राजस्थान के भरतपुर जिले की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी कामां एक बार फिर अपने नाम को लेकर चर्चा में है। राजपूत समाज की ओर से नगर का नाम बदलकर ‘कामवन’ किए जाने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन कामां पंचायत समिति के प्रधान प्रतिनिधि केसरी सिंह राठौड़ के नेतृत्व में उपखंड अधिकारी सुभाष यादव को राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। समाज का कहना है कि यह मांग केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी पौराणिक पहचान, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
पौराणिक नाम ‘कामवन’ और ऐतिहासिक संदर्भ
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्राचीन ग्रंथों, लोक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस क्षेत्र का मूल नाम ‘कामवन’ रहा है। समय के साथ उच्चारण और प्रशासनिक दस्तावेजों में बदलाव के कारण यह नाम अपभ्रंश होकर ‘कामां’ बन गया। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि जिस प्रकार देश के अनेक प्राचीन नगरों ने अपने ऐतिहासिक नाम पुनः अपनाए हैं, उसी क्रम में कामां का नाम भी कामवन किया जाना चाहिए।
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने की पहल
राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि कामवन नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि इस भूमि की धार्मिक चेतना का प्रतीक है। यहां की परंपराएं, मंदिर, तीर्थ और लोककथाएं इसी नाम से जुड़ी रही हैं। वर्तमान समय में जब सांस्कृतिक पहचान को लेकर समाज सजग हो रहा है, तब इस नाम परिवर्तन से न केवल स्थानीय गौरव बढ़ेगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
उपखंड अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
ज्ञापन उपखंड अधिकारी सुभाष यादव को सौंपते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इसे यथाशीघ्र राज्य सरकार तक पहुंचाया जाए। प्रधान प्रतिनिधि केसरी सिंह राठौड़ ने कहा कि यह मांग लंबे समय से समाज में चर्चा का विषय रही है और अब इसे विधिवत प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार इस विषय की गंभीरता को समझेगी।
कौन-कौन रहा उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान पंचायत प्रधान प्रतिनिधि केसरी सिंह राठौड़ के साथ सुरेंद्र कुशवाहा, जसवंत सिंह, नवल सिंह सतवास, पूर्व सरपंच इंदल सिंह, राजू बिलोंद, एडवोकेट हेमंत सिंह, नन्नू कनवाडी सहित राजपूत समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस मांग को न्यायसंगत बताते हुए समर्थन किया।
नाम परिवर्तन और प्रशासनिक प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार किसी नगर के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया चरणबद्ध होती है। इसमें स्थानीय निकायों का प्रस्ताव, जिला प्रशासन की संस्तुति और अंततः राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। राजपूत समाज का मानना है कि पंचायत समिति स्तर पर पहले ही इस विषय पर सकारात्मक माहौल है और आगे की प्रक्रिया भी सहयोग से पूरी की जा सकती है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाम परिवर्तन से क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी। युवाओं में अपनी विरासत को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और पर्यटन, व्यापार तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। हालांकि कुछ लोग प्रशासनिक औपचारिकताओं और व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की आवश्यकता बता रहे हैं।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में कदम
कुल मिलाकर कामां को कामवन नाम दिए जाने की मांग केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक व्यापक पहल के रूप में देखी जा रही है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो आने वाले समय में क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम मिल सकता है।
क्लिकेबल सवाल-जवाब
कामां का प्राचीन नाम क्या बताया जा रहा है?
राजपूत समाज के अनुसार इस नगरी का प्राचीन और पौराणिक नाम ‘कामवन’ रहा है, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर कामां बन गया।
नाम परिवर्तन की मांग क्यों की जा रही है?
धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने तथा स्थानीय गौरव बढ़ाने के उद्देश्य से यह मांग की जा रही है।
ज्ञापन किसे सौंपा गया?
यह ज्ञापन उपखंड अधिकारी सुभाष यादव को राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया।
आगे की प्रक्रिया क्या हो सकती है?
स्थानीय निकायों की संस्तुति के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।









