कामां/पहाड़ी — नगर पालिका क्षेत्र पहाड़ी इन दिनों अव्यवस्था, गंदगी और प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। कस्बे में स्वच्छता के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। 80 लाख रुपये के सफाई ठेके के बावजूद हालात यह हैं कि मुख्य मार्ग से सटे मोहल्लों में कीचड़ और गंदे पानी का ऐसा जमाव है, जिसने आम नागरिकों का दैनिक जीवन कठिन बना दिया है।
मुख्य मार्ग से सटे मोहल्लों में हालात बद से बदतर
कस्बे के गुर्जर मोहल्ला और लोधा राजपूत मोहल्ला इस समस्या के सबसे बड़े उदाहरण हैं। यहां सड़कें नहीं, बल्कि कीचड़ भरे गड्ढे दिखाई देते हैं। बरसात के बाद हालात और भी भयावह हो गए हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे राहगीरों के कपड़े खराब हो रहे हैं और दोपहिया वाहन बार-बार फिसल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने से कतराने लगे हैं, बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है और महिलाएं रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशान हैं। बावजूद इसके नगर पालिका प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
80 लाख का ठेका, फिर भी सफाई नदारद
स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर पालिका द्वारा 80 लाख रुपये का जो सफाई ठेका दिया गया है, उसका वास्तविक लाभ जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देता। न तो नियमित सफाई होती है, न ही कीचड़ और गंदे पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था की गई है।
लोगों का कहना है कि जब वे सफाई को लेकर शिकायत करते हैं, तो नगर पालिका के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “इन रास्तों का टेंडर हो चुका है।” जबकि हकीकत यह है कि यह टेंडर केवल सड़कों के नवीनीकरण से जुड़ा है, न कि जलभराव और गंदगी हटाने से।
बीमारियों का बढ़ता खतरा, प्रशासन बेपरवाह
लगातार बनी गंदगी और जलभराव के कारण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोगों का खतरा मंडरा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर लोग खासे चिंतित हैं, लेकिन नगर पालिका की ओर से अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सफाई केवल कागजों और फाइलों में दिखाई देती है। जमीनी स्तर पर न तो सफाईकर्मी नजर आते हैं और न ही ठेकेदार की कोई जवाबदेही तय की जा रही है।
शिकायत करने पर नोटिस, ईओ पर दबंगई के आरोप
मामला तब और गंभीर हो गया जब भोलावास, नांदनखेड़ा और मंडेलावास क्षेत्र के निवासियों ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजकुमार से सीधे तौर पर सफाई व्यवस्था की शिकायत की। आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय ईओ ने शिकायतकर्ताओं को नोटिस थमा दिए।
लोगों का कहना है कि यह रवैया पूरी तरह दबंगई भरा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। जनता सवाल पूछे तो उसे डराया जाए—यह प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
नगर पालिका के इस कथित तानाशाही रवैये से आहत स्थानीय लोगों ने आखिरकार मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। ज्ञापन में साफ तौर पर मांग की गई है कि सफाई ठेके की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ईओ की भूमिका की समीक्षा हो और आमजन को राहत दी जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। यह केवल सफाई का मामला नहीं, बल्कि जनता के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा सवाल बन चुका है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते सवाल
80 लाख रुपये जैसे बड़े बजट के बावजूद सफाई व्यवस्था का यह हाल होना नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरे प्रश्नचिह्न लगाता है। आखिर ठेके की निगरानी कौन कर रहा है? भुगतान किन आधारों पर हो रहा है? और जनता की शिकायतों को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद करना बेमानी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पहाड़ी नगर पालिका में सफाई ठेका कितने का है?
नगर पालिका पहाड़ी में सफाई के लिए लगभग 80 लाख रुपये का ठेका दिया गया है, लेकिन इसका लाभ जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गंदगी है?
गुर्जर मोहल्ला, लोधा राजपूत मोहल्ला, भोलावास, नांदनखेड़ा और मंडेलावास क्षेत्रों में गंदगी और जलभराव की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है।
शिकायत करने पर लोगों को नोटिस क्यों दिए गए?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब उन्होंने ईओ से सफाई व्यवस्था की शिकायत की, तो समाधान के बजाय उन्हें नोटिस थमा दिए गए।
क्या मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की गई है?
हां, स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
