भरतपुर। मंगलवार को अपना घर आश्रम के स्प्रीचुअल पार्क में लोहड़ी पर्व अत्यंत भावनात्मक और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। पंजाबी एवं सिख समाज से जुड़े प्रभुजनों में इस पर्व को लेकर बीते कई दिनों से विशेष उत्साह देखा जा रहा था। जैसे ही लकड़ियों की लोहड़ी प्रज्वलित की गई, पूरा परिसर श्रद्धा, अपनत्व और सामूहिक उल्लास से भर उठा।
🔥 अग्नि के साथ जुड़ी आस्था और परंपरा
लोहड़ी प्रज्वलन के साथ ही सिख धर्म की परंपराओं के अनुसार सभी धार्मिक रीति-रिवाज विधिपूर्वक संपन्न किए गए। प्रभुजनों, सेवासाथियों और आश्रम पदाधिकारियों ने अग्निदेव को मूंगफली, तिल, गुड़, गजक, रेवड़ी और पॉपकॉर्न अर्पित किए। यह क्षण केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि सामूहिक श्रद्धा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन गया।
🤝 जब पर्व बना सामाजिक समरसता का माध्यम
इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें केवल पंजाबी-सिख समाज के प्रभुजन ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों और समुदायों से जुड़े प्रभुजनों ने भी पूरे उत्साह के साथ भागीदारी निभाई। एक-दूसरे को लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं दी गईं और यह दृश्य भारतीय समाज की मूल भावना — विविधता में एकता — को साकार करता नजर आया।
🏡 अपना घर आश्रम: सेवा के साथ संस्कृति का सम्मान
वर्तमान में अपना घर आश्रम, भरतपुर में कुल 6685 प्रभुजन आवासरत हैं। इनमें पंजाबी-सिख समाज के 51 प्रभुजन तथा अन्य समुदायों से लगभग 300 प्रभुजनों ने लोहड़ी पर्व में सक्रिय सहभागिता की। यह आंकड़ा स्वयं बताता है कि आश्रम केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों और परंपराओं को सम्मान देने वाला मानवीय केंद्र है।
🍽️ प्रसादी वितरण: समानता और अपनत्व का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रभुजनों को प्रसादी स्वरूप पकौड़े, चाय, मूंगफली, पॉपकॉर्न, गजक, रेवड़ी और तिल के लड्डू वितरित किए गए। भोजन वितरण का यह दृश्य सेवा, समानता और करुणा का प्रतीक रहा, जहाँ हर प्रभुजन को बिना किसी भेदभाव के समान आदर मिला।
🌍 लोहड़ी पर्व से निकला बड़ा सामाजिक संदेश
अपना घर आश्रम में मनाया गया लोहड़ी पर्व यह स्पष्ट करता है कि जब संस्कृति सेवा से जुड़ती है, तो उत्सव केवल रस्म नहीं रहता। यह आयोजन समाज को यह संदेश देता है कि पर्व तभी सार्थक होते हैं, जब उनमें हर व्यक्ति के लिए स्थान हो, हर भावना के लिए सम्मान हो और हर जीवन के लिए अपनत्व हो।
✨ प्रभुजनों के लिए भावनात्मक पुनर्स्मृति
कई प्रभुजनों के लिए यह लोहड़ी पर्व उनके बीते जीवन की स्मृतियों से जुड़ने का अवसर भी बना। गीत, अग्नि, परंपराएं और सामूहिक सहभागिता ने उनके मन में सुरक्षा और आत्मीयता का भाव जगाया। यही वह उद्देश्य है, जिसे अपना घर आश्रम वर्षों से साकार करता आ रहा है।
📌 निष्कर्ष
अग्नि के चारों ओर बना यह समरसता का घेरा केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि मानवीय मूल्यों का उत्सव था। अपना घर आश्रम में मनाया गया लोहड़ी पर्व यह सिद्ध करता है कि सेवा, संस्कृति और संवेदना जब एक साथ आती हैं, तो समाज को जोड़ने वाला एक मजबूत सूत्र बनता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपना घर आश्रम में लोहड़ी पर्व क्यों मनाया जाता है?
अपना घर आश्रम में सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है। पंजाबी-सिख प्रभुजनों की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के लिए लोहड़ी पर्व मनाया जाता है।
इस लोहड़ी पर्व में कितने प्रभुजनों ने भाग लिया?
पंजाबी-सिख समाज के 51 प्रभुजन और अन्य समुदायों से लगभग 300 प्रभुजनों ने इस आयोजन में सहभागिता की।
लोहड़ी पर्व के दौरान कौन-कौन सी परंपराएं निभाई गईं?
लोहड़ी प्रज्वलन, अग्निदेव को तिल-गुड़ अर्पण, सामूहिक सहभागिता और प्रसादी वितरण जैसी सभी पारंपरिक विधियां निभाई गईं।
अपना घर आश्रम में कुल कितने प्रभुजन रहते हैं?
वर्तमान में अपना घर आश्रम, भरतपुर में कुल 6685 प्रभुजन आवासरत हैं।










