कामां को ‘कामवन’ बनाने की ऐतिहासिक मुहिम : 25 दिनों की सामूहिक चेतना, सर्वसमाज की एकजुटता और प्रशासनिक निर्णायक मोड़

कामां नगर में कामवन नाम पुनर्स्थापना की मांग को लेकर सर्वसमाज के लोगों ने पोस्टर के साथ ज्ञापन अभियान चलाया

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow

लगभग विगत पच्चीस दिनों से राजस्थान के भरतपुर जनपद अंतर्गत कामां नगर की सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक भूमि पर एक ऐतिहासिक चेतना आकार लेती दिखाई दे रही है। यह चेतना है—कामां को उसके प्राचीन और सांस्कृतिक नाम ‘कामवन’ के रूप में पुनर्स्थापित करने की। यह मुहिम केवल नाम परिवर्तन की मांग नहीं है, बल्कि यह नगर की ऐतिहासिक पहचान, ब्रज संस्कृति से जुड़ाव और सामूहिक स्वाभिमान की अभिव्यक्ति बन चुकी है।

इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी सम्प्रदाय, समाज और वर्ग एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। हिंदू संगठनों के साथ-साथ मुस्लिम समाज द्वारा भी इस मांग का समर्थन किया जाना इस मुहिम को सामाजिक समरसता का उदाहरण बनाता है। बीते दिनों लगातार ज्ञापन सौंपे गए, जिनमें नगर के सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, महिला मंडलों, व्यापारिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने एक स्वर में ‘कामवन’ नाम की पुनर्स्थापना की मांग रखी।

इसे भी पढें  डीग के एडवोकेट वेदांत शर्मा को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का ‘A पैनल काउंसल’ नियुक्त — 3 साल की बड़ी जिम्मेदारी

सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक संदर्भ

कामवन नाम ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। धार्मिक आख्यानों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना में कामवन का विशेष स्थान रहा है। समय के साथ प्रशासनिक परिवर्तनों के कारण ‘कामां’ नाम प्रचलन में आया, लेकिन जनमानस में ‘कामवन’ की स्मृति कभी विलुप्त नहीं हुई। आज जब समाज इस नाम को पुनः अपनाने की बात कर रहा है, तो यह अपने अतीत से संवाद करने जैसा है।

सर्वसमाज की भागीदारी: आंदोलन की असली ताकत

इस मुहिम की व्यापकता इस बात से समझी जा सकती है कि अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न समाजों और संगठनों ने क्रमबद्ध रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपे। यह कोई तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सुविचारित, निरंतर और संगठित प्रयासों की श्रृंखला है।

कामां नगर में सर्व मुस्लिम समाज सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने कामवन नामकरण को लेकर ज्ञापन सौंपा
कामां को ‘कामवन’ नाम दिलाने की मुहिम में सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए एकजुटता दिखाई।

अब तक सौंपे गए ज्ञापन

  • 08/12/25 – अपनाघर सेवा समिति, इकाई कामवन
  • 09/12/25 – स्वर्णकार समाज, कामवन
  • 10/12/25 – खंडेलवाल समाज, कामवन
  • 11/12/25 – व्यापार महासंघ, कामवन
  • 12/12/25 – पंजाबी राजपूत समाज, कामवन
  • 15/12/25 – खंडेलवाल महिला मंडल, राधावल्लभ मंदिर, कामवन
  • 16/12/25 – ब्रजवाणी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, कामवन
  • 17/12/25 – राजस्थान पेंशनर समाज, कामां
  • 18/12/25 – यथार्थ सेवा समिति व भारतीय किसान संघ, कामां
  • 19/12/25 – सैनी समाज, कामवन
  • 22/12/25 – सर्व ब्राह्मण समाज, कामवन
इसे भी पढें  यज्ञसेनी वैश्य हलवाई कल्याण समिति सीतापुर द्वारा आयोजित दहेज रहित विवाह में ग्यारह जोड़ों ने लिया सात जन्मों का संकल्प

संभावित ज्ञापन

  • 23/12/25 – कोली समाज, कामवन
  • 24/12/25 – प्रजापति समाज व सेवार्थ सेवा समिति, कामवन
  • 26/12/25 – गुर्जर समाज, कामवन
  • 29/12/25 – नृसिंह मंदिर महंत धनंजय दास महाराज व सर्व मुस्लिम समाज
  • 30/12/25 – जैन समाज, कामवन

राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़

इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब कामां नगर पालिका और पंचायत समिति द्वारा ‘कामां को कामवन बनाने’ का प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि राजनीतिक स्तर पर इस मांग को गंभीरता से लिया गया है। अब यह विषय प्रशासनिक प्रक्रिया और राज्य स्तरीय निर्णय की ओर अग्रसर है।

मीडिया की भूमिका और जवाबदेही

इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय और क्षेत्रीय मीडियाकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कलमकारों ने लगातार इस विषय को प्रमुखता से उठाया, समाज की आवाज़ को मंच दिया और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का कार्य किया। बीते एक माह से मीडिया द्वारा निभाई जा रही यह भूमिका सराहना योग्य है।

इसे भी पढें  महिला सशक्तिकरण का महोत्सव — हर मंच पर ‘देवी’ की नियुक्ति

समाज से अपेक्षाएँ

अब जबकि आंदोलन निर्णायक मोड़ पर है, बस्ती के सभी समाजों से अपेक्षा की जा रही है कि वे एकजुट रहकर प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। दस्तावेज़ी प्रमाण, ऐतिहासिक संदर्भ और शांतिपूर्ण संवाद इस प्रक्रिया को अंतिम सफलता तक पहुंचा सकते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कामां को कामवन बनाने की मांग क्यों उठी?

यह मांग नगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से उठी है।

क्या सभी समाज इस आंदोलन में शामिल हैं?

हां, हिंदू, मुस्लिम, जैन सहित लगभग सभी समाज इस मुहिम में सहभागी हैं।

प्रशासनिक स्तर पर अब तक क्या हुआ?

नगर पालिका और पंचायत समिति द्वारा प्रस्ताव पारित किया जा चुका है।

आगे क्या प्रक्रिया होगी?

अब राज्य सरकार स्तर पर अंतिम निर्णय और अधिसूचना की प्रक्रिया अपेक्षित है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top