लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़े एक गंभीर और संवेदनशील मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। महिला रेजिडेंट डॉक्टर से कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया है। अदालत से गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
गैर जमानती वारंट के बाद इनाम घोषित
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज होने के बाद अदालत ने आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसके बावजूद जब आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पाया, तो पुलिस प्रशासन ने उसके ऊपर 25 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित करने का निर्णय लिया। यह इनाम उस व्यक्ति को दिया जाएगा जो आरोपी के बारे में पुख्ता जानकारी देगा या उसकी गिरफ्तारी में पुलिस की मदद करेगा।
तीन टीमें लगातार कर रही हैं तलाश
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अभी तक रमीज मलिक के बारे में कोई सटीक जानकारी हाथ नहीं लगी है। आरोपी का मोबाइल फोन बंद है, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करने में भी तकनीकी कठिनाइयाँ आ रही हैं।
उत्तराखंड तक पहुंची पुलिस की जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक फरार बताया जा रहा है। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह उत्तराखंड के खटीमा क्षेत्र में अपने पैतृक घर जा सकता है। इसी आधार पर पुलिस टीम वहां तक पहुंची और दबिश दी, लेकिन आरोपी वहां भी नहीं मिला। परिजनों से पूछताछ कर संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि आरोपी शीघ्र गिरफ्तार नहीं होता, तो उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला केजीएमयू की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़ा है, जिन्होंने संस्थान में ही कार्यरत एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार, अगस्त महीने में आरोपी उनके किराए के कमरे पर आया और शादी का झांसा देकर उनका यौन शोषण किया। पीड़िता का कहना है कि उस समय उन्होंने आरोपी पर भरोसा किया, क्योंकि वह स्वयं भी मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ा हुआ था।
पीड़िता का आरोप है कि सितंबर में उन्हें अपनी गर्भावस्था की जानकारी हुई। जब उन्होंने इस विषय में रमीज मलिक से बात की, तो उसने इसे गलत बताते हुए दवाइयों के माध्यम से गर्भपात करा दिया। बाद में जब पीड़िता ने आरोपी की पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाई, तो उन्हें पता चला कि रमीज पहले से शादीशुदा है और उसने एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर विवाह किया था।
धर्म परिवर्तन का दबाव और ब्लैकमेलिंग
पीड़िता के अनुसार, सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी ने उन पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि रमीज मलिक उन्हें लगातार ब्लैकमेल करता रहा और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस मानसिक उत्पीड़न का असर इतना गहरा पड़ा कि पीड़िता अवसाद में चली गई।
17 दिसंबर की सुबह पीड़िता ने अत्यधिक मानसिक तनाव में दवाओं की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास भी किया। हालांकि समय रहते उन्हें उपचार मिल गया और उनकी जान बच सकी। इसके बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
संस्थान की छवि और महिला सुरक्षा पर सवाल
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में महिला डॉक्टरों की सुरक्षा और कार्यस्थल की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। केजीएमयू जैसे संस्थान से जुड़े इस प्रकरण ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उच्च शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों में आंतरिक निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र कितना प्रभावी है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।










