आजमगढ़ महोत्सव 2025: मंच, भीड़ और आवाज़—जहाँ एंकर अभय तिवारी बने उत्सव की धड़कन

आजमगढ़ महोत्सव 2025 के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति और मंच से संबोधन का दृश्य

🖊️ जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट
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आजमगढ़ जनपद में आयोजित आजमगढ़ महोत्सव 2025 अब भले ही औपचारिक रूप से संपन्न हो चुका हो, लेकिन इसकी स्मृतियां अब भी लोगों के मन में जीवंत हैं। यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक समन्वय, जनसहभागिता और मंच संचालन जैसी उन भूमिकाओं को भी रेखांकित करता है, जो अक्सर चर्चा से बाहर रह जाती हैं। इन्हीं में सबसे प्रमुख नाम रहा—मंच संचालक अभय तिवारी

महोत्सव की चमक के पीछे मंच संचालन की भूमिका

हर बड़े सांस्कृतिक आयोजन में मंच संचालन उसकी रीढ़ होता है। कलाकारों का स्वागत, दर्शकों से संवाद, प्रशासनिक घोषणाएं और कार्यक्रम की निरंतरता—इन सभी का संतुलन मंच संचालक पर निर्भर करता है। सांस्कृतिक आयोजनों में अभय तिवारी ने इस जिम्मेदारी को पूरी कुशलता से निभाया।

मतौलीपुर से महोत्सव के केंद्र तक

शहर के पश्चिमी छोर पर बसे मतौलीपुर निवासी अभय तिवारी आज पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंच संचालकों में गिने जाते हैं। वर्षों के अनुभव, शब्दों पर पकड़ और सहज प्रस्तुति ने उन्हें उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक मंचों का जाना-पहचाना नाम बना दिया है।

2023 की सराहना, 2024 की कमी और 2025 की निर्णायक वापसी

वर्ष 2023 के महोत्सव में अभय तिवारी की भूमिका को दर्शकों ने विशेष रूप से सराहा था। 2024 में उनकी अनुपस्थिति ने मंच से संवाद की कमी को उजागर कर दिया। लेकिन 2025 में जिला प्रशासन द्वारा पुनः आमंत्रण और उनकी सहभागिता ने उस रिक्तता को भर दिया, जिसे दर्शक लंबे समय से महसूस कर रहे थे।

जब मंच पर शब्दों ने दर्शकों से संवाद किया

अभय तिवारी की एंकरिंग की सबसे बड़ी विशेषता उनकी भाषा की सहजता रही। मंच से निकले शब्द औपचारिक नहीं, बल्कि संवादात्मक रहे—जिससे दर्शक स्वयं को कार्यक्रम का हिस्सा महसूस करते रहे।

प्रशासनिक मंच से मिली सार्वजनिक मान्यता

महोत्सव के दौरान डीआईजी आजमगढ़ रेंज सुनील कुमार सिंह द्वारा मंच से अभय तिवारी की प्रशंसा किया जाना यह दर्शाता है कि मंच संचालन केवल तकनीकी भूमिका नहीं, बल्कि आयोजन की आत्मा होता है।

आजमगढ़ महोत्सव 2025: एक सांस्कृतिक संवाद

आजमगढ़ महोत्सव 2025 ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन के बीच संवाद का माध्यम भी होते हैं—और मंच संचालक उस संवाद का संवाहक।

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आजमगढ़ महोत्सव 2025: सवाल-जवाब

आजमगढ़ महोत्सव 2025 में मंच संचालन क्यों अहम रहा?

क्योंकि मंच संचालन ने कार्यक्रमों की निरंतरता, दर्शकों से संवाद और आयोजन की गंभीरता को बनाए रखा।

अभय तिवारी की एंकरिंग को खास क्या बनाता है?

उनकी भाषा की सहजता, संतुलित प्रस्तुति और दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव।

क्या 2024 में उनकी अनुपस्थिति महसूस की गई थी?

हां, दर्शकों और आयोजकों—दोनों ने मंच से संवाद की कमी को महसूस किया था।


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