दर्दनाक हादसा : चेन्नई में निर्माणाधीन इमारत ढही, 9 मजदूरों की मौत, कई घायल, चीख पुकार से दहला इलाका

ईंट-पत्थरों और लोहे की सरियों से बनी निर्माणाधीन बहुमंज़िला इमारत

दर्दनाक हादसा जिसने चेन्नई को हिला दिया

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टिक्कू आपचे की रिपोर्ट

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई मंगलवार को एक भीषण दर्दनाक हादसा का गवाह बना। तिरुवल्लूर जिले के एन्नोर थर्मल पावर प्लांट में निर्माण कार्य के दौरान इमारत का एक बड़ा हिस्सा अचानक गिर गया। 

इस भयावह घटना में कम से कम 9 मजदूरों की मौत हो गई और दर्जनों मजदूर घायल हो गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत का आर्च ढह गया था, जिसकी चपेट में मजदूर दब गए।

यह दर्दनाक हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायल मजदूरों को तत्काल पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई लोगों की हालत अभी भी नाजुक बताई जा रही है।

दर्दनाक हादसा : कैसे हुआ चेन्नई पावर प्लांट में मलबे का ढहना

सूत्रों के अनुसार, एन्नोर स्थित उत्तरी चेन्नई थर्मल पावर प्लांट में नया निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान एक बड़ा आर्च स्ट्रक्चर अचानक ढह गया और उसके नीचे कई मजदूर दब गए।

4 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।

जबकि 5 मजदूरों ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया।

10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

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अवाडी पुलिस आयुक्तालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि यह एक दुखद और अप्रत्याशित दर्दनाक हादसा है। अधिकारियों के अनुसार, घटना की सही वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्था और संरचना की गुणवत्ता पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

दर्दनाक हादसा : प्रशासन और अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। तमिलनाडु विद्युत बोर्ड के सचिव डॉ. जे. राधाकृष्णन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तुरंत स्टेनली सरकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात की।

यह दर्दनाक हादसा इतना गंभीर था कि बचाव कार्य को तेज करने के लिए अतिरिक्त मशीनें और एंबुलेंस भी लगाई गईं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, गंभीर रूप से घायल कई मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है और उनका इलाज जारी है।

दर्दनाक हादसा : पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दर्दनाक हादसा पर शोक जताया और मृतकों के परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। पीएम ने अपने संदेश में कहा कि,

“चेन्नई में हुई इस दुर्घटना से दुखी हूं। प्रभावित परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं और मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह भी बताया गया कि:

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प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

जबकि घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

पीएम मोदी का यह कदम प्रभावित परिवारों के लिए राहत की किरण साबित होगा।

दर्दनाक हादसा : सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

चेन्नई के इस दर्दनाक हादसा के बाद एक बार फिर से निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लग गया है। देश के कई हिस्सों में आए दिन निर्माणाधीन इमारतों के गिरने की खबरें आती रहती हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक मजदूरों की जिंदगी लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?

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विशेषज्ञों का मानना है कि पावर प्लांट जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में हर स्तर पर क्वालिटी चेक और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए। लेकिन अगर ढांचा इतनी आसानी से गिर सकता है, तो यह स्पष्ट करता है कि या तो डिज़ाइन में खामी थी या फिर निर्माण कार्य में लापरवाही।

दर्दनाक हादसा : स्थानीय लोगों और मजदूरों का गुस्सा

इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों और मजदूरों के बीच गुस्सा देखने को मिला। परिजनों का कहना है कि मजदूर रोजी-रोटी के लिए यहां काम कर रहे थे, लेकिन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। कई परिवारों का सहारा छिन गया है।

यह दर्दनाक हादसा न केवल पीड़ित परिवारों को गहरे आघात में डाल गया है, बल्कि मजदूर वर्ग की कठिनाइयों और असुरक्षा को भी उजागर करता है।

दर्दनाक हादसा : जांच के आदेश

अवाडी पुलिस आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि दुर्घटना की जांच की जा रही है। तकनीकी विशेषज्ञों को बुलाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आर्च स्ट्रक्चर क्यों ढहा। शुरुआती रिपोर्ट आने तक कई सवाल अनुत्तरित हैं।

सरकार और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ितों को हर संभव मदद दी जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चेन्नई का यह दर्दनाक हादसा सिर्फ एक निर्माण स्थल पर हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा और जिम्मेदारियों की अनदेखी का नतीजा है। 9 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और कई घायल मजदूर अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

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यह घटना चेतावनी है कि अगर समय रहते निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे। प्रशासन, ठेकेदार और इंजीनियरिंग टीमें तभी जिम्मेदार कहलाएंगी, जब मजदूरों की जान को सर्वोच्च महत्व दिया जाएगा।

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