वन विभाग के डाक बंगला में अतिथियों की सुरक्षा पर खतरा — अवैध कब्जाधारी को चौकीदार बनाना कैसे हुआ संभव?

चित्रकूट के मानिकपुर स्थित श्याम मृगवन डाक बंगला परिसर में अवैध कब्जा, बाउंड्री वॉल के पीछे पशु बांधे जाने और सरकारी भूमि पर बनी पानी की टंकी का दृश्य

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र स्थित श्याम मृगवन विश्राम गृह (रानीपुर टाइगर रिजर्व, मानिकपुर द्वितीय) में
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा,
बाउंड्री वॉल तोड़कर दरवाज़ा खोलना और उसी व्यक्ति को चौकीदार नियुक्त कर देना—
यह पूरा मामला अतिथियों की सुरक्षा से लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तक कई परतों में चिंता पैदा करता है।

डाक बंगला: सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी का संवेदनशील केंद्र

वन विभाग के डाक बंगले केवल विश्राम स्थल नहीं होते, बल्कि वे रणनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के
केंद्र भी रहे हैं। मानिकपुर स्थित इस डाक बंगले का इतिहास बताता है कि यह स्थल पूर्व में
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अभियानों की योजना का आधार रहा है। दस्यु-विरोधी अभियानों के दौर में
इसी परिसर में रुककर रणनीति बनी और परिणाम सामने आए। ऐसे में डाक बंगले की सुरक्षा,
प्रवेश-नियंत्रण और परिसीमन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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अवैध कब्जा: बाउंड्री वॉल तोड़कर बनाया गया निजी रास्ता

आरोप है कि स्थानीय निवासी पवन यादव द्वारा डाक बंगले की बाउंड्री वॉल तोड़कर पीछे से
निजी दरवाज़ा खोल लिया गया। यही नहीं, वन विभाग की सरकारी जमीन पर पानी की टंकी का
निर्माण कर पशुओं को बांधने का कार्य भी किया गया। यह सीधा-सीधा सरकारी संपत्ति पर
अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। सवाल यह है कि यह सब कैसे और कब हुआ,
और किसकी निगरानी में हुआ?

अतिक्रमणकर्ता को ही चौकीदार: हितों का टकराव या मिलीभगत?

सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस व्यक्ति पर अवैध कब्जे का आरोप है, उसी को
डाक बंगले का चौकीदार नियुक्त कर दिया गया। चौकीदार की नियुक्ति का अर्थ है
परिसर में निर्बाध आना-जाना, चाबियों तक पहुंच और अतिथियों की गतिविधियों की जानकारी।
ऐसे में हितों का टकराव स्पष्ट दिखता है। सुरक्षा मानकों के लिहाज से यह निर्णय
जोखिम भरा और नियमों के विपरीत प्रतीत होता है।

प्रशासनिक आदेश, लेकिन अमल शून्य

स्थानीय निवासियों द्वारा जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी को शिकायत दी गई।
उप जिलाधिकारी मानिकपुर ने कथित तौर पर सरकारी भूमि की नपाई के आदेश भी दिए,
परंतु आज तक ज़मीनी कार्रवाई नहीं हो सकी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि
रेंजर स्तर पर मिलीभगत के चलते फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। यदि आदेशों का पालन
नहीं होता, तो प्रशासनिक विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

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अतिथियों की सुरक्षा पर सीधा असर

डाक बंगले में अधिकारी, कर्मचारी और विशेष अतिथि ठहरते हैं। ऐसे स्थान पर
अवैध रास्ता, अनियंत्रित प्रवेश और संदिग्ध नियुक्ति सुरक्षा जोखिम को कई गुना
बढ़ा देती है। किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी—यह प्रश्न
अभी से पूछा जाना चाहिए, न कि घटना के बाद।

राजस्व और वन विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी

सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना केवल वन विभाग का ही नहीं,
बल्कि राजस्व विभाग की भी साझा जिम्मेदारी है।
यदि एक संवेदनशील डाक बंगले की जमीन खाली नहीं कराई जा पा रही,
तो अन्य क्षेत्रों में अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी—
यह बड़ा नीतिगत सवाल खड़ा करता है।

मुख्यमंत्री से अपेक्षा: जवाबदेही तय हो

शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकृष्ट कर रहे हैं कि
नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा चूक के मामलों में त्वरित व निष्पक्ष जांच हो।
अवैध कब्जाधारी के विरुद्ध कार्रवाई, नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा और
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है,
ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

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कुल मिलाकर, यह मामला केवल एक डाक बंगले की दीवार या दरवाज़े का नहीं,
बल्कि प्रशासनिक सतर्कता, सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक विश्वास का है।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम
सामने आ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

डाक बंगले में अवैध कब्जा कैसे हुआ?

आरोपों के अनुसार बाउंड्री वॉल तोड़कर निजी दरवाज़ा बनाया गया और सरकारी जमीन का निजी उपयोग किया गया।

अतिक्रमणकर्ता को चौकीदार क्यों बनाया गया?

इस नियुक्ति पर गंभीर सवाल हैं और इसे प्रशासनिक मिलीभगत से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या नपाई और जांच के आदेश दिए गए थे?

हां, उप जिलाधिकारी द्वारा नपाई के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ।

अतिथियों की सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है?

अनियंत्रित प्रवेश और संदिग्ध नियुक्ति से सुरक्षा जोखिम बढ़ता है।

अब आगे क्या कार्रवाई अपेक्षित है?

अवैध कब्जा हटाना, नियुक्ति की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई अपेक्षित है।

गिरौदपुरी धाम में आयोजित भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में मंच पर सम्मान और मंदिर परिसर में मौजूद पदाधिकारी व कार्यकर्ता।
बाबा गुरु घासीदास की जन्मभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारी एकजुट दिखाई दिए।

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