जहाँ वादे खामोश हैं, वहाँ विकास बोल रहा है — मऊ मानिकपुर में लल्ली महाराज ने दावेदारों की ज़मीन खिसकाई

मऊ मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र में विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी की पहल से बने संपर्क मार्ग का निरीक्षण करते ग्रामीण और विकास कार्यों की जमीनी तस्वीर

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow

चित्रकूट। राजनीति में अक्सर भाषण, वादे और आरोप-प्रत्यारोप सुर्खियां बनते हैं, लेकिन मऊ मानिकपुर विधानसभा में इन दिनों चर्चा का विषय किसी बयानबाज़ी का शोर नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिख रहा विकास है। यहां के विधायक
अविनाश चंद्र द्विवेदी उर्फ लल्ली महाराज की दूरदर्शी सोच और कार्य-शैली ने विकास को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचाकर सामाजिक सौहार्द और भरोसे की नींव मजबूत की है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की दावेदारी का सपना देखने वालों की नींद उड़ती दिख रही है, क्योंकि जनता अब तुलना वादों से नहीं, परिणामों से कर रही है।

सामाजिक सौहार्द के साथ विकास की नई परिभाषा

मऊ मानिकपुर विधानसभा का सामाजिक ताना-बाना विविधताओं से भरा है। ऐसे क्षेत्र में विकास तभी टिकाऊ होता है, जब सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता दी जाए। विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने इसी सूत्र को आधार बनाया। उन्होंने गांवों में संवाद, सहभागिता और पारदर्शिता के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। परिणामस्वरूप, जहां पहले योजनाएं काग़ज़ों में सिमट जाती थीं, वहां अब सड़कें, संपर्क मार्ग और बुनियादी ढांचे दिखाई दे रहे हैं।

कच्चे रास्तों से पक्की राहों तक: जमीनी बदलाव

विधानसभा क्षेत्र के अनेक मजरे और गांव वर्षों से कच्चे रास्तों की समस्या से जूझ रहे थे। बरसात में कीचड़, गर्मी में धूल और आपातकाल में एंबुलेंस की पहुंच—सब एक बड़ी चुनौती थे। विधायक निधि और बुंदेलखंड विकास निधि के माध्यम से इन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया गया। जहां भी कच्चे रास्ते चिन्हित हुए, वहां इंटरलॉकिंग खड़ंजा और पक्की सड़कें बनीं। यह केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार तक आसान पहुंच का मार्ग है।

इसे भी पढें  गोंडा में RDSS योजना से 12 गांवों को बिजली की बड़ी सौगात, हजारों उपभोक्ताओं को मिलेगा नियमित कनेक्शन

रामनगर ब्लॉक का उदाहरण: बेलरी संपर्क मार्ग

रामनगर विकासखंड की ग्राम पंचायत रामपुर के मजरे बेलरी तक जाने वाला संपर्क मार्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार था। ग्रामीणों के लिए यह मार्ग केवल सड़क नहीं, बल्कि जीवन-रेखा था। विधायक को जैसे ही स्थिति की जानकारी मिली, उन्होंने त्वरित निर्णय लेते हुए 25 लाख रुपये की घोषणा की। यह घोषणा किसी औपचारिकता तक सीमित नहीं रही। बुंदेलखंड विकास निधि से 320 मीटर इंटरलॉकिंग खड़ंजा का निर्माण कराया गया, जिसकी लागत 17 लाख रुपये से अधिक रही। उल्लेखनीय यह कि घोषणा के तुरंत बाद कार्य प्रारंभ हुआ और समयबद्ध ढंग से पूर्ण भी किया गया।

झुरही नदी पर रपटा: आपदा में राहत की तैयारी

संपर्क मार्ग के बीच झुरही नदी पड़ती है, जो बरसात में ग्रामीणों के लिए बड़ी बाधा बन जाती थी। इस समस्या को देखते हुए रपटा निर्माण की स्वीकृति दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई। सूत्रों के अनुसार, लघु सिंचाई विभाग को पत्र प्रेषित कर लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से रपटा निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके साथ ही आगे के हिस्से में लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 1200 मीटर सड़क निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार है, जिससे पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।

इसे भी पढें  चलो गांव की ओर जागरूकता अभियान की भव्य शुरुआत — चित्रकूट में ग्रामीण विकास की नई इबारत

‘जीत आपकी—चलो गांव की ओर’ अभियान की जमीनी पड़ताल

‘जीत आपकी—चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के संस्थापक अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने स्वयं बेलरी संपर्क मार्ग का दौरा कर जमीनी हकीकत देखी। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने बताया कि विधायक के सतत प्रयासों से यह मार्ग वास्तविकता में बदल रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले बीमार व्यक्ति को खटिया या झोली में उठाकर कीचड़ और पानी पार कराना पड़ता था। बच्चे जोखिम भरे रास्तों से स्कूल जाते थे और शिक्षकों को भी भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती थीं। अब हालात बदल रहे हैं—यह बदलाव भरोसा पैदा करता है।

जनता का भरोसा बनाम दावेदारों की बेचैनी

विकास की यह रफ्तार उन लोगों को बेचैन कर रही है, जो चुनावी मौसम में ही गांवों का रुख करते हैं। दावेदार गांव-गांव पहुंचकर खुद को हितैषी बताने में जुटे हैं, लेकिन जनता अब समझदार है। लोग पूछते हैं—जब वर्षों तक अवसर था, तब काम क्यों नहीं हुआ? आज जब सड़कें बन रही हैं, तब श्रेय लेने की होड़ क्यों? यही सवाल दावेदारों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं।

भाषण नहीं, परिणाम—यही राजनीति की कसौटी

मऊ मानिकपुर में राजनीति का पैमाना बदलता दिख रहा है। यहां अब भाषणों से ज़्यादा परिणाम मायने रखते हैं। विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी की कार्य-शैली ने यह संदेश दिया है कि विकास निरंतर प्रक्रिया है, जिसे घोषणा से लेकर क्रियान्वयन तक ईमानदारी चाहिए। यही कारण है कि क्षेत्र में उनका काम बोलता है—और वही 2027 की दिशा भी तय करता नज़र आता है।

इसे भी पढें  नाबालिगा से संबंध मामले में भाजपा नेता गौरीशंकर हुए फेमस: VIDEO देख यूजर्स बोले- धाकड़ अब नाम नहीं ब्रांड

निष्कर्ष: जब विकास बोले, तो शोर ख़ामोश हो जाता है

मऊ मानिकपुर विधानसभा में आज जो तस्वीर उभर रही है, वह बताती है कि सही सोच, सही प्राथमिकता और त्वरित निर्णय से राजनीति का भरोसा लौटाया जा सकता है। यहां विकास किसी एक सड़क या परियोजना का नाम नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक है, जो जनता और जनप्रतिनिधि के बीच बनता है। और जब यह भरोसा मजबूत होता है, तब दावेदारों का शोर स्वतः शांत पड़ जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मऊ मानिकपुर विधानसभा में हालिया प्रमुख विकास कार्य कौन से हैं?

कच्चे रास्तों का पक्की सड़कों में रूपांतरण, बेलरी संपर्क मार्ग का निर्माण, झुरही नदी पर रपटा प्रस्ताव और आगे लोक निर्माण विभाग की सड़क योजना प्रमुख हैं।

बेलरी संपर्क मार्ग निर्माण की लागत कितनी है?

320 मीटर इंटरलॉकिंग खड़ंजा का निर्माण बुंदेलखंड विकास निधि से हुआ, जिसकी लागत 17 लाख रुपये से अधिक रही।

रपटा निर्माण का प्रस्ताव किस विभाग को भेजा गया है?

झुरही नदी पर रपटा निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग को पत्र भेजा गया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग एक करोड़ रुपये है।

इन विकास कार्यों से ग्रामीणों को क्या लाभ होगा?

आवागमन सुगम होगा, आपातकाल में एंबुलेंस की पहुंच संभव होगी, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच बनेगी।

चित्रकूट जिले के ग्राम पंचायत गढ़चपा में ग्रामीणों के साथ विकास कार्यों का निरीक्षण करते ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एवं जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अरुण सिंह बघेल उर्फ मिंटू सिंह
ग्रामीणों के बीच मौजूद ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरुण सिंह बघेल उर्फ मिंटू सिंह, जिनकी सोच और पहल से ग्राम पंचायत गढ़चपा में सड़क, पुलिया और मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top