आगरा जिले के थाना मलपुरा क्षेत्र अंतर्गत गांव अजीजपुर में रविवार दोपहर जो कुछ घटा, उसने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक साधारण कानूनी प्रक्रिया—आरोपियों को नोटिस तामील कराना—अचानक हिंसा, बंधक बनाने और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले में बदल गई। आरोप है कि एक रिटायर्ड दरोगा और उसके परिजनों ने पुलिस टीम को घर में बंद कर लिया, मारपीट की और जिंदा जलाने तक की धमकी दी।
घटना का संदर्भ: नोटिस से बवाल तक
जानकारी के मुताबिक, गांव अजीजपुर निवासी श्रीराम आर्य वर्ष 2022 में मैनपुरी से दरोगा पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके बेटों सोनू आर्य और दीपक आर्य के खिलाफ 26 जुलाई को गांव के ही दीपक शर्मा ने मारपीट और जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे में विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत पुलिस टीम नोटिस देने उनके घर पहुंची थी।
रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जैसे ही पुलिसकर्मी श्रीराम आर्य के घर पहुंचे, माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि नोटिस देने पर गाली-गलौज शुरू हुई, पुलिस को धमकाया गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। यह कोई सामान्य विरोध नहीं था, बल्कि कानून को खुलेआम चुनौती देने का दुस्साहस था।
पुलिस टीम को कमरे में बंद कर की गई मारपीट
पुलिस टीम में एसआई कपिल शर्मा, एसआई अनीता कश्यप, एसआई सलोनी चौहान, हेड कांस्टेबल साधना यादव और सिपाही वीरेश कुमार शामिल थे। आरोप है कि घर पहुंचते ही परिवार के लोग उग्र हो गए। आरोपी बेटों को पीछे के रास्ते से भगा दिया गया और पुलिस टीम को एक कमरे में बंद कर दिया गया।
जब पुलिसकर्मियों ने बाहर निकलने की कोशिश की, तो उनके साथ मारपीट की गई। धमकियां दी गईं कि यदि ज्यादा विरोध किया गया तो जिंदा जला दिया जाएगा। शोर सुनकर आसपास के लोग जुटे जरूर, लेकिन डर और दबाव के कारण कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर सका। यह दृश्य बताता है कि ग्रामीण इलाकों में दबंगई किस हद तक हावी हो सकती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: 30 मिनट की सांसें थाम देने वाली कार्रवाई
स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने किसी तरह थाना प्रभारी को फोन कर सूचना दी। कुछ ही देर में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। मुख्य दरवाजे से प्रवेश संभव न होने पर पड़ोस के घर के रास्ते पुलिस अंदर दाखिल हुई। करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद पुलिस टीम को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
इस दौरान मारपीट में एसआई कपिल शर्मा, एसआई अनीता कश्यप और एसआई सलोनी चौहान को चोटें आईं। घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, जबकि पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया।
गिरफ्तारी और फरार आरोपी
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड दरोगा श्रीराम आर्य, उनकी बेटियां ममता और सुमन तथा बेटे संजय को गिरफ्तार कर लिया। एक बेटी सीमा की तलाश जारी है। वहीं, मुख्य आरोपी बेटे सोनू आर्य और दीपक आर्य मौके से फरार हो गए, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रही हैं।
पहले से विवादित रहा है परिवार
ग्रामीणों का कहना है कि रिटायर्ड दरोगा के बेटों के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें की जा चुकी थीं। पीड़ित युवक का आरोप है कि उसे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती थी और यह कहा जाता था कि “पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” यही मानसिकता रविवार की घटना में खुलकर सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस के साथ की गई अभद्रता और हिंसा यह संकेत देती है कि कुछ लोग वर्दी और कानून को भी कमजोर समझने लगे हैं। हालांकि, इस मामले में पुलिस की त्वरित और सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना सिर्फ एक गांव या एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस चुनौती को उजागर करती है, जहां प्रभाव, पुरानी वर्दी और कथित रसूख के दम पर कानून को ठेंगा दिखाने की कोशिश की जाती है। सवाल यह है कि अगर पुलिस टीम ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित गिरफ्तारी, सख्त धाराएं और सार्वजनिक संदेश बेहद जरूरी होते हैं, ताकि भविष्य में कोई भी कानून हाथ में लेने की हिम्मत न करे।
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❓ पुलिस टीम को क्यों बनाया गया बंधक?
पुलिस आरोपी बेटों को नोटिस देने पहुंची थी। इसी बात से नाराज होकर रिटायर्ड दरोगा और उसके परिजनों ने हिंसा की और पुलिस को कमरे में बंद कर दिया।
❓ क्या पुलिसकर्मी घायल हुए?
हां, मारपीट में तीन महिला व पुरुष उपनिरीक्षकों को चोटें आईं, जिनका मेडिकल कराया गया।
❓ किन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
रिटायर्ड दरोगा श्रीराम आर्य, उनकी दो बेटियां और एक बेटा गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि दो मुख्य आरोपी बेटे फरार हैं।
❓ आगे की कार्रवाई क्या होगी?
पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।










