ड्रोन तस्वीरों ने हादसे की जगह को बेनकाब कर दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल—जब सब कुछ बिगड़ रहा था, तब कोई आपात संकेत क्यों नहीं दिया गया?
महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे को लेकर सामने आ रही जानकारियाँ अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जिस स्थान पर यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उसकी ड्रोन तस्वीरें सामने आने के बाद यह स्पष्ट होता जा रहा है कि हादसा केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि निर्णयात्मक स्तर पर हुई लापरवाही का परिणाम भी हो सकता है। यह वही विमान था, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार सवार थे और जिसे अंतिम समय में रनवे पर उतारने की दो असफल कोशिशें की गईं।
✈️ पहली लैंडिंग की कोशिश क्यों असफल रही?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, पायलट ने पहली बार बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग का प्रयास किया था, लेकिन रनवे की दृश्यता स्पष्ट नहीं थी। बताया जा रहा है कि उस समय मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं था और हवा की दिशा भी विमान के अनुकूल नहीं पड़ रही थी। इसके चलते पायलट ने सतर्कता बरतते हुए विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाने का निर्णय लिया।
🛬 रनवे-11 पर दूसरी कोशिश और बड़ा खतरा
इसके बाद पायलट ने रनवे-11 पर दोबारा लैंडिंग का प्रयास किया। लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। रनवे-11 अपेक्षाकृत छोटा और संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में रनवे बदलने का निर्णय तभी लिया जाना चाहिए, जब सभी सुरक्षा मानकों की दोबारा पुष्टि हो। लेकिन यहां ऐसा प्रतीत होता है कि जल्दबाजी में निर्णय लिया गया।
🔥 रनवे से पहले गिरा विमान, लगी भीषण आग
दूसरी लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान रनवे तक पहुंचने से पहले ही असंतुलित हो गया और जमीन से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि विमान में तत्काल आग लग गई। ड्रोन फुटेज में दुर्घटनास्थल के आसपास जले हुए हिस्से, बिखरे मलबे और काली पड़ी जमीन साफ देखी जा सकती है।
🚨 न इमरजेंसी सिग्नल, न मेडे कॉल—क्यों?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पायलट की ओर से कोई इमरजेंसी सिग्नल या ‘मेडे कॉल’ नहीं दिया गया। आम तौर पर जब विमान असामान्य स्थिति में होता है, तो पायलट तत्काल एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित करता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि या तो स्थिति का सही आकलन नहीं हुआ, या खतरे को कम आंका गया।
📷 ड्रोन तस्वीरों में क्या दिखा?
ड्रोन से ली गई तस्वीरों में यह साफ नजर आता है कि विमान जिस जगह गिरा, वह रनवे से कुछ ही मीटर की दूरी पर थी। आसपास कोई बड़ा अवरोध नहीं था, लेकिन जमीन की ढलान और सूखी घास ने आग को तेजी से फैलने में मदद की। यह भी देखा गया कि दुर्घटनास्थल पर पहले से किसी आपात अग्निशमन वाहन की तैनाती नहीं थी।
🛑 सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठते सवाल
इस हादसे के बाद विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या बारामती जैसे एयरपोर्ट पर वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए थे? क्या मौसम की स्थिति को देखते हुए उड़ान को टालना बेहतर विकल्प नहीं था? और सबसे अहम—अगर स्थिति बिगड़ रही थी, तो समय रहते आपात प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
📑 जांच के आदेश, लेकिन भरोसा अधूरा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। तकनीकी टीम ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा और पायलट की गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है। हालांकि, इससे पहले भी कई विमान हादसों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने में लंबा समय लगा है, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
🧠 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे में मानवीय निर्णयों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि खराब दृश्यता में बार-बार लैंडिंग का प्रयास जोखिम बढ़ा देता है। साथ ही, इमरजेंसी कॉल न देना एक गंभीर चूक मानी जा सकती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या विमान में तकनीकी खराबी थी?
फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
ड्रोन तस्वीरें किसने जारी कीं?
स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियों द्वारा ली गई तस्वीरें मीडिया में सामने आई हैं।
क्या पायलट की गलती मानी जा रही है?
जांच पूरी होने तक किसी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी, लेकिन निर्णय प्रक्रिया पर सवाल हैं।
क्या भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं?
सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और पारदर्शी जांच से ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।








