अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद राज्य की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी। यह प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नागरिकों के मताधिकार से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि इस बार करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने की तैयारी की गई है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा सका है, उन्हें यह नोटिस भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य किसी का नाम मनमाने ढंग से हटाना नहीं, बल्कि सूची को सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है।
1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस क्यों? समझिए पूरी वजह
चुनाव आयोग द्वारा कराए गए गहन सत्यापन में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का विवरण वर्ष 2003 की आधार मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है। इनमें नाम की वर्तनी, पता, स्थानांतरण, मृत्यु अथवा दोहरी प्रविष्टि जैसी संभावनाएं शामिल हो सकती हैं।
ऐसे मतदाताओं को नोटिस देकर यह अवसर दिया जा रहा है कि वे आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों में से किसी एक के माध्यम से अपनी पात्रता प्रमाणित कर सकें। निर्धारित समय में दस्तावेज प्रस्तुत करने पर नाम सुरक्षित रहेगा, जबकि ऐसा न करने पर नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
75 जिले, 403 विधानसभा क्षेत्र और 1.72 लाख बूथ: इतना बड़ा अभियान क्यों?
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना एक जटिल लेकिन अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है। इस विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत राज्य के सभी 75 जिले और 403 विधानसभा क्षेत्र शामिल किए गए।
पूरे प्रदेश में 1,72,486 मतदान केंद्रों पर बूथ स्तर तक सत्यापन कराया गया। इस कार्य में लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 5,76,611 बूथ लेवल एजेंट भी शामिल रहे।
अगर मसौदा मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो क्या करें?
यदि किसी नागरिक का नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं है, या फिर परिवार के किसी ऐसे सदस्य का नाम दर्ज है जो अब उस स्थान पर निवास नहीं करता, तो चुनाव आयोग के समक्ष दावा और आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
इसके लिए आयोग ने 6 फरवरी तक की समयसीमा तय की है। इस अवधि में नाम जोड़ने, हटाने या विवरण सुधार से जुड़े आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इन सभी आवेदनों का निपटारा 27 फरवरी तक कर लिया जाएगा।
मतदाता बनने या सुधार के लिए कौन-सा फॉर्म भरें?
- फॉर्म-6 : नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए।
- फॉर्म-6A : विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए (यदि विदेशी नागरिकता नहीं ली हो)।
- फॉर्म-7 : मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
- फॉर्म-8 : पता परिवर्तन, प्रविष्टि सुधार, EPIC प्रतिस्थापन या दिव्यांग चिह्नांकन के लिए।
ये सभी फॉर्म राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.in से ऑनलाइन भी प्राप्त और जमा किए जा सकते हैं।
कैसे जानें कि आपका नाम सूची में है या नहीं?
मतदाता voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाकर Search in Electoral Roll विकल्प के माध्यम से अपना नाम जांच सकते हैं। इसके लिए नाम, पिता/पति का नाम या EPIC नंबर दर्ज किया जा सकता है।
इसके अलावा Voter Helpline App और अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से भी ऑफलाइन जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
नाम हटने की जानकारी सार्वजनिक होगी, गृह विभाग को नहीं जाएगी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा, उनका विवरण किसी भी स्थिति में गृह विभाग या अन्य एजेंसियों को नहीं भेजा जाएगा।
हालांकि, जिन मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटाए जाएंगे, उनकी जानकारी चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक की जाएगी, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।
मतदाता सूची से जुड़े अहम सवाल-जवाब
क्या नोटिस मिलने का मतलब वोट कटना तय है?
नहीं। यह केवल सत्यापन प्रक्रिया है। समय पर दस्तावेज देने पर नाम सुरक्षित रहेगा।
अगर दस्तावेज नहीं दिए तो क्या होगा?
दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा।
ऑनलाइन आवेदन मान्य है या नहीं?
हां, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों आवेदन पूरी तरह मान्य हैं।
अंतिम मतदाता सूची कब जारी होगी?
सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद 6 मार्च को।










