प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त में भ्रष्टाचार के आरोप ; नगर पंचायत में हड़कंप

बन्थरा नगर पंचायत लखनऊ का कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त में भ्रष्टाचार आरोपों से जुड़ी तस्वीर

ख़बर की पृष्ठभूमि:

बन्थरा नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त जारी होते ही लाभार्थियों से कथित वसूली, पात्रता सूची में फेरबदल और प्रशासनिक खामोशी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला अब स्थानीय आरोपों से आगे बढ़कर औपचारिक जांच और RTI की दहलीज तक पहुंच चुका है।

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बन्थरा नगर पंचायत में जारी पहली किस्त को लेकर गंभीर आरोप सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। योजना के तहत लाभार्थियों के खातों में धनराशि पहुंचते ही कथित भ्रष्टाचार, धन उगाही और पात्रता से छेड़छाड़ के आरोपों ने इस महत्त्वाकांक्षी योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पहली किस्त के वितरण में कुछ स्थानीय प्रभावशाली तत्वों और कर्मचारियों की मिलीभगत से लाभार्थियों से अवैध वसूली की गई।

बन्थरा नगर पंचायत में क्यों गरमाया मामला

लखनऊ से सटे बन्थरा नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कुल 810 लाभार्थियों को पहली किस्त जारी की गई। लेकिन जैसे ही यह धनराशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंची, वैसे ही योजना को लेकर सवालों की बाढ़ आ गई। स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि इस पहली किस्त के एवज में लाभार्थियों से 15 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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वार्ड प्रतिनिधि ने लगाए गंभीर आरोप

इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है यह तथ्य कि आरोप किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि नगर पंचायत के ही एक निर्वाचित प्रतिनिधि, वार्ड नंबर चार के जनप्रतिनिधि द्वारा लगाए गए हैं। प्रतिनिधि का दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली सूची तैयार करते समय मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास ऐसे प्रमाण मौजूद हैं, जो यह संकेत देते हैं कि पात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए गए और अपात्र लोगों को शामिल किया गया।

रिश्वतखोरी और धन उगाही के आरोप

स्थानीय लोगों और लाभार्थियों के अनुसार, पहली किस्त जारी होने से पहले और बाद में कुछ कर्मचारियों और क्षेत्रीय नेताओं के माध्यम से लाभार्थियों पर दबाव बनाया गया। आरोप है कि योजना का लाभ दिलाने या नाम सूची में बनाए रखने के बदले उनसे मोटी रकम वसूली गई। कई लाभार्थियों का कहना है कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए होते तो उनका नाम अगली किस्त या भविष्य की सूची से काटे जाने की धमकी दी गई।

पात्रों के नाम कटे, अपात्र हुए शामिल?

प्रधानमंत्री आवास योजना का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और बेघर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन बन्थरा नगर पंचायत में आरोप है कि पहली सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल किए गए, जो योजना की पात्रता शर्तों पर खरे नहीं उतरते। वहीं, कई ऐसे परिवार जो वर्षों से कच्चे मकानों में रह रहे हैं, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक समीकरणों और निजी हितों के आधार पर सूची में फेरबदल किया गया।

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अधिकारियों की चुप्पी ने बढ़ाई शंकाएं

मामले के उजागर होने के बावजूद बन्थरा नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो आरोपों का खंडन किया गया और न ही किसी प्रकार की जांच की सार्वजनिक घोषणा हुई। अधिकारियों की यह खामोशी स्थानीय लोगों के बीच और अधिक संदेह पैदा कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

RTI के जरिए मांगी गई लाभार्थियों की सूची

इस पूरे विवाद के बीच अब सूचना का अधिकार कानून के तहत नगर पंचायत बन्थरा से प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की पूरी सूची मांगी गई है। आरटीआई के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किन आधारों पर 810 लाभार्थियों का चयन किया गया और किसे कितनी धनराशि पहली किस्त में जारी हुई। सूची सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार तक भी शिकायत पहुंचाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार से लिखित रूप में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त के वितरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। शिकायत में यह भी आग्रह किया गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।

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योजना की साख पर सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की सबसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केवल मकान बनवाना नहीं बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन देना है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और धन उगाही के आरोप सामने आते हैं तो यह न सिर्फ योजना की साख को नुकसान पहुंचाता है बल्कि आम जनता का विश्वास भी डगमगाता है।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल बन्थरा नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आरोप, प्रत्यारोप और खामोशी के बीच आम जनता यही उम्मीद कर रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच सामने आए। आरटीआई से प्राप्त जानकारी और प्रशासनिक जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह मामला वास्तविक भ्रष्टाचार का है या फिर किसी आंतरिक विवाद का परिणाम। लेकिन इतना तय है कि इस प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधूरे मकान की प्रतीकात्मक तस्वीर, पहली किस्त के बाद अवैध वसूली के आरोप।
प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त के साथ ही गरीब लाभार्थियों से कथित अवैध वसूली के आरोप सामने आए।

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