छारा गांव में मकरसंक्रांति का भव्य आयोजन , बाबा जत्तीवाले मंदिर में अखंड भंडारा और संतों की दिव्य उपस्थिति

झज्जर जिले के छारा गांव स्थित बाबा जत्तीवाले मंदिर में मकरसंक्रांति के अवसर पर आयोजित अखंड भंडारा, संतों की उपस्थिति और श्रद्धालुओं का सेवा भाव।

जोगिंदर सिंह के साथ मनदीप सिंह की रिपोर्ट


मकरसंक्रांति के पावन अवसर पर हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव स्थित ऐतिहासिक बाबा जत्तीवाले मंदिर परिसर में आयोजित विशाल अखंड भंडारा और संत समागम ने पूरे क्षेत्र को आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता के भाव से सराबोर कर दिया।

मकरसंक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय लोक–संस्कृति, कृषि परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसी भावभूमि पर छारा गांव में स्थित बाबा जत्तीवाले मंदिर परिसर में आयोजित यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा, सेवा और सामाजिक सहभागिता का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था और मंदिर प्रांगण में भक्ति, अनुशासन और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।

जैसे ही सूर्य उत्तरायण हुआ, मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां और तेज़ हो गईं। अखंड भंडारे की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और इसे केवल भोजन नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और संतों के आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया। आयोजन में किसी भी प्रकार का भेदभाव देखने को नहीं मिला—हर व्यक्ति समान भाव से सेवा और प्रसाद का सहभागी बना।

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गद्दीनशीन बाबा सागर नाथ जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस संत समागम ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। संतों की दिव्य उपस्थिति और उनके प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म, करुणा और सेवा के मूल अर्थ से जोड़ा। संतों ने अपने संदेशों में कहा कि सच्चा धर्म वही है, जो मानव को मानव से जोड़ता है और सेवा के माध्यम से समाज को सुदृढ़ बनाता है।

आयोजन के दौरान समाजसेवा और जनहित से जुड़े कई व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया। दूबलधन गौशाला से जुड़े निशु पटवारी का विशेष स्वागत किया गया, वहीं जिला पार्षद झज्जर प्रमोद आर्य का सम्मान गद्दीनशीन बाबा सागर नाथ जी महाराज, हरि राजपूत, गौ भगत कालू (छारा) एवं अन्य गौ सेवकों द्वारा किया गया। यह सम्मान समारोह सेवा कार्यों को सामाजिक मान्यता देने का प्रतीक बना।

इस धार्मिक आयोजन में गौ सेवा को विशेष महत्व दिया गया। गौ माता के संरक्षण और सेवा से जुड़े लोगों की सक्रिय सहभागिता ने यह संदेश दिया कि भारतीय परंपरा में धर्म और करुणा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। गौ सेवकों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।

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आयोजन को सफल बनाने में अनेक समाजसेवियों और ग्रामवासियों की अहम भूमिका रही। दलजीत गौ सेवक, अनिल लीला, काला छारा, पवन टेकदार, सोमबीर सिंह बबलू, गौ भगत योगेंद्र नंबरदार, संजय पंडित, हरि राजपूत, राजीव मास्टर, जिला परिषद चेयरमैन मोना शीलू, लाला प्रधान, रोहित शिल्पकार, हवासिंह दलाल, रणदीहर लोटा, जगदीश पानी अला, संदीप, ईश्वर, धरमवीर, जग्गू केरा, बेद मंत्री मेंबर, सुनील गौ भगत, नवीन राठी, जोगिंदर और कालू छारा आला गौ भगत सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आयोजन में सक्रिय सहयोग दिया।

छारा गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में पहुंचे। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की समान सहभागिता ने इसे सामूहिक आस्था का उत्सव बना दिया। बच्चों के चेहरों पर दिखती खुशी और बुजुर्गों की आंखों में संतोष इस आयोजन की सामाजिक सार्थकता को दर्शा रहा था।

व्यवस्थाओं की दृष्टि से भी आयोजन प्रशंसनीय रहा। स्वच्छता, अनुशासन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वयंसेवकों की टीम लगातार सक्रिय रही और हर श्रद्धालु को सहयोग प्रदान करती रही। यही कारण रहा कि आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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कुल मिलाकर, बाबा जत्तीवाले मंदिर परिसर में आयोजित मकरसंक्रांति का यह भव्य आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा भावना और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। यह आयोजन आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और यह संदेश देगा कि जब आस्था के साथ सेवा जुड़ती है, तो समाज स्वतः मजबूत होता है।

हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव में स्थित बाबा जत्तीवाले ऐतिहासिक मंदिर परिसर, अखंड भंडारे की तैयारी और संत की साधना का दृश्य।
छारा गांव स्थित बाबा जत्तीवाले ऐतिहासिक मंदिर परिसर में मकरसंक्रांति से पूर्व का दृश्य—मंदिर प्रांगण और संत की साधना के साथ धार्मिक वातावरण।

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