माफिया राज का खौफनाक अंत: प्रयागराज की वो रात जब लाइव कैमरों के सामने एक बाहुबली का अंत और कानून की निर्णायक आहट

प्रयागराज के कोल्विन अस्पताल के बाहर पुलिस हिरासत में अतीक अहमद और अशरफ, अप्रैल 2023 की रात मीडिया की मौजूदगी में हुई सनसनीखेज हत्या का दृश्य


अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow

अतीक अहमद का अंत कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं थी। अप्रैल 2023 की उस रात प्रयागराज में कुछ ऐसा घटा, जिसने दशकों से हवाओं में तैरते डर को एक झटके में इतिहास बना दिया। रात के लगभग दस बजे थे। कोल्विन अस्पताल के बाहर मीडिया की भीड़ थी। कैमरे ऑन थे, माइक तने हुए थे और पुलिस की गाड़ियों के सायरन उस बेचैनी को और तीखा बना रहे थे, जो पूरे वातावरण में घुली हुई थी।
हथकड़ी में जकड़ा, भारी-भरकम शरीर लिए अतीक अहमद आगे बढ़ रहा था। चाल में लंगड़ाहट थी, लेकिन आंखों में अब भी वो पुराना घमंड था, जिसने दशकों तक प्रयागराज और आसपास के इलाकों को थर्राया। उसके साथ उसका भाई अशरफ था—कुछ सहमा हुआ, कुछ भीतर से टूट चुका।
अचानक तीन युवक कैमरे लेकर आगे बढ़े। आवाज़ आई—“सरेंडर!” और उसके बाद… गोलियां।
तड़तड़ाहट ऐसी, जैसे किसी ने रात के सीने को चीर दिया हो। कुछ ही सेकेंड में अतीक अहमद और अशरफ ज़मीन पर थे। सिर और सीने से बहता खून लाइव कैमरों में कैद होता रहा। देश ने सिर्फ़ हत्या नहीं देखी—देश ने एक युग का अंत देखा।
तीनों हमलावरों ने हथियार फेंक दिए, हाथ ऊपर किए और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। न भागने की कोशिश, न डर का कोई दृश्य। मानो वे जानते हों कि वे इतिहास के एक हिंसक अध्याय के अंतिम पन्ने पर अपना नाम लिख चुके हैं।
उस रात, गोलियों की आवाज़ ने सिर्फ़ दो ज़िंदगियां नहीं छीनीं—उसने एक पूरे अपराधी साम्राज्य को खामोश कर दिया।

इसे भी पढें  डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज फ्रेशर्स पार्टी : नए छात्र-छात्राओं का भव्य स्वागत

गलियों से गैंगस्टर तक: डर की जड़ों की कहानी

अतीक अहमद की कहानी किसी आलीशान हवेली से नहीं शुरू हुई थी। 1962 में इलाहाबाद की तंग गलियों में, एक गरीब टांगा चालक के घर जन्मा अतीक बचपन से ही अभावों से घिरा रहा। स्कूल की घंटी से ज़्यादा उसे गली-कूचों की पुकार सुनाई देती थी। वही भटकन धीरे-धीरे उसे ऐसे रास्ते पर ले गई, जहां से लौटना आसान नहीं होता।
1979—महज़ सत्रह साल की उम्र। पहली हत्या। चंद्र प्रकाश तिवारी का नाम उसके साथ हमेशा के लिए जुड़ गया। यहीं से अपराध की दुनिया में उसकी एंट्री हुई। छोटे अपराध, फिर रंगदारी, फिर अपहरण और अंततः दिनदहाड़े हत्याएं—यही उसकी पहचान बन गई।
1980 का दशक आते-आते अतीक अहमद प्रयागराज का ऐसा नाम बन चुका था, जिसे सुनते ही दुकानों के शटर गिर जाते थे। गवाह मुकर जाते थे। पुलिस की फाइलें मोटी होती जाती थीं, लेकिन गिरफ्तारी नामुमकिन-सी लगती थी।

इसे भी पढें  मजदूर के घर से 14 लाख रुपये कैश बरामद — पत्नी फरार, पुलिस जांच में जुटी… क्या है इस रहस्यमयी रकम की सच्चाई?

सत्ता बदली, हवा बदली

2017 में उत्तर प्रदेश की राजनीति बदली। योगी आदित्यनाथ सरकार के साथ ही माफिया संस्कृति पर शिकंजा कसना शुरू हुआ। अतीक अहमद के लिए ये दौर असहज था। संपत्तियां जब्त होने लगीं। नेटवर्क टूटने लगा। जेल की दीवारें अब सुरक्षा नहीं, सजा का संकेत बन गईं।
मार्च 2023 में उमेश पाल अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा—अतीक के जीवन की पहली ठोस कानूनी सजा थी। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी।
महोबा में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी ओमप्रकाश सिंह राठौर की मौत और कैद में मिली मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी की हालत
महोबा में सामने आई अमानवीय घटना में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी ओमप्रकाश सिंह राठौर की मौत हो गई, जबकि उनकी मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पूरी खबर पढने के लिए फोटो को क्लिक करें☝☝☝

वो अंतिम रात: खौफ, घबराहट और कानून

15 अप्रैल 2023 की रात, मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते वक्त अतीक अहमद असामान्य रूप से शांत दिखा। लेकिन उसकी आंखें बार-बार इधर-उधर घूम रही थीं। मानो कोई अनहोनी भीतर ही भीतर चेतावनी दे रही हो।
और फिर वही हुआ, जो कैमरों ने अमर कर दिया। गोलियां चलीं। खौफ ज़मीन पर गिर पड़ा।

आज की शांति और कल की सीख

आज प्रयागराज की गलियां अपेक्षाकृत शांत हैं। लेकिन अतीक अहमद की छाया पूरी तरह मिट नहीं पाई है। वह याद दिलाती है कि जब कानून कमजोर होता है, तो बाहुबल उगता है—और जब कानून मजबूत होता है, तो सबसे बड़ा साम्राज्य भी ढह जाता है।
उस रात की गोलियों ने एक बाहुबली को खत्म किया, लेकिन सवाल छोड़ दिए—क्या अब कानून को बंदूक की ज़रूरत नहीं पड़ेगी? यही इस कहानी की सबसे बड़ी कसौटी है।

इसे भी पढें  खेत में झटका मशीन ने उगला 11000 करंट, मचा तबाही, दो की दर्दनाक मौत

सवाल-जवाब

अतीक अहमद की हत्या कब और कहां हुई?

अतीक अहमद की हत्या 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज के कोल्विन अस्पताल के बाहर हुई।

अतीक अहमद का आपराधिक साम्राज्य कैसे खत्म हुआ?

योगी सरकार के बाद सख़्त कार्रवाई, संपत्ति जब्ती, जेल और अंततः हत्या ने उसके साम्राज्य को खत्म कर दिया।

क्या अतीक अहमद का अंत कानून की जीत माना जा सकता है?

यह सवाल आज भी खुला है—कुछ इसे निर्णायक कार्रवाई मानते हैं, तो कुछ कानून की कसौटी पर इसे चुनौती मानते हैं।

अतीक का परिवार सुर्खियों में
अतीक के छोटे बेटे को लेकर पुलिस जांच। पूरी खबर पढने के लिए फोटो को क्लिक करें☝☝☝☝

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top