स्मार्ट प्रीपेड मीटर विरोध के बीच केंद्र का बड़ा फैसला

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के विरोध के बीच भारत सरकार द्वारा स्मार्ट मीटर पखवाड़ा आयोजित करने का निर्णय दर्शाती प्रतीकात्मक इमेज

✍️ चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध, लगातार बढ़ती शिकायतों और उपभोक्ताओं की नाराज़गी के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। ऊर्जा मंत्रालय ने 9 फरवरी 2026 से 23 फरवरी 2026 तक पूरे देश में “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान जिन उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं, वहां बिजली वितरण कंपनियों की टीमें पहुंचकर प्रदर्शन सत्र आयोजित करेंगी, पूरी जानकारी देंगी और उपभोक्ताओं से अनिवार्य रूप से लिखित फीडबैक लेंगी।

हूक पॉइंट : पहली बार केंद्र सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों को औपचारिक रूप से दर्ज करने और राज्यों से समेकित रिपोर्ट तलब करने की व्यवस्था की है—यानी अब हर घर की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंचेगी।

देशव्यापी असंतोष के बीच आया केंद्र का निर्देश

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र (मुंबई), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात सहित देश के अनेक राज्यों में उपभोक्ताओं का विरोध लगातार तेज होता गया है। कहीं मीटर के तेज चलने की शिकायत है, तो कहीं बैलेंस न दिखने, अचानक बिजली कटने और पुराने बिलों से अधिक राशि वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने सभी विद्युत वितरण कंपनियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उपभोक्ता संवाद का वास्तविक मंच बने।

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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की मौजूदा स्थिति

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार प्रदेश में अब तक 61 लाख 64 हजार 908 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 47 लाख 43 हजार 499 मीटर वर्तमान में प्रीपेड मोड में कार्यरत बताए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त पावर कॉरपोरेशन द्वारा 3,92,411 चेक मीटर भी स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्मार्ट मीटर की रीडिंग का मिलान करना था।

हालांकि, उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि इन चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट आज तक भारत सरकार को नहीं भेजी गई है। परिषद का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर वह लगातार भारत सरकार और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (REC) से शिकायत करता चला आ रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सार्वजनिक रिपोर्ट सामने नहीं आई।

आठ लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बैलेंस तक नहीं दिख रहा

उपभोक्ता परिषद ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि उत्तर प्रदेश में 8 लाख से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्हें अपने स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बैलेंस तक दिखाई नहीं दे रहा। इसके अलावा अधिक बिल आने, मीटर के असामान्य रूप से तेज चलने, तकनीकी खामियों और सॉफ्टवेयर संबंधी त्रुटियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

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परिषद का यह भी दावा है कि कुछ मामलों में महत्वपूर्ण तकनीकी पैरामीटर की अनदेखी की गई, जिसके चलते एक नामी मीटर निर्माता कंपनी को नोटिस जारी करना पड़ा। यह स्थिति न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर करती है, बल्कि पूरे स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है।

“स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” में क्या होगा खास

ऊर्जा मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार 9 फरवरी से 23 फरवरी 2026 तक चलने वाले “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” के दौरान बिजली वितरण कंपनियों की टीमें उन सभी उपभोक्ताओं के घर जाएंगी, जहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। वहां डेमोंस्ट्रेशन सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें मीटर की कार्यप्रणाली, रिचार्ज प्रक्रिया, बैलेंस देखने का तरीका और संभावित शिकायत निवारण प्रक्रिया को समझाया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरान उपभोक्ताओं से लिखित फीडबैक लेना अनिवार्य किया गया है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी राज्यों को 15 दिनों के भीतर अपनी समेकित रिपोर्ट भारत सरकार को भेजनी होगी।

उपभोक्ता परिषद की अपील: अपनी बात लिखित में दर्ज कराएं

अवधेश कुमार वर्मा ने उत्तर प्रदेश सहित देशभर के सभी विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि जब उनके घर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर का प्रदर्शन सत्र आयोजित हो, तो वे अपनी हर समस्या को लिखित रूप में दर्ज कराएं। चाहे मामला अधिक बिल का हो, मीटर के तेज चलने का, बैलेंस न दिखने का या किसी अन्य तकनीकी खामी का—हर शिकायत को स्पष्ट शब्दों में दर्ज कराना बेहद जरूरी है।

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उनका कहना है कि यह पहला अवसर है जब उपभोक्ताओं की सामूहिक आवाज को एक औपचारिक सरकारी प्रक्रिया के माध्यम से सीधे भारत सरकार तक पहुंचाया जा सकता है। यदि उपभोक्ता इस अवसर को गंभीरता से लेते हैं, तो स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खामियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है और बिजली कंपनियों की मनमानी पर अंकुश संभव है।

क्या बदलेगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर का भविष्य?

“स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उठ रहे सवालों का उत्तर तलाशने का अवसर है। यदि फीडबैक प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी हुई और राज्यों की रिपोर्ट पर गंभीरता से कार्रवाई हुई, तो आने वाले समय में स्मार्ट मीटर व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। अब यह उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों—दोनों की जिम्मेदारी है कि यह पखवाड़ा वास्तव में संवाद और समाधान का माध्यम बने।

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