सीतापुर टाउन हॉल परिसर से अवैध कब्जों पर नगर पालिका की सख्त कार्रवाई

सीतापुर टाउन हॉल परिसर में नजूल भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ नगर पालिका परिषद की कार्रवाई का दृश्य।

रितेश गुप्ता की रिपोर्ट

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सीतापुर में नगर पालिका परिषद ने सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अब तक की सबसे निर्णायक और कानूनी रूप से सुदृढ़ कार्रवाई शुरू कर दी है। टाउन हॉल परिसर, सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध अध्यासन, गलत कर-मांग इन्द्राज और नियमविरुद्ध उपयोग को लेकर नगर पालिका परिषद सीतापुर ने एक साथ कई आदेश और नोटिस जारी किए हैं। इन आदेशों में साफ किया गया है कि नजूल भूखण्ड संख्या 1437 के अंश भाग पर दर्ज सभी मांग/इन्द्राज पूरी तरह अवैध हैं और उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।

नजूल भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार में निहित

नगर पालिका परिषद द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि नजूल भूखण्ड संख्या 1437 का स्वामित्व उत्तर प्रदेश राज्य सरकार में निहित है। नगर पालिका परिषद को इस भूमि के केवल प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है, न कि स्वामित्व हस्तांतरण अथवा स्थायी आवंटन का। इसके बावजूद पूर्व वर्षों में कुछ व्यक्तियों, परिवारों और संस्थाओं के नाम कर-मांग रजिस्टर में इन्द्राज दर्ज कर दिए गए, जो नजूल हस्त पुस्तिका के प्रावधानों के विरुद्ध पाए गए।

हस्त पुस्तिका के प्रावधानों का उल्लंघन

नगर पालिका ने अपने आदेश में नजूल हस्त पुस्तिका के प्रस्तर 13, 14 और 45 का विशेष रूप से उल्लेख किया है। इन प्रावधानों के अनुसार नजूल संपत्ति का स्थानांतरण, उपयोग अथवा किसी प्रकार का अधिकार देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होता है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि टाउन हॉल परिसर के मामलों में न तो विधिवत स्वीकृति ली गई और न ही सक्षम प्राधिकारी से वैधानिक अनुमति प्राप्त की गई। इसी कारण कर-मांग रजिस्टर में दर्ज इन्द्राज को पूरी तरह आधारहीन और अवैध घोषित किया गया।

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अवैध अध्यासन और अतिक्रमण की श्रेणी में उपयोग

नगर पालिका परिषद ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जिन अंश भागों पर भवन, कार्यालय, गोदाम या अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, वह सभी नजूल संपत्ति पर अवैध अध्यासन और अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं। बिना वैधानिक अधिकार के किसी भी प्रकार का निर्माण या उपयोग कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में संबंधित व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा उपयोग पूर्णतः अस्वीकार्य है।

15 दिन में कब्जा हटाने का स्पष्ट अल्टीमेटम

नगर पालिका परिषद सीतापुर ने सभी संबंधित कब्जेदारों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे नोटिस प्राप्ति की तिथि से 15 दिन के भीतर स्वयं या किसी माध्यम से टाउन हॉल परिसर के अंश भाग को पूरी तरह खाली कर नगर पालिका को सौंप दें। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया तो नगर पालिका परिषद स्वयं बलपूर्वक कार्रवाई करेगी।

बलपूर्वक कार्रवाई की स्थिति में खर्च की वसूली

नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यदि प्रशासन को कब्जा हटाने के लिए बलपूर्वक कार्रवाई करनी पड़ी तो इस प्रक्रिया में आने वाला संपूर्ण खर्च संबंधित कब्जेदारों से राजस्व बकाया के रूप में वसूला जाएगा। यानी केवल कब्जा हटाने तक ही मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक दायित्व भी संबंधित पक्षों पर डाला जाएगा।

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नगर पालिका अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 60 सहपठित धारा 211 के अंतर्गत की जा रही है। आदेशों में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में जिन आवंटनों या अनुमतियों का हवाला दिया जाता रहा है, वे पहले ही निरस्त की जा चुकी हैं और इसकी जानकारी संबंधित पक्षों को विधिवत दी जा चुकी थी। इसके बावजूद कब्जा बनाए रखना कानून की अवहेलना माना गया है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल

टाउन हॉल परिसर जैसे शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर की गई इस कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। नगर पालिका के इस कदम को सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई भविष्य में अन्य नजूल और सरकारी परिसरों पर भी प्रभाव डालेगी।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

नगर पालिका परिषद सीतापुर ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि सार्वजनिक और नजूल भूमि पर अवैध कब्जे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। चाहे कब्जा वर्षों पुराना क्यों न हो, यदि वह नियमों के विरुद्ध है तो उसे हटाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में शहर के अन्य नजूल भूखण्डों की भी इसी तरह समीक्षा की जाएगी।

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निष्कर्ष

सीतापुर टाउन हॉल परिसर से जुड़े इन आदेशों ने यह साफ कर दिया है कि अब केवल पुराने इन्द्राज, प्रभाव या दावों के आधार पर सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा बनाए रखना संभव नहीं होगा। नगर पालिका परिषद ने कानूनी प्रावधानों के साथ सख्ती से कार्रवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक दृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में शहर की सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मजबूत कदम भी मानी जा रही है।

पाठकों के सवाल – जवाब

टाउन हॉल परिसर की भूमि किसकी है?

यह भूमि नजूल श्रेणी की है, जिसका स्वामित्व उत्तर प्रदेश राज्य सरकार में निहित है।

नगर पालिका को क्या अधिकार प्राप्त हैं?

नगर पालिका को केवल नजूल भूमि के प्रबंधन का अधिकार है, स्वामित्व हस्तांतरण का नहीं।

कब्जा न हटाने पर क्या कार्रवाई होगी?

नगर पालिका बलपूर्वक कब्जा हटाएगी और कार्रवाई का खर्च राजस्व बकाया के रूप में वसूलेगी।

यह कार्रवाई किस कानून के तहत की गई है?

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 60 व 211 के तहत की गई है।

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