
✍️ संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट में ग्राम पंचायतों की आड़ में सरकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना
चित्रकूट जनपद के सदर ब्लॉक कर्वी अंतर्गत ग्राम पंचायत संग्रामपुर और ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। विकास कार्यों के नाम पर यहां जिस तरह से ग्राम सभा की भूमि, सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा है, उसने पूरे क्षेत्र में सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायतों के भीतर रिश्तों के सहारे एक ऐसा गठजोड़ खड़ा कर दिया गया है, जिसमें नियम, प्रक्रिया और जवाबदेही कहीं दिखाई नहीं देती।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी में ग्राम सभा के पहाड़ पर मुक्तिधाम निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर खुदाई कराई जा रही है। इस खुदाई से निकलने वाली मोरम (बलुई मिट्टी) का उपयोग उसी पंचायत क्षेत्र में होना चाहिए था, लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए इस सामग्री को ग्राम पंचायत संग्रामपुर में संपर्क मार्ग निर्माण के लिए भेज दिया गया।
मुक्तिधाम निर्माण बना अवैध खनन का जरिया
ग्राम सभा की भूमि पर स्थित पहाड़ से इस तरह की खुदाई न केवल पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ है, बल्कि पंचायत राज अधिनियम की मूल भावना का भी उल्लंघन करती है। ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम निर्माण केवल एक बहाना है, असल उद्देश्य पहाड़ से मोरम निकालकर उसे दूसरे गांव में उपयोग करना और फिर उसी पर भुगतान दिखाना है।
यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रानीपुर खाकी में तैनात पंचायत सचिव की भूमिका भी पूरे प्रकरण में संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट आपत्ति या रोक-टोक के यह पूरा काम चलता रहा, जिससे सचिवीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका और गहरी हो जाती है।
संग्रामपुर में भुगतान की हड़बड़ी, नीयत पर सवाल
ग्राम पंचायत संग्रामपुर में संपर्क मार्ग का निर्माण सहित अन्य कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान कर दिया गया है। जिस सामग्री का निर्माण कार्य में उपयोग किया गया है वह सामग्री ग्राम पंचायत संग्रामपुर का नहीं बल्कि रानीपुर खाकी की ग्राम सभा भूमि से ली गई है।
ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या भुगतान से पहले सामग्री की वैधता, माप और गुणवत्ता की जांच की गई, या फिर सब कुछ पहले से तय योजना के तहत किया जा रहा है।
रिश्तों की डोर से बंधा पंचायतों का गठजोड़
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी के ग्राम प्रधान का भाई, ग्राम पंचायत संग्रामपुर के ग्राम प्रधान के भाई का दामाद है। इसी ससुर–दामाद के रिश्ते का लाभ उठाकर दोनों पंचायतों में एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने वाला पूरा तंत्र सक्रिय है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी रिश्तेदारी के कारण कोई भी अधिकारी या कर्मचारी खुलकर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं करता।
राज्य वित्त और पंद्रहवें वित्त में भी अनियमितता के आरोप
सूत्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत संग्रामपुर में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य वित्त और पंद्रहवें वित्त आयोग की धनराशि से कोई ठोस पक्का कार्य धरातल पर नहीं दिखता, लेकिन कागजों में भुगतान दर्शा दिया गया है। वहीं रानीपुर खाकी में आरआरसी सेंटर और मुक्तिधाम जैसे निर्माण कार्य अधूरे या गुणवत्ता विहीन नजर आ रहे हैं।
मनरेगा वृक्षारोपण: कागजों में पौधे, जमीन पर कुछ नहीं
दोनों ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत कराए गए वृक्षारोपण को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कागजों में हजारों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन मौके पर पौधे या वृक्ष दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल भुगतान निकालने का एक और जरिया बन गया है।
स्थलीय निरीक्षण में खुली पोल
चलो गांव की ओर जागरूकता अभियान के संस्थापक एवं अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने जब दोनों ग्राम पंचायतों का स्थलीय निरीक्षण किया, तो कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर इन अनियमितताओं की पुष्टि की। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि पहाड़ से निकली मोरम और संपर्क मार्ग निर्माण में लगी सामग्री की निष्पक्ष जांच करा दी जाए, तो पूरा सच सामने आ जाएगा।
जिला प्रशासन से जांच की मांग
संजय सिंह राणा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर रानीपुर खाकी के पहाड़ से निकली मोरम, संग्रामपुर के संपर्क मार्ग और सभी संबंधित निर्माण कार्यों की जांच कराई जाएगी। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर यदि फर्जीवाड़ा हुआ है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ग्राम सभा की भूमि से निकली मोरम दूसरे गांव में इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, नियमों के अनुसार ग्राम सभा भूमि से निकली सामग्री का उपयोग उसी पंचायत क्षेत्र में किया जाना चाहिए।
किन योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप है?
राज्य वित्त, पंद्रहवां वित्त, मनरेगा, मुक्तिधाम और आरआरसी सेंटर निर्माण में अनियमितताओं के आरोप हैं।
आगे क्या कार्रवाई संभव है?
जांच में आरोप सही पाए जाने पर ग्राम प्रधानों और संबंधित अधिकारियों पर वित्तीय व कानूनी कार्रवाई हो सकती है।










