कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का हरदोई दौरा — उन्नत बीज, तकनीक और किसान-केंद्रित कृषि पर सरकार का फोकस

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही हरदोई में कृषि फार्म का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए।

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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खबर में पढिए:
कृषि फार्म से लेकर कृषि महाविद्यालय तक, हरदोई में कृषि मंत्री का दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं था—यह प्रदेश की कृषि नीति के ज़मीनी क्रियान्वयन की कसौटी भी बना।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का हरदोई दौरा गुरुवार को प्रदेश की कृषि व्यवस्था, बीज गुणवत्ता और किसान-केंद्रित योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया। उत्तर प्रदेश के कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने तय कार्यक्रम के अनुसार हरदोई जनपद के विभिन्न कृषि फार्मों और शैक्षणिक संस्थानों का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल चल रही योजनाओं की प्रगति देखी, बल्कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सरकार की मंशा तभी सफल मानी जाएगी, जब योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम किसान तक पहुंचे।

सुबह लखनऊ से हरदोई आगमन, कृषि फार्मों का स्थलीय निरीक्षण

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सुबह लखनऊ से हरदोई पहुंचे। जनपद में आगमन के बाद उनका पहला पड़ाव मोहम्मदपुर कृषि फार्म (सहगवां) रहा। यहां उन्होंने खेतों में खड़ी फसलों, बीज उत्पादन इकाइयों और कृषि अवसंरचना का गहन निरीक्षण किया। अधिकारियों से बीजों की गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया और वितरण प्रणाली की विस्तृत जानकारी ली गई।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी कृषि फार्म केवल औपचारिक संस्थान नहीं, बल्कि किसानों के लिए प्रयोगशाला और प्रशिक्षण केंद्र होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन फार्मों पर तैयार होने वाले उन्नत बीज सीधे तौर पर किसानों की उत्पादकता और आय से जुड़े हैं, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

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उपाध्याय खेड़ा और शोध कृषि फार्म में योजनाओं की समीक्षा

इसके पश्चात कृषि मंत्री ने उपाध्याय खेड़ा कृषि फार्म और शोध कृषि फार्म, हरदोई का निरीक्षण किया। यहां राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विशेष समीक्षा की गई। मंत्री ने खेतों में उगाई जा रही फसलों की गुणवत्ता, प्रयोग में लाई जा रही तकनीकों और अनुसंधान कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया।

उन्होंने अधिकारियों से यह भी पूछा कि शोध फार्मों से किसानों तक नई तकनीक और उन्नत किस्मों की जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही है। मंत्री का कहना था कि यदि अनुसंधान किसानों के खेत तक नहीं पहुंचेगा, तो उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

NFSM योजना के तहत गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि यह योजना केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि धान, गेहूं और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीज की गुणवत्ता सर्वोपरि है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीज उत्पादन से लेकर वितरण तक पूरी श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। यदि कहीं भी गुणवत्ता से समझौता पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि किसानों को प्रमाणित और भरोसेमंद बीज मिलना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

कृषि महाविद्यालय में शिक्षा और शोध की स्थिति का आकलन

दोपहर बाद कृषि मंत्री ने हरदोई स्थित कृषि महाविद्यालय का भी दौरा किया। यहां उन्होंने शिक्षण व्यवस्था, प्रयोगशालाओं, शोध कार्यों और विद्यार्थियों को दी जा रही प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी ली। मंत्री ने कहा कि कृषि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और नवाचार से जोड़ा जाए।

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उन्होंने यह भी कहा कि कृषि महाविद्यालयों की भूमिका भविष्य के कृषि वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यहां से निकलने वाले छात्र आधुनिक तकनीक, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों से लैस होंगे, तभी प्रदेश की कृषि स्थायी रूप से मजबूत होगी।

किसानों की आय दोगुनी करने की प्रतिबद्धता दोहराई

निरीक्षण के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाएं और सही जानकारी—ये चार स्तंभ हैं, जिन पर किसान की समृद्धि टिकी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे। प्रत्येक योजना की नियमित समीक्षा हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि अंतिम छोर पर बैठे किसान तक सहायता समय पर और बिना किसी बाधा के पहुंचे।

प्राकृतिक खेती और जन-जागरूकता अभियान पर विशेष जोर

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को प्रगतिशील किसानों के संपर्क में रहने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव अब सामने आ रहे हैं और ऐसे में प्राकृतिक व जैविक खेती भविष्य का विकल्प बन सकती है।

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उन्होंने जनपद स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और किसानों को सफल उदाहरणों से जोड़ने पर बल दिया। मंत्री के अनुसार, जब किसान अपने जैसे किसानों की सफलता देखता है, तभी वह नई पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित होता है।

लापरवाही पर सख्त चेतावनी, शाम को लखनऊ वापसी

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीजों की गुणवत्ता या योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसानों के हित से जुड़ा कोई भी समझौता गंभीर परिणाम ला सकता है।

शाम को निरीक्षण कार्यक्रम समाप्त कर मंत्री लखनऊ वापस लौट गए। इस दौरान उनके साथ जनसंपर्क अधिकारी सुजीत रघुवंशी सहित स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का हरदोई दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?

यह दौरा कृषि फार्मों, बीज गुणवत्ता और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए किया गया, जिससे किसानों को सीधा लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

NFSM योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का उद्देश्य प्रमुख फसलों की उत्पादकता बढ़ाना और किसानों को उन्नत बीज व तकनीक उपलब्ध कराना है।

प्राकृतिक खेती को लेकर मंत्री ने क्या कहा?

मंत्री ने प्राकृतिक खेती को भविष्य का विकल्प बताते हुए इसके लिए जन-जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण पर जोर दिया।

सरकारी कृषि फार्मों की भूमिका क्या है?

सरकारी कृषि फार्म किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, नई तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के केंद्र होते हैं।

हरदोई के वरिष्ठ पत्रकार ऑखिलेश ‘दादा’ लेखन करते हुए, संतुलित पत्रकारिता और मार्गदर्शन का प्रतीकात्मक दृश्य।
लेखन में डूबे ऑखिलेश ‘दादा’—जिन्होंने ख़बरों से आगे जाकर पत्रकारिता को दिशा दी।

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