कर्मचारी निर्धारित समय तक कार्यालय नहीं पहुंचे थे, उनके नाम के सामने तत्काल एब्सेंट दर्ज कराया गया। इसके साथ ही, लापरवाह कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के आदेश देकर उन्होंने साफ कर दिया कि समय अनुशासन में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

⏰ समय पालन पर सख्त रुख, संदेश बिल्कुल स्पष्ट

नगर आयुक्त गौरव कुमार का यह कदम सिर्फ औपचारिक कार्रवाई नहीं था, बल्कि नगर निगम के पूरे तंत्र के लिए एक स्पष्ट चेतावनी भी थी। उन्होंने कहा कि कार्यालय समय पर उपस्थित रहना किसी कर्मचारी पर उपकार नहीं, बल्कि उसकी मूल जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी और कर्मचारी समय से कार्यालय नहीं पहुंचेंगे, तो नागरिकों की शिकायतें, टैक्स से जुड़े काम और फाइलों का निस्तारण कैसे समय पर हो पाएगा—यह गंभीर प्रश्न है।

इसे भी पढें  रात के अंधेरे में सरकारी बंजर भूमि पर अवैध मिट्टी खनन का आरोप

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में उपस्थिति व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नगर आयुक्त ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे।

🏢 कार्यालय भवन की हालत भी सवालों के घेरे में

केवल कर्मचारियों की गैरहाजिरी ही नहीं, बल्कि जोन-5 कार्यालय भवन की भौतिक स्थिति भी निरीक्षण के दौरान संतोषजनक नहीं पाई गई। कई स्थानों पर दीवारें जर्जर हालत में थीं, प्लास्टर उखड़ा हुआ था और रख-रखाव की कमी साफ दिखाई दे रही थी। कार्यालय परिसर में आने वाले नागरिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर यह स्थिति चिंताजनक मानी गई।

नगर आयुक्त ने इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए जोनल अधिकारी को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यालय भवन केवल कामकाज की जगह नहीं, बल्कि प्रशासन की छवि भी होता है। यदि भवन जर्जर और अव्यवस्थित होगा, तो उसका असर जनता के भरोसे पर भी पड़ेगा।

इसे भी पढें  लखनऊ में सरकारी ज़मीनों की खुली लूट :भूमाफिया–खनन माफिया गठजोड़, प्रशासनिक संरक्षण और न्याय से वंचित ग्रामीण

नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि जर्जर दीवारों की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, प्लास्टर कार्य दुरुस्त किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्यालय परिसर कर्मचारियों व नागरिकों दोनों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित हो।

🧹 स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं पर भी फोकस

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने कार्यालय की स्वच्छता व्यवस्था पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि साफ-सुथरा कार्यालय न सिर्फ कार्यक्षमता बढ़ाता है, बल्कि कर्मचारियों में भी सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित करता है। शौचालय, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और फाइलों के रख-रखाव जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नागरिक जब किसी काम से नगर निगम कार्यालय आते हैं, तो उन्हें अव्यवस्था और गंदगी का सामना नहीं करना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें सम्मानजनक और सुचारू वातावरण उपलब्ध कराए।

💰 टैक्स वसूली की समीक्षा, राजस्व पर जोर

निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने जोन-5 की टैक्स वसूली व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा बैठक भी की। इस बैठक में संपत्ति कर (हाउस टैक्स) की वसूली की प्रगति, बकाया राशि और निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि की जानकारी ली गई। नगर आयुक्त ने पाया कि कुछ मामलों में वसूली की गति अपेक्षाकृत धीमी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि टैक्स वसूली को प्राथमिकता के आधार पर तेज किया जाए। साथ ही, म्यूटेशन यानी नामांतरण से जुड़ी लंबित फाइलों की पेंडेंसी पर भी गहन चर्चा हुई। नगर आयुक्त ने साफ कहा कि अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

इसे भी पढें  यूपी में कोडीन कफ सिरप घोटाला:बयानबाज़ी से जातीय नैरेटिव तक—अखिलेश, धनंजय और बृजभूषण आमने-सामने

नगर आयुक्त गौरव कुमार का स्पष्ट संदेश: टैक्स वसूली नगर निगम की आर्थिक रीढ़ है। राजस्व में वृद्धि होगी तभी शहर के विकास कार्यों, सफाई, सड़क, प्रकाश और अन्य नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए और टैक्स दायरे में आने वाली संपत्तियों की पहचान कर वसूली सुनिश्चित की जाए। नगर आयुक्त ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम किया जाए, ताकि नागरिकों का विश्वास नगर निगम पर बना रहे।

कुल मिलाकर, लखनऊ नगर आयुक्त औचक निरीक्षण ने जोन-5 कार्यालय में न सिर्फ अनुशासनहीनता को उजागर किया, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक ठोस संदेश भी दिया। कर्मचारियों की समयपालन की जिम्मेदारी, कार्यालय भवन की दशा, स्वच्छता और टैक्स वसूली—हर पहलू पर सख्ती और स्पष्ट निर्देश इस बात का संकेत हैं कि नगर निगम अब ढिलाई के मूड में नहीं है।

प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि आने वाले दिनों में अन्य जोनों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण किए जा सकते हैं। ऐसे में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह समय आत्ममंथन और सुधार का है।

लखनऊ में घरेलू विवाद के बाद आत्महत्या करने वाली युवती की सांकेतिक तस्वीर
मज़ाक में कही गई एक टिप्पणी से आहत होकर युवती ने जीवन पर सवाल उठा दिया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top