पशुबाड़ों में आग से मवेशियों की दर्दनाक मौत की यह घटना केवल एक आकस्मिक हादसा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की उस असुरक्षा को उजागर करती है, जहाँ एक चिंगारी पल भर में आजीविका, संवेदना और विश्वास—तीनों को राख में बदल देती है। शुक्रवार तड़के की यह त्रासदी उस समय सामने आई, जब गांव अभी नींद में था और पशुबाड़ों में बंधे मवेशी बेखबर अपनी जगहों पर थे। आग इतनी तेजी से फैली कि बचाव का मौका ही नहीं मिल सका, और देखते-देखते चार मवेशियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।
सुबह तड़के लगी आग, मिनटों में विकराल हुआ मंजर
घटना सीतापुर जनपद के रेउसा थाना क्षेत्र अंतर्गत आजादनगर गांव की है। शुक्रवार सुबह तड़के अचानक दो पशुबाड़ों से धुआँ उठता देखा गया। प्रारंभ में ग्रामीणों को लगा कि कहीं सूखे भूसे में मामूली सुलगन होगी, लेकिन कुछ ही क्षणों में आग की लपटें तेज हो गईं। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पशुबाड़ों में बंधे मवेशियों को बाहर निकालने का अवसर तक नहीं मिला। चीख-पुकार और धुएँ के बीच गांव की नींद टूट चुकी थी, लेकिन तब तक हालात हाथ से निकल चुके थे।
पशुबाड़ों में बंधे मवेशी बने आग की चपेट में
जानकारी के अनुसार, गांव के पेशकार यादव और धर्मपाल के पशुबाड़ों में यह आग लगी। दोनों पशुबाड़े पास-पास होने के कारण आग तेजी से एक से दूसरे में फैल गई। आग की लपटों में घिरने से चार मवेशियों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। तीन अन्य मवेशियों को ग्रामीणों ने किसी तरह बाहर तो निकाल लिया, लेकिन वे भी बुरी तरह झुलस चुके थे। पशुओं की करुण आवाजें और जलते भूसे की गंध ने पूरे गांव को झकझोर दिया।
ग्रामीणों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
आग लगते ही आसपास के ग्रामीण बाल्टी, पाइप और उपलब्ध संसाधनों के साथ मौके पर पहुंचे। बिजली आपूर्ति बंद कराई गई और समन्वय के साथ आग बुझाने का प्रयास शुरू हुआ। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। ग्रामीणों की तत्परता के कारण आग आसपास के घरों और अन्य पशुबाड़ों तक फैलने से रुक गई। यदि कुछ और देर हो जाती, तो यह हादसा कहीं अधिक भयावह रूप ले सकता था।
गांव में शोक और दहशत, आजीविका पर गहरा आघात
चार मवेशियों की मौत और तीन के गंभीर रूप से झुलसने से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण परिवारों के लिए मवेशी केवल पशु नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का आधार होते हैं। दूध, गोबर, खेती और घरेलू जरूरतों से जुड़ा यह सहारा एक झटके में छिन गया। पीड़ित परिवार सदमे में हैं और भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
आग लगने के कारणों पर सस्पेंस, जांच के आदेश
आग लगने के कारणों का फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल सका है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुबाड़ों में रखे सूखे भूसे, कंडों या बिजली के जर्जर तारों से निकली चिंगारी इसकी वजह हो सकती है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
प्रशासन को सूचना, मुआवजे की मांग
घटना की सूचना पशुबाड़ा मालिकों द्वारा तहसील प्रशासन को दे दी गई है। पीड़ित परिवारों ने मृत मवेशियों के लिए मुआवजा और झुलसे पशुओं के समुचित इलाज की मांग की है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, झुलसे मवेशियों के इलाज के लिए पशु चिकित्सक को बुलाकर उपचार कराया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु-सुरक्षा की अनदेखी पर सवाल
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में पशु-सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमजोरियों पर भी सवाल खड़े करती है। पशुबाड़ों में अग्नि-सुरक्षा के पर्याप्त उपायों का अभाव, जर्जर विद्युत तार, और सूखे भूसे का असुरक्षित भंडारण—ये सभी मिलकर ऐसे हादसों की आशंका को बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, सुरक्षित वायरिंग और जागरूकता अभियान से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
चेतावनी और सबक: भविष्य के लिए जरूरी कदम
ग्रामीण समाज के लिए यह हादसा एक कड़वा सबक है। पशुबाड़ों में आग से बचाव के उपाय, जैसे कि अग्निरोधक दूरी, सुरक्षित बिजली कनेक्शन, सूखे भूसे का पृथक भंडारण और आपातकालीन जल-स्रोत—इन पर गंभीरता से अमल जरूरी है। प्रशासन, पंचायत और ग्रामीणों के साझा प्रयास से ही पशुधन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पशुबाड़ों में आग लगने के सामान्य कारण क्या होते हैं?
सूखा भूसा, कंडे, जर्जर बिजली तार, शॉर्ट सर्किट और लापरवाही से छोड़ी गई चिंगारी आग के सामान्य कारण होते हैं।
आग की स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए?
सबसे पहले बिजली आपूर्ति बंद करें, पशुओं को सुरक्षित बाहर निकालें और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने का प्रयास करें, साथ ही प्रशासन को सूचित करें।
झुलसे मवेशियों के इलाज की क्या व्यवस्था होती है?
झुलसे मवेशियों के लिए पशु चिकित्सक द्वारा प्राथमिक उपचार, दवाइयाँ और विशेष देखभाल की जाती है।
मुआवजा कैसे और कब मिलता है?
प्रशासनिक जांच के बाद नियमानुसार मृत पशुओं के लिए मुआवजा प्रदान किया जाता है।







