प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त आते ही अवैध वसूली के आरोप, गरीब लाभार्थियों में भय

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहली किस्त मिलने के बाद गरीब लाभार्थियों से अवैध वसूली का आरोप, निर्माणाधीन आवास कॉलोनी का दृष्य।

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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प्रधानमंत्री आवास योजना को गरीब और बेघर परिवारों के लिए सुरक्षित आशियाना देने की सबसे महत्त्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं में गिना जाता है। लेकिन जब इसी योजना की पहली किस्त जारी होते ही अवैध वसूली के आरोप सामने आने लगें, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार-मुक्त छवि को भी कठघरे में खड़ा करता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के बंथरा नगर पंचायत क्षेत्र से सामने आया मामला यही संकेत देता है कि योजनाएं काग़ज़ों में भले ही जनकल्याणकारी हों, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं अधिक जटिल और चिंताजनक है।

‘उत्तम प्रदेश’ के दावों के बीच जमीनी सच्चाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार राज्य को ‘उत्तम प्रदेश’ और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का उदाहरण बताते रहे हैं। सरकारी मंचों से लेकर प्रचार अभियानों तक यह दावा दोहराया जाता है कि योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। किंतु बंथरा नगर पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सामने आए आरोप इन दावों को चुनौती देते नजर आते हैं।

यहां अभी कॉलोनी का निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन पहली किस्त जारी होते ही कथित तौर पर कुछ लोग अधिकारियों के नाम पर गरीब लाभार्थियों से 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की मांग कर रहे हैं। लाभार्थियों का कहना है कि उनसे कहा जा रहा है कि यदि पैसा नहीं दिया गया तो अगली किस्त अटक सकती है या नाम सूची से बाहर हो सकता है।

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पहली किस्त के साथ ही ‘दलाल तंत्र’ सक्रिय?

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त खाते में आते ही कुछ संदिग्ध व्यक्ति सक्रिय हो गए। ये लोग खुद को नगर पंचायत के अधिकारी, कर्मचारी या फिर ‘ऊपर तक पहुंच’ वाला व्यक्ति बताकर गरीब परिवारों को डराने-धमकाने लगे। कई लाभार्थियों का कहना है कि उनसे साफ शब्दों में कहा गया कि पैसा देने पर ही आगे की किस्तें समय पर मिलेंगी।

गरीब और सीमित जानकारी वाले परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद डरावनी है। कई लाभार्थी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि योजना के नियम क्या हैं, पैसा मांगना वैध है या अवैध। इसी भ्रम का फायदा उठाकर कथित दलाल वसूली में लगे हुए हैं।

नगर पंचायत अधिकारियों का पक्ष

जब इस पूरे मामले को लेकर नगर पंचायत बंथरा के अधिकारियों से बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में इन आरोपों से इनकार किया। अधिकारियों का कहना है कि नगर पंचायत का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी किसी भी लाभार्थी से पैसा नहीं मांग रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यदि कहीं अवैध वसूली हो रही है तो वह पूरी तरह से कथित दलालों की करतूत है। उन्होंने लाभार्थियों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को पैसा न दें और यदि कोई मांग करता है तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।

सभासद की कड़ी प्रतिक्रिया

नगर पंचायत बंथरा के वार्ड संख्या-4, आंबेडकर नगर की सभासद रेखा गौतम के पति शिवकुमार ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके सामने ही एक लाभार्थी से 15 हजार रुपये मांगे गए हैं।

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शिवकुमार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गरीबों के नाम पर चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना को बदनाम करने की यह कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति किसी अधिकारी या अधिकारी के नाम पर पैसा न दे।

उन्होंने लाभार्थियों से अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति पैसे की मांग करता है, तो उसकी जानकारी तत्काल नगर पंचायत कार्यालय या उच्च अधिकारियों को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

गरीब लाभार्थियों में भय का माहौल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे ज्यादा असर गरीब लाभार्थियों पर पड़ा है। जिन लोगों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना एक सपना पूरा करने का माध्यम थी, वही लोग अब डर और असमंजस में जी रहे हैं।

कई लाभार्थियों का कहना है कि वे शिकायत तो करना चाहते हैं, लेकिन डरते हैं कि कहीं शिकायत करने पर उनका नाम योजना से काट न दिया जाए। यह भय ही कथित वसूली तंत्र को मजबूत बनाता है और व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी को उजागर करता है।

प्रशासन की परीक्षा की घड़ी

अब यह देखना बेहद अहम होगा कि नगर पंचायत बंथरा प्रशासन और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते जांच कर दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि गरीबों के लिए बनी योजनाएं भी सुरक्षित नहीं हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में पारदर्शिता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। जब तक लाभार्थियों को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाएगा कि योजना पूरी तरह निःशुल्क है और किसी को पैसा देने की आवश्यकता नहीं है, तब तक ऐसे आरोप सामने आते रहेंगे।

भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ या सिर्फ दावा?

यह मामला केवल एक नगर पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है, जिसमें योजनाओं के साथ-साथ अवैध वसूली का साया भी चलने लगता है। यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाना चाहती है, तो ऐसे मामलों में त्वरित और सार्वजनिक कार्रवाई आवश्यक है।

जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक गरीबों का भरोसा व्यवस्था पर पूरी तरह से बहाल नहीं हो पाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रधानमंत्री आवास योजना में पैसा देना जरूरी है?

नहीं। प्रधानमंत्री आवास योजना पूरी तरह निःशुल्क है। किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को पैसा देना अवैध है।

अगर कोई पैसा मांगे तो क्या करें?

तुरंत नगर पंचायत कार्यालय या उच्च अधिकारियों को लिखित या मौखिक शिकायत दर्ज कराएं।

क्या शिकायत करने पर नाम कट सकता है?

नहीं। नियमों के अनुसार शिकायत करने से लाभार्थी का नाम नहीं काटा जा सकता।

पहली किस्त के बाद अगली किस्त कैसे मिलती है?

निर्माण की प्रगति और नियमों के अनुसार अगली किस्त सीधे खाते में भेजी जाती है।

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