UP Voter List SIR विवाद: 2.89 करोड़ नाम कटने के बाद सपा का आरोप—बिहार के वोटरों की यूपी में एंट्री से 2027 चुनाव पर खतरा

UP Voter List SIR विवाद को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी पर बयान देते हुए।

ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
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UP Voter List SIR विवाद उत्तर प्रदेश में उस समय एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले चुका है, जब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटने का खुलासा हुआ। इस सूची के सार्वजनिक होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सीधे तौर पर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव पर असर पड़ने की चेतावनी दी है।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट और सियासी भूचाल

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों के आधार पर करोड़ों नाम हटाए गए हैं। हालांकि, UP Voter List SIR विवाद तब गहराया जब समाजवादी पार्टी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के जरिए दूसरे राज्यों, विशेषकर बिहार के मतदाता उत्तर प्रदेश की सूची में भी नाम जुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा का आरोप: अंतर-राज्यीय वोटर एंट्री का खतरा

सपा का कहना है कि जिन लोगों के नाम पहले से Bihar की मतदाता सूची में दर्ज हैं और जिन्होंने वहां वोटिंग भी की है, वे अब SIR प्रक्रिया का फायदा उठाकर Uttar Pradesh की वोटर लिस्ट में भी खुद को दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि सीमावर्ती जिलों में यह प्रवृत्ति अधिक दिखाई दे रही है, जहां प्रशासनिक निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर रहती है।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

Akhilesh Yadav के निर्देश पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि SIR प्रक्रिया में राज्यों के बीच समन्वय की भारी कमी है, जिससे एक ही व्यक्ति अलग-अलग राज्यों की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने में सफल हो रहा है।

‘समन्वय की कमी SIR की सबसे बड़ी खामी’

श्याम लाल पाल के अनुसार, यह समस्या केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। जिन राज्यों में एक साथ SIR प्रक्रिया चल रही है, वहां डेटा शेयरिंग और तकनीकी समन्वय की कमी के चलते मतदाता सत्यापन प्रभावी नहीं हो पा रहा। यही वजह है कि UP Voter List SIR विवाद अब एक राष्ट्रीय चुनावी मुद्दे के रूप में उभर रहा है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर खतरे की चेतावनी

सपा ने आशंका जताई है कि यदि इस समस्या को समय रहते नहीं रोका गया, तो इससे फर्जी वोटिंग, चुनावी धांधली और लोकतंत्र की बुनियादी अवधारणा—‘एक व्यक्ति, एक वोट’—पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकता है। पार्टी का कहना है कि चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि भरोसे की प्रक्रिया है, और अगर भरोसा डगमगाया तो पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ जाएगी।

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चुनाव आयोग से सपा की प्रमुख मांगें

समाजवादी पार्टी ने Election Commission of India से मांग की है कि एक स्पष्ट राष्ट्रीय एडवाइजरी जारी की जाए। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिस राज्य और जिले में मतदाता के रूप में पंजीकृत है और जहां उसने मतदान किया है, वह कम से कम अगले पांच वर्षों तक वहीं का मतदाता बना रहे। इसके अलावा सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी तंत्र और अंतर-राज्यीय डेटा समन्वय को अनिवार्य बनाने की भी मांग की गई है।

बीजेपी पर गंभीर आरोप

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सीधे तौर पर Bharatiya Janata Party पर चुनावी धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सत्ता के दबाव में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर नए वोटर तैयार किए जा सकते हैं। उनका दावा है कि गुजरात, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों से लोग संगठित तरीके से यूपी में मतदान के लिए लाए जाते रहे हैं।

‘फॉर्म-6 से शुरू होगा असली खेल’

फखरुल हसन चांद के अनुसार, UP Voter List SIR विवाद का असली चरण तब शुरू होगा, जब फॉर्म-6 के माध्यम से नए वोटरों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 8 प्रतिशत तक के ‘ट्रेस न हुए’ वोटरों को सूची में जोड़ दिया गया, तो इसका सीधा लाभ सत्ताधारी दल को मिल सकता है।

आधार लिंकिंग पर फिर बहस

सपा ने आधार लिंकिंग के मुद्दे को भी फिर से उठाया है। पार्टी का कहना है कि केवल आधार नंबर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधार को वोटर आईडी से विधिवत लिंक किया जाना चाहिए। आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव के चलते इस प्रक्रिया को अनिवार्य नहीं कर रहा, जबकि इससे फर्जी और दोहरे मतदाता पर रोक लग सकती है।

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2027 से पहले क्यों अहम है यह विवाद

विशेषज्ञों का मानना है कि UP Voter List SIR विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहराई से राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता जिस तरह सवालों के घेरे में है, वह आने वाले समय में चुनाव आयोग, सरकार और विपक्ष—तीनों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

SIR प्रक्रिया क्या है?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया है, जिसमें मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं।

UP Voter List SIR विवाद क्यों हुआ?

ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ नाम कटने और अंतर-राज्यीय वोटरों की आशंका के बाद यह विवाद खड़ा हुआ।

सपा की मुख्य मांग क्या है?

सपा चाहती है कि एक व्यक्ति एक ही राज्य में वोटर बना रहे और आधार-वोटर आईडी लिंकिंग अनिवार्य हो।

क्या इसका असर 2027 चुनाव पर पड़ेगा?

यदि विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो मतदाता सूची की विश्वसनीयता 2027 के चुनावों को प्रभावित कर सकती है।



SIR के बाद यूपी चुनावी गणित दिखाती फीचर इमेज, जिसमें 2027 विधानसभा चुनाव पर 2.88 करोड़ वोट कटने का असर, BJP और सपा के बीच सियासी टकराव दर्शाया गया है।
SIR के बाद यूपी चुनावी गणित: मतदाता सूची से 2.88 करोड़ नाम कटने के बाद 2027 विधानसभा चुनाव में कम मार्जिन वाली सीटें सबसे बड़े जोखिम में।एआई इमेज। पूरी खबर पढने के लिए फोटो को क्लिक करें☝

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