16 साल की महक की मौत या साजिश? शारदा सहायक नहर से मिली लाश, सुसाइड नोट और रस्सी ने खड़े किए सवाल

बाराबंकी में शारदा सहायक नहर से मिली 16 वर्षीय छात्रा महक कौर की तस्वीर, संदिग्ध मौत और जांच से जुड़ा मामला।

16 साल की एक छात्रा, परीक्षा देने निकली एक सामान्य सुबह और फिर 15 दिन बाद शारदा सहायक नहर से मिली उसकी लाश—बाराबंकी में सामने आया यह मामला सिर्फ एक कथित आत्महत्या नहीं, बल्कि उन सवालों की श्रृंखला है, जिनके जवाब अभी धुंध में हैं। महक कौर की मौत के साथ बरामद सुसाइड नोट, उसकी कमर में बंधी रस्सी और नहर किनारे मिली बाइक ने जांच को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। क्या यह सचमुच आत्महत्या थी, या फिर किसी दबाव, डर या साजिश का अंतिम परिणाम? यही वह प्रश्न है, जिसके इर्द-गिर्द अब पूरी पुलिस जांच और परिवार की पीड़ा घूम रही है।

अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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बाराबंकी जिले से सामने आया यह मामला केवल एक किशोरी की संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक, मानसिक और प्रशासनिक ताने-बाने की परतें खोलता है, जिसमें आज की युवा पीढ़ी सांस ले रही है। 1 जनवरी को शारदा सहायक नहर से बरामद किशोरी के शव की पहचान करीब 72 घंटे बाद हुई। मृतका की पहचान बिसवां थाना क्षेत्र के न्यौराजपुर पोस्ट उलरा निवासी जगदीप सिंह की 16 वर्षीय बेटी महक कौर के रूप में की गई। महक बीबीए की छात्रा थी और भविष्य को लेकर परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी।

15 दिसंबर को परीक्षा देने निकली, फिर नहीं लौटी

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार महक 15 दिसंबर को घर से बीबीए की परीक्षा देने के लिए बाइक लेकर निकली थी। दोपहर करीब 1:21 बजे तक वह अपने परिजनों से मोबाइल कॉल और व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क में थी। इसके बाद अचानक उसका मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया। जब देर शाम तक वह घर नहीं लौटी, तो परिवार की चिंता बढ़ गई। उसी दिन परिजनों ने स्थानीय थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

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नहर किनारे मिली बाइक और स्कूल बैग

करीब दो सप्ताह बाद 1 जनवरी को फतेहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शारदा सहायक नहर में एक किशोरी का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने जब शव के पास नहर किनारे एक बाइक और स्कूल बैग देखा, तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई। बाद में यही सामान महक का निकला। बैग से एक नोट भी बरामद हुआ, जिसने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया।

पंजाबी में लिखा नोट, परिजनों ने जताई शंका

बरामद नोट की भाषा पंजाबी बताई जा रही है। पुलिस द्वारा कराए गए प्रारंभिक हिंदी अनुवाद में पिता से माफी मांगने, अपनी गलतियों का जिक्र करने और आत्महत्या की बात लिखी होने का उल्लेख है। हालांकि परिजनों का साफ कहना है कि नोट की लिखावट महक की नहीं लगती। परिवार का आरोप है कि यदि यह आत्महत्या का मामला है, तो नोट लिखने के पीछे की परिस्थितियों की गहराई से जांच जरूरी है।

महक की कमर में बंधी थी रस्सी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब शव नहर से निकाला गया, उस समय महक की कमर में एक रस्सी बंधी हुई थी, जबकि उसका दूसरा सिरा खुला हुआ था। इसी तथ्य के आधार पर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि यदि यह आत्महत्या होती, तो रस्सी की स्थिति अलग होती। यह बिंदु जांच एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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परेशान करने वाले युवक का आरोप

महक के पिता ने पुलिस को बताया है कि एक युवक उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहा था। परिवार का दावा है कि महक मानसिक तनाव में थी, लेकिन डर या सामाजिक दबाव के कारण उसने घर में खुलकर इस बारे में कुछ नहीं बताया। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते इस पहलू पर ध्यान दिया गया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

पुलिस जांच: हर एंगल से पड़ताल का दावा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच हर संभव पहलू से की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी स्पष्ट कर रही है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की पुष्टि की जाएगी।

एक मौत, कई अनुत्तरित सवाल

महक कौर की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किशोर-किशोरियां अपने मानसिक दबाव, भय और उत्पीड़न को खुलकर साझा कर पा रही हैं? क्या समाज और परिवार समय रहते उन संकेतों को समझ पा रहे हैं, जो किसी बड़े खतरे की ओर इशारा करते हैं? यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का भी है।

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न्याय की उम्मीद और जांच की कसौटी

फिलहाल महक का परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। उनका कहना है कि सच्चाई चाहे जो भी हो, उसे सामने आना चाहिए। पुलिस की जांच इस बात की कसौटी बनेगी कि क्या यह एक आत्महत्या थी, किसी दबाव का परिणाम थी, या फिर इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश छिपी है। जवाब आने तक यह मामला बाराबंकी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना रहेगा।


❓ क्लिक करके पढ़ें — सवाल और जवाब

महक कौर की पहचान कितने समय बाद हुई?

शव मिलने के करीब 72 घंटे बाद परिजनों द्वारा महक कौर की पहचान की गई।

क्या सुसाइड नोट की लिखावट संदिग्ध है?

परिजनों का कहना है कि नोट की लिखावट महक की नहीं लगती, जिसकी जांच कराई जा रही है।

परिवार ने हत्या की आशंका क्यों जताई?

शव मिलने के समय महक की कमर में बंधी रस्सी और उसका खुला सिरा परिवार की शंका का मुख्य आधार है।

पुलिस किन बिंदुओं पर जांच कर रही है?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, हैंडराइटिंग टेस्ट, कॉल डिटेल्स, मोबाइल लोकेशन और संभावित उत्पीड़न के आरोपों की जांच की जा रही है।

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