
मकरसंक्रांति भारतीय सनातन परंपरा का ऐसा पर्व है, जो सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। इसी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में छारा गांव का बाबा जत्तीवाले ऐतिहासिक मंदिर एक बार फिर आस्था के विराट केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। मंदिर व्यवस्था की ओर से आयोजित यह विशाल अखंड भंडारा केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और लोक-आस्था का साझा उत्सव है। आयोजकों के अनुसार, सुबह से देर रात तक चलने वाले इस भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
ऐतिहासिक मंदिर और उसकी परंपरा
छारा गांव में स्थित बाबा जत्तीवाले मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृति का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से यह मंदिर न केवल स्थानीय ग्रामीणों, बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां हर वर्ष मकरसंक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाला अखंड भंडारा एक परंपरा का रूप ले चुका है, जिसमें जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी लोग एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
विशाल अखंड भंडारा : सेवा ही साधना
इस वर्ष आयोजित होने वाला अखंड भंडारा सुबह से प्रारंभ होकर देर रात तक अनवरत रूप से चलेगा। मंदिर समिति के स्वयंसेवक और स्थानीय ग्रामीण मिलकर सेवा कार्य में जुटे रहेंगे। भंडारे की विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक सात्विक भोजन परोसा जाता है, जिसे पूर्ण स्वच्छता और अनुशासन के साथ तैयार किया जाता है। आयोजकों का कहना है कि भंडारे की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू कर दी गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
संत समागम और रात्रिकालीन वाणी
अखंड भंडारे के साथ-साथ संत समागम इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रहेगा। दिनभर विभिन्न संत-महात्मा अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म, भक्ति और मानवता का संदेश देंगे। रात्रि के समय विशेष वाणी और सत्संग का आयोजन किया जाएगा, जिसमें साधु-संत आध्यात्मिक अनुभवों और जीवन दर्शन पर प्रकाश डालेंगे। यह रात्रिकालीन वाणी विशेष रूप से युवाओं और साधकों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती है।
श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ की संभावना
मंदिर व्यवस्था के अनुसार, इस बार आयोजन में आसपास के गांवों के साथ-साथ झज्जर, रोहतक और बहादुरगढ़ जैसे क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मकरसंक्रांति के दिन सूर्य स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व होने के कारण श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू कर देते हैं। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।
गद्दीनशीन बाबा सागर नाथ जी महाराज का संदेश
मंदिर के गद्दीनशीन बाबा सागर नाथ जी महाराज ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए कहा कि मकरसंक्रांति का पर्व आत्मशुद्धि और सेवा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि अखंड भंडारा और संत समागम के माध्यम से समाज में प्रेम, करुणा और एकता का भाव मजबूत होता है। बाबा सागर नाथ जी महाराज ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पुण्य आयोजन का लाभ उठाने की अपील की।
सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण
आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की विभाजक रेखाओं से जूझ रहा है, ऐसे आयोजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। बाबा जत्तीवाले मंदिर का यह आयोजन सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां हर व्यक्ति को समान भाव से देखा जाता है। भंडारे की पंक्ति में बैठा व्यक्ति केवल श्रद्धालु होता है, उसकी पहचान उसके विश्वास और आस्था से होती है।
युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में स्थानीय युवाओं और महिलाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। सेवा कार्य, प्रसाद वितरण, स्वच्छता और व्यवस्था संचालन में युवा स्वयंसेवक सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। महिलाओं की सहभागिता आयोजन को पारिवारिक और सामूहिक स्वरूप प्रदान करती है, जिससे यह उत्सव केवल धार्मिक न रहकर सामाजिक उत्सव बन जाता है।
क्षेत्रीय संस्कृति और लोक-आस्था का संगम
छारा गांव का यह आयोजन क्षेत्रीय संस्कृति और लोक-आस्था का सुंदर संगम है। मकरसंक्रांति के पारंपरिक गीत, भक्ति-भाव से ओतप्रोत वातावरण और संतों की वाणी—इन सभी के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिलती है। यही कारण है कि यह आयोजन हर वर्ष लोगों के मन में विशेष स्थान बना लेता है।
व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाएं
मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवकों की टीम लगातार निगरानी रखेगी, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
आस्था का पर्व, सेवा का संदेश
कुल मिलाकर, मकरसंक्रांति के अवसर पर बाबा जत्तीवाले मंदिर में आयोजित होने वाला यह विशाल अखंड भंडारा और संत समागम न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। यह आयोजन यह याद दिलाता है कि भारतीय परंपरा में सेवा को ही सबसे बड़ी साधना माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अखंड भंडारा किस समय से शुरू होगा?
अखंड भंडारा सुबह से प्रारंभ होकर देर रात तक निरंतर चलेगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर सकें।
क्या संत समागम में आम श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं?
हाँ, संत समागम और रात्रिकालीन वाणी सभी श्रद्धालुओं के लिए खुली है।
आयोजन स्थल पर क्या सुविधाएं उपलब्ध होंगी?
श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सेवा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना है।










