चित्रकूट जनपद में स्थित मंदाकिनी नदी केवल एक भौगोलिक जलस्रोत नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर सामने आया ताजा मामला प्रशासनिक उदासीनता और प्रभावी कार्रवाई के अभाव की ओर इशारा करता है। स्थानीय नागरिक द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कस्बा करवी में नदी के किनारे नियमों को ताक पर रखकर पक्के निर्माण कराए जा रहे हैं, जबकि संबंधित प्राधिकरण पहले ही निर्माण रोकने के स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है।
डूब क्षेत्र में निर्माण, नियमों की खुली अवहेलना
ज्ञापन के अनुसार गांधीगंज/रेलवे स्टेशन रोड निवासी अशोक कुमार गुप्ता द्वारा मंदाकिनी नदी के पूर्वी तट से सटे लगभग 40 मीटर के दायरे में बिना स्वीकृत मानचित्र और सक्षम अनुमति के निर्माण कार्य कराया गया। इस निर्माण में भूतल और प्रथम तल पर कई कमरों की संरचना, आरसीसी कॉलम डालना और स्लैब की तैयारी जैसे कार्य शामिल हैं। यह संपूर्ण गतिविधि नदी के डूब क्षेत्र में आती है, जहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण पर्यावरणीय नियमों और शहरी विकास कानूनों के तहत प्रतिबंधित है।
प्राधिकरण के नोटिस भी बेअसर
इस मामले में चित्रकूट विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ज्ञापन में उल्लेख है कि प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1986 के तहत धारा 25 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस तथा धारा 26(3) के अंतर्गत निर्माण कार्य तत्काल रोकने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य रुका और न ही अवैध ढांचे को हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
पुलिस को पत्राचार, फिर भी कार्रवाई शून्य
प्राधिकरण द्वारा कोतवाली करवी को भी लिखित रूप से निर्माण कार्य रुकवाने के निर्देश दिए गए थे। दिनांक 15 अप्रैल 2023 को भेजे गए पत्र के बावजूद मौके पर शटरिंग, सरिया, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री डालकर कार्य को और तेज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती दिखाई होती, तो आज नदी के डूब क्षेत्र में पक्के निर्माण की स्थिति पैदा ही नहीं होती।
नदी की जलधारा पर मंडराता खतरा
वर्तमान स्थिति यह है कि मंदाकिनी नदी के रकबे के भीतर लगभग 5 से 7 मीटर क्षेत्र में बाउंड्री निर्माण कराया जा चुका है। डूब क्षेत्र के एक हिस्से में पक्के कमरे खड़े कर दिए गए हैं, जबकि दूसरे हिस्से में आरसीसी कॉलम डालकर आगे के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का निर्माण नदी की प्राकृतिक जलधारा को बाधित करता है, जिससे भविष्य में बाढ़, कटाव और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मानचित्र में स्पष्ट चिन्हित है अवैध निर्माण
ज्ञापन के साथ संलग्न राजस्व और शहरी मानचित्र में अवैध निर्माण का स्थान स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। मानचित्र के अनुसार निर्माण पूरी तरह नदी के डूब क्षेत्र के भीतर स्थित है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई न किया जाना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों, जेई और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्पष्ट नोटिस और आदेशों के बावजूद यदि निर्माण जारी रहता है, तो यह या तो लापरवाही का मामला है या फिर मिलीभगत का। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई न होने से न केवल कानून का भय समाप्त होता है, बल्कि भविष्य में अन्य लोग भी सार्वजनिक भूमि और नदी क्षेत्र में अतिक्रमण करने का साहस करने लगते हैं।
जनहित और पर्यावरण संरक्षण का प्रश्न
मंदाकिनी नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है, बल्कि यह जनहित और पर्यावरण संरक्षण से सीधा जुड़ा मुद्दा है। नदी क्षेत्र में अतिक्रमण से न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, बल्कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन और संपत्ति पर भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
प्रार्थी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से ध्वस्त कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति नदी, डूब क्षेत्र या सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण करने का साहस न कर सके।
क्या बोलेगा प्रशासन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है। क्या केवल कागजी कार्रवाई तक मामला सीमित रहेगा, या फिर वास्तव में नदी और पर्यावरण को बचाने के लिए सख्त निर्णय लिए जाएंगे? मंदाकिनी नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण का यह मामला आने वाले समय में प्रशासनिक इच्छाशक्ति की भी परीक्षा बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मंदाकिनी नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण क्यों अवैध है?
डूब क्षेत्र में निर्माण से नदी की प्राकृतिक जलधारा बाधित होती है, जिससे बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ता है। इसलिए कानूनन यहां निर्माण प्रतिबंधित है।
प्राधिकरण के नोटिस के बावजूद निर्माण कैसे जारी रहा?
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई के अभाव में निर्माण कार्य रोका नहीं गया।
प्रशासन से क्या कार्रवाई अपेक्षित है?
निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाना अपेक्षित है।










