कर्तव्य बोध दिवस के अवसर पर भरतपुर स्थित जगन टी.टी. महाविद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा प्रकोष्ठ) द्वारा एक प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज के प्रति दायित्वों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा यह संदेश दिया गया कि जब तक व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग और सचेत नहीं होगा, तब तक राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है।
कर्तव्य बोध दिवस का उद्देश्य : जिम्मेदारी से राष्ट्र निर्माण
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रांत कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर योगेंद्र कुमार भानु ने अपने उद्बोधन में कहा कि संगठन द्वारा कर्तव्य बोध दिवस मनाने का मूल उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को उसके दायित्वों की याद दिलाना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारों की चर्चा जितनी आवश्यक है, उससे कहीं अधिक आवश्यक है कर्तव्यों के प्रति सजगता। व्यक्ति यदि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे, तो सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो जाता है।
संघ शताब्दी वर्ष और पंच परिवर्तन का संदेश
प्रोफेसर भानु ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रस्तावित पंच परिवर्तन की अवधारणा को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाज, राष्ट्र और संस्कृति के उत्थान के लिए प्रत्येक नागरिक को इन परिवर्तनों को अपने जीवन में उतारना होगा। यह परिवर्तन केवल विचारों तक सीमित न रहकर आचरण में दिखाई देने चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे इस परिवर्तन के वाहक बनें और विद्यार्थियों को भी इसी दिशा में प्रेरित करें।
संगठन की वैचारिक त्रयी : शिक्षा, शिक्षक और समाज
कार्यक्रम में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष प्रोफेसर राम किशोर उपाध्याय ने संगठन का परिचय देते हुए उसकी कार्यनीति और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगठन की आधारशिला एक स्पष्ट वैचारिक त्रयी पर टिकी है— ‘राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक और शिक्षक के हित में समाज।’ इसी विचार को केंद्र में रखकर संगठन देशभर में कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि आज संगठन 29 से अधिक राज्यों में सक्रिय है और एल.के.जी. से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक लगभग 14 लाख से अधिक शिक्षक पूर्ण समर्पण भाव से शिक्षा जगत में कार्य कर रहे हैं। यह केवल एक संगठनात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम है।
स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा और जीवन लक्ष्य
प्रोफेसर उपाध्याय ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी को अपने जीवन का एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। कर्तव्य पथ पर चलते हुए जब व्यक्ति राष्ट्र और समाज को अपने लक्ष्य का केंद्र बनाता है, तभी वास्तविक शिक्षा सार्थक होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज का मार्गदर्शक होता है।
नागरिक कर्तव्य और शिक्षकों की भूमिका
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एबीआरएसएम उच्च शिक्षा राजस्थान के प्रदेश संयोजक (निजी संस्थान) डॉ. सुरेन्द्र सिंह सिनसिनवार ने अपने संबोधन में विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से नागरिक कर्तव्यों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व केवल कक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षार्थियों, समाज और राष्ट्र के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जब शिक्षक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हैं, तो वे विद्यार्थियों में भी जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित करते हैं। यही भाव आगे चलकर विकसित भारत के निर्माण की नींव बनता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन : कर्तव्य पालन से ही सामाजिक संतुलन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंद्रपाल आजाद ने कहा कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करे, तो किसी भी स्तर पर अव्यवस्था उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नागरिक ही मजबूत समाज की आधारशिला होते हैं और शिक्षा संस्थानों की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सहभागिता और उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन राकेश कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्रीमती निर्मला, ध्रुव शर्मा, सत्येंद्र कुमार, राकेश कुमार मीणा, संजय कुमार सहित महाविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम को प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक बताया।
कार्यक्रम से संबंधित जानकारी मीडिया प्रभारी प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता द्वारा साझा की गई। उन्होंने कहा कि कर्तव्य बोध दिवस जैसे आयोजन शिक्षण संस्थानों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं।








