उन्नाव रेप केस : दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कुलदीप सेंगर की रिहाई पर ब्रेक और पीड़िता की ‘अंत तक लड़ाई’ की घोषणा

उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक Kuldeep Singh Sengar और उनकी बेटी Aishwarya Sengar, सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक के बाद की तस्वीर

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow

उन्नाव रेप केस एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद, जिसमें दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत मिली थी, फिलहाल उनकी जेल से बाहर आने की संभावनाओं पर विराम लग गया है। यह रोक केवल एक अंतरिम न्यायिक कदम नहीं है, बल्कि उस संवेदनशील मुकदमे की दिशा को भी रेखांकित करती है, जिसने वर्षों से न्याय, राजनीति, सत्ता और पीड़िता की सुरक्षा जैसे सवालों को साथ-साथ खड़ा कर रखा है।

सुप्रीम कोर्ट की रोक: कानूनी संतुलन और पीड़िता की राहत

दिल्ली हाईकोर्ट से मिली राहत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने पीड़िता के पक्ष में एक बड़ी राहत के रूप में काम किया है। इस आदेश का तात्कालिक प्रभाव यह है कि सेंगर की रिहाई पर फिलहाल रोक बनी रहेगी। पीड़िता का कहना है कि वह अपनी कानूनी लड़ाई तब तक जारी रखेगी, जब तक उसे पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता। उसके शब्दों में, यह लड़ाई केवल सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रश्न भी है।

सेंगर की बेटी ऐश्वर्या की प्रतिक्रिया: ‘न्यायालय का सम्मान सर्वोपरि’

इस पूरे घटनाक्रम पर कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी ऐश्वर्या ने टीवी9 भारतवर्ष से विस्तृत बातचीत की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाए जाने के सवाल पर ऐश्वर्या ने कहा कि उनका परिवार न्यायालय का पूरा सम्मान करता है और आगे भी करता रहेगा। उनके अनुसार, उनकी कानूनी लड़ाई अदालत के दायरे में ही लड़ी जाएगी और वे अपने सबूतों को लेकर आश्वस्त हैं।

इसे भी पढें  “मुझे नमक हरामो का वोट नहीं चाहिए” : बिहार चुनाव में गिरिराज सिंह के बयान से सियासत गर्म

ऐश्वर्या ने स्पष्ट किया कि उनके परिवार का रुख कभी ऐसा नहीं रहा कि फैसला प्रतिकूल आने पर अदालत पर आरोप लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि निचली अदालत से सजा मिलने पर भी उन्होंने उस निर्णय को स्वीकार किया और हाईकोर्ट से जो राहत मिली, वह पूरी तरह कानूनी आधारों पर थी।

‘लीगल ग्राउंड्स पर ही मिली राहत’

ऐश्वर्या का कहना है कि हाईकोर्ट से जो राहत मिली, वह भावनात्मक या दबाव आधारित नहीं, बल्कि कानूनी तथ्यों और दलीलों पर आधारित थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट भी सभी तथ्यों और कानूनी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करेगा। उनके अनुसार, उनका पक्ष अदालत में मजबूती से रखा जाएगा और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

पीड़िता के आरोपों पर ऐश्वर्या का जवाब

पीड़िता की ओर से लगाए गए उन आरोपों पर—कि उसके पिता को जेल में मरवाया गया और उसकी चाची-मौसी की सड़क हादसे में मौत कराई गई—ऐश्वर्या ने इन दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि जिस सड़क हादसे की बात की जाती है, उसकी जांच केवल सीबीआई ने ही नहीं, बल्कि आईआईटी दिल्ली और सीएफएसएल जैसी संस्थाओं ने भी की थी। फॉरेंसिक जांच में इसे एक प्राकृतिक दुर्घटना बताया गया और इस मामले में उनके पिता को बाइज्जत डिस्चार्ज किया जा चुका है।

इसे भी पढें  डेढ़ करोड़ का घोड़ाऔर सत्ता की सवारी —उपहार या प्रभाव का प्रदर्शन?

चार्जशीट, धाराएं और ‘गैर-इरादतन हत्या की साजिश’ का सवाल

ऐश्वर्या ने आगे कहा कि प्रारंभिक सीबीआई चार्जशीट में उनके पिता का नाम 302 (हत्या) की धारा में नहीं था। बाद में जब मामला दिल्ली ट्रांसफर हुआ, तब अदालत ने दो चार्जशीट को क्लब किया। उनके अनुसार, जिस मामले में सजा हुई, वह 120B और 304 पार्ट-2 के तहत है, जिसे वे ‘गैर-इरादतन हत्या की साजिश’ कहती हैं—और इसे वे स्वयं भी कानूनी रूप से विरोधाभासी मानती हैं।

उन्नाव गैंगरेप केस: अलग मुकदमा, अलग तथ्य

‘उन्नाव गैंगरेप केस’ को लेकर चल रही चर्चाओं पर ऐश्वर्या ने स्पष्ट किया कि यह एक अलग मुकदमा है, जिसमें उनके पिता का नाम शामिल नहीं है। उनके अनुसार, पीड़िता ने पुलिस और न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए शुरुआती बयानों में भी उनके पिता का जिक्र नहीं किया था। बाद की घटनाओं और पंचायत के बाद आरोपों का स्वरूप बदला गया—ऐसा उनका दावा है।

पंचायत, रंजिश और राजनीतिक पृष्ठभूमि का दावा

ऐश्वर्या ने गांव की पंचायत, कथित रंजिश और राजनीतिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पिता ने पंचायत में महिलाओं को गलत तरीके से फंसाने का विरोध किया था। उनका दावा है कि इसी के बाद उनके परिवार के खिलाफ माहौल बदला। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता के परिजनों की राजनीतिक गतिविधियां और चुनावी सक्रियता इस पूरे प्रकरण के संदर्भ को जटिल बनाती हैं।

इसे भी पढें  छत्तीसगढ़ में बड़ा हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन : कुएं में गिरे इन बेजुबानों को जीवित बाहर निकाल लिया

न्याय, संवेदनशीलता और सार्वजनिक विमर्श

उन्नाव रेप केस केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं, बल्कि भारत की न्यायिक प्रक्रिया, पीड़ित अधिकारों, मीडिया विमर्श और राजनीति के अंतर्संबंधों की कसौटी भी है। सुप्रीम कोर्ट की रोक ने जहां पीड़िता को तत्काल राहत दी है, वहीं यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तथ्यों, कानून और निष्पक्ष सुनवाई के आधार पर ही होगा। इस बीच, समाज और मीडिया के लिए यह आवश्यक है कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ इस मामले पर चर्चा की जाए।

🔎 पाठकों के सवाल – जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस आदेश पर रोक लगाई है?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को राहत मिली थी।

क्या कुलदीप सेंगर फिलहाल जेल से बाहर आ सकते हैं?

नहीं, सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण फिलहाल उनकी रिहाई पर विराम लगा हुआ है।

ऐश्वर्या सेंगर ने पीड़िता के आरोपों पर क्या कहा?

उन्होंने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जांच एजेंसियों ने उन्हें खारिज किया है और उनके पिता को संबंधित मामलों में डिस्चार्ज किया जा चुका है।

उन्नाव गैंगरेप केस और मुख्य रेप केस में क्या अंतर है?

ऐश्वर्या के अनुसार, गैंगरेप का मामला अलग है और उसमें उनके पिता का नाम शामिल नहीं है।

उन्नाव रेप मामले की पीड़िता का प्रतीकात्मक दृश्य, न्यायिक प्रक्रिया के बीच डर और असुरक्षा को दर्शाती महिला
न्याय की लंबी लड़ाई के बीच उन्नाव रेप सर्वाइवर की आँखों में झलकता डर और साहस — एक प्रतीकात्मक दृश्य। फोटो को क्लिक करें☝☝☝☝

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top