मस्तूरी के स्कूलों में गणतंत्र दिवस की धूम इस वर्ष केवल एक औपचारिक उत्सव भर नहीं रही, बल्कि यह आयोजन राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक चेतना और संविधान के प्रति सम्मान का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंधी, देवरी और रांक में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि जब शिक्षा, संस्कार और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तो राष्ट्रभक्ति केवल नारे नहीं बल्कि व्यवहार बन जाती है। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री चंद्र प्रकाश सूर्या की उपस्थिति ने इन आयोजनों को विशेष गरिमा प्रदान की, वहीं स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और गर्व से भर दिया।
पंधी और देवरी में साझा आयोजन, तिरंगे के नीचे एकजुट दिखा समाज
ग्राम पंधी स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में गणतंत्र दिवस का आयोजन पूरे गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यालय परिसर को राष्ट्रीय ध्वज, रंगोली और देशभक्ति से जुड़े संदेशों से सजाया गया था। जैसे ही मुख्य अतिथि चंद्र प्रकाश सूर्या ने तिरंगा फहराया, पूरा परिसर राष्ट्रगान की गूंज से भर उठा। बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने एक स्वर में भारत माता की जय के उद्घोष लगाए, जिसने माहौल को भावनात्मक ऊंचाई तक पहुंचा दिया।
इसी क्रम में ग्राम देवरी में मिडिल स्कूल, प्राइमरी स्कूल और सरस्वती शिशु मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया गया। यह साझा आयोजन अपने आप में एक संदेश था कि शिक्षा के विभिन्न स्तर और विचारधाराएं जब एक मंच पर आती हैं, तो समाज में समरसता और एकता की भावना और अधिक मजबूत होती है। बच्चों का उत्साह, शिक्षकों की सक्रियता और ग्रामीणों की सहभागिता ने कार्यक्रम को सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया।
संविधान और शिक्षा पर केंद्रित रहा मुख्य अतिथि का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंद्र प्रकाश सूर्या ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल ध्वजारोहण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह दिन हमें संविधान की मूल भावना को समझने और उसे जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार दिए हैं और शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए इन अधिकारों का सही उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का नागरिक और नेता होगा, इसलिए जरूरी है कि बचपन से ही बच्चों में देश, समाज और संविधान के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जाए। उनके शब्दों में स्पष्ट था कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
रांक में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
ग्राम रांक के मिडिल और प्राइमरी स्कूलों में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह भी किसी से कम नहीं रहा। यहां ध्वजारोहण के बाद बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। उपासना और उनके साथियों ने देशप्रेम से ओतप्रोत गीतों और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से यह दिखाया कि नई पीढ़ी राष्ट्र के मूल्यों को कितनी गहराई से समझ रही है।
वहीं सोनम और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने कार्यक्रम में रंग और ऊर्जा भर दी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच जब नन्हे-मुन्ने बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते नजर आए, तो यह दृश्य किसी भी दर्शक के लिए भावुक कर देने वाला था। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
शिक्षकों और गुरुजनों की सक्रिय भूमिका
इन आयोजनों की सफलता के पीछे शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन की मेहनत साफ दिखाई दी। प्राचार्य हेमलता वर्मा और प्राचार्य गौराहा जी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप दिया गया। प्रीति पांडे, व्याख्याता राजेंद्र कुमार साहू, धर्मेंद्र बंजारे और जितेंद्र साहू ने बच्चों को तैयार करने से लेकर कार्यक्रम संचालन तक हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षक प्रीति मिश्रा, पायल पाण्डेय, रीता साहू, श्रीमती राव मैडम, परमेश्वर यादव, पारुल शुक्ला और सुनीता पटेल की सक्रियता यह दर्शाती है कि जब शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर संस्कारों पर भी ध्यान देते हैं, तो विद्यालय समाज का मजबूत आधार बनते हैं।
ग्रामीण सहभागिता और सामाजिक एकजुटता का उदाहरण
गणतंत्र दिवस के इन आयोजनों में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रमों को सामाजिक स्वीकृति और मजबूती प्रदान की। एसएमडीसी अध्यक्ष राधेश्याम मिश्रा, जनपद सदस्य रेवा शंकर साहू, सरपंच विक्रम प्रताप सिंह सूर्यवंशी, सरपंच विरेन साहू, सरपंच रूबी रात्रे और प्रदीप राठौर जैसे गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा और राष्ट्रीय पर्व केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा उत्सव हैं।
युवाओं और छात्राओं ने संभाली जिम्मेदारी
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में गांव के युवाओं की भूमिका भी सराहनीय रही। सौरव, अर्जुन, प्रिंस, उदय, दिनेश, गजानंद और अभिषेक ने अनुशासन, व्यवस्था और अतिथियों के सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं कुमारी श्वेता और प्रिया सहित अन्य छात्राओं ने मंच संचालन और स्वागत-सत्कार की जिम्मेदारी निभाकर यह दिखाया कि नेतृत्व क्षमता उम्र की मोहताज नहीं होती।
कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को मिठाइयां वितरित की गईं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई। यह क्षण केवल खुशी का नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक था कि देश का भविष्य सुरक्षित और सशक्त हाथों में है।
गणतंत्र दिवस बना संस्कार और संवेदना का उत्सव
कुल मिलाकर, मस्तूरी के स्कूलों में गणतंत्र दिवस की धूम केवल उत्सव तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आयोजन शिक्षा, संस्कृति और संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना। बच्चों की आंखों में देश के प्रति गर्व, शिक्षकों की मेहनत में भविष्य की चिंता और समाज की सहभागिता में सामूहिक जिम्मेदारी साफ झलकती रही। यही वह आधार है, जिस पर एक मजबूत और जागरूक राष्ट्र का निर्माण संभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मस्तूरी में गणतंत्र दिवस के आयोजन कहां-कहां हुए?
गणतंत्र दिवस के आयोजन ग्राम पंधी, देवरी और रांक के विभिन्न स्कूलों में संपन्न हुए।
ध्वजारोहण किसने किया?
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री चंद्र प्रकाश सूर्या ने ध्वजारोहण किया।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषता क्या रही?
बच्चों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संविधान पर केंद्रित संदेश और सामाजिक सहभागिता कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
ग्रामीणों और युवाओं की क्या भूमिका रही?
ग्रामीणों ने सहभागिता निभाई जबकि युवाओं और छात्राओं ने व्यवस्थाएं और मंच संचालन संभाला।







