लखनऊ में 150+ बेजुबानों की ‘मौत का तांडव’!
एक्शन में आए CM योगी, एक फैसले से हिला पूरा प्रशासन

लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के पास खेतों में पड़ी मृत भेड़ें, मौके पर जांच करते पशुपालन और प्रशासनिक अधिकारी

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सर्वेश कुमार यादव की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आई यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, पशु संरक्षण और मानवीय संवेदना की गंभीर परीक्षा बन चुकी है। वीआईपी माने जाने वाले राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के आसपास एक साथ 170 भेड़ों की रहस्यमयी मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया।
सड़कों और खाली मैदानों में बिखरी बेजुबानों की लाशें केवल दृश्य नहीं थीं—वे सवाल थीं, व्यवस्था पर, निगरानी पर और संवेदनशीलता पर।

वीआईपी ज़ोन में मौतें और उठते सवाल

यह इलाका वही है, जहां कुछ ही दिन पहले भव्य सरकारी आयोजन संपन्न हुआ था। कड़ी सुरक्षा, स्वच्छता और निगरानी के दावों के बीच इतनी बड़ी संख्या में भेड़ों का अचानक दम तोड़ देना सामान्य घटना नहीं कही जा सकती।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भेड़ें पूरी तरह स्वस्थ थीं। अचानक एक-एक कर गिरना और कुछ ही घंटों में दर्जनों की मौत—यह सब किसी गंभीर कारण की ओर इशारा करता है।

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मड़ियांव में मौत का रहस्य: साजिश या ज़हरीला भोजन?

घटना मड़ियांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस मामले में आसरा द हेल्पिंग हैंड्स ट्रस्ट की संस्थापक चारु खरे ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि या तो कार्यक्रम के बाद खुले में फेंका गया जहरीला कचरा भेड़ों ने खा लिया, या फिर किसी ने जानबूझकर जहर देकर यह अमानवीय कृत्य किया।

CM योगी का सख्त रुख: प्रशासन हरकत में

मामला जैसे ही मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा, योगी आदित्यनाथ ने बिना देर किए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए।
सरकारी बयान में साफ कहा गया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया और पूरे इलाके की जांच शुरू कर दी गई।

17 लाख रुपये का मुआवजा: राहत या सांत्वना?

मुख्यमंत्री ने पीड़ित पशुपालकों के लिए प्रति मृत भेड़ 10,000 रुपये मुआवजे की घोषणा की। कुल मिलाकर 17 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
हालांकि यह आर्थिक मदद जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे उन गरीब पशुपालकों की आजीविका का नुकसान पूरा हो पाएगा, जिनकी पूरी दुनिया इन्हीं बेजुबानों पर टिकी थी?

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

मड़ियांव थाने के एसएचओ शिवानंद मिश्रा के अनुसार, मृत भेड़ों के नमूने पोस्टमार्टम और लैब जांच के लिए भेजे गए हैं।
यह भी जांच का विषय है कि अगर भेड़ों ने जहरीला पदार्थ खाया, तो वह वहां आया कैसे? किसकी लापरवाही या साजिश से यह ज़हर खुले में पड़ा था?

पशु प्रेमियों में आक्रोश, जवाबदेही की मांग

घटना के बाद पशु प्रेमी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। मांग की जा रही है कि केवल मुआवजा नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
राजधानी जैसे हाई-प्रोफाइल शहर में यदि बेजुबानों की सुरक्षा नहीं, तो बाकी प्रदेश का क्या?

यह घटना केवल भेड़ों की मौत की खबर नहीं है—यह हमारे सिस्टम के आईने में झांकने का मौका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सच सामने लाएगी, लेकिन सवाल तब भी रहेगा:
क्या हम बेजुबानों की जान को केवल आंकड़ों और मुआवजे तक सीमित कर देंगे?

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भेड़ों की मौत की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?

फिलहाल जहरीला भोजन या जानबूझकर जहर देने की आशंका है। अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।

सरकार ने कितना मुआवजा घोषित किया है?

प्रति मृत भेड़ 10,000 रुपये, कुल 17 लाख रुपये की सहायता।

क्या किसी की गिरफ्तारी हुई है?

अभी जांच जारी है। दोषियों की पहचान पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद होगी।

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