डीग जिले में कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने पानी की समस्या पर अधिकारियों को फटकार लगाई

कामां (डीग) | 28 दिसंबर 2025

डीग जिले में कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने
पानी की समस्या पर अधिकारियों को फटकार लगाई

संक्षिप्त इंट्रो : डीग जिले की कामां विधानसभा में लगातार बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर आज विधायक नौक्षम चौधरी (भाजपा) ने जलदाय विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। कई दिनों से बाधित जलापूर्ति पर नाराज़गी जताते हुए उन्होंने 48 घंटे के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

डीग जिले की कामां विधानसभा इन दिनों किसी राजनीतिक बयान या चुनावी हलचल के कारण नहीं, बल्कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के संकट के कारण चर्चा में है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि आम जनता के धैर्य की भी परीक्षा बन गया है। कई वार्डों और मोहल्लों में लगातार पांच से सात दिनों तक नलों में पानी नहीं आया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

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नल सूखे, तो सब्र भी सूखने लगा

कामां कस्बे के अनेक इलाकों में सुबह की शुरुआत पानी की तलाश से होने लगी। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज़ के हैंडपंप और टैंकर की ओर भटकती रहीं। कई घरों में बच्चों को बिना नहाए स्कूल भेजना पड़ा, जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन पकाने तक की समस्या खड़ी हो गई।

ग्रामीण इलाकों में और भी भयावह स्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी गंभीर हैं। जहां नल कनेक्शन सीमित हैं, वहां हैंडपंप ही एकमात्र सहारा हैं। लेकिन गिरते भूजल स्तर के कारण कई हैंडपंप सूख चुके हैं। निजी बोरिंग कराना हर किसी के बस की बात नहीं, ऐसे में टैंकर ही आखिरी विकल्प बचता है, जो अनियमित साबित हो रहा है।

विधायक का हस्तक्षेप: सख्त संदेश

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने जलदाय विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक में विधायक का रुख बेहद सख्त था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पानी कोई सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी आवश्यकता है और इसमें लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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अधिकारियों की सफाई पर तीखे सवाल

अधिकारियों ने पाइपलाइन लीकेज, मोटर खराब होने और बिजली आपूर्ति बाधित रहने जैसी समस्याओं का हवाला दिया। इस पर विधायक ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ये समस्याएं हर साल सामने आती हैं, तो उनके स्थायी समाधान की योजना अब तक क्यों नहीं बनाई गई।

48 घंटे का अल्टीमेटम

विधायक ने निर्देश दिए कि जिन इलाकों में कई दिनों से पानी नहीं आया है, वहां 48 घंटे के भीतर आपूर्ति बहाल की जाए। जहां पाइपलाइन से पानी संभव नहीं, वहां टैंकर व्यवस्था नियमित की जाए और उसका शेड्यूल सार्वजनिक किया जाए। लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

तकनीकी नहीं, प्रशासनिक समस्या

कामां का यह संकट केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं की कमी को भी उजागर करता है। वर्षों से जलापूर्ति व्यवस्था अस्थायी उपायों पर टिकी हुई है, जिससे हर साल गर्मी आते ही हालात बिगड़ जाते हैं।

स्थायी समाधान की जनता की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नए ट्यूबवेल, जर्जर पाइपलाइन के पुनर्निर्माण और वर्षा जल संचयन योजनाओं को गंभीरता से लागू करने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई जरूरी है।

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निष्कर्ष: पानी नहीं, तो विकास नहीं

कामां में पानी का संकट यह सवाल खड़ा करता है कि जब बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं, तो विकास के दावे कितने सार्थक हैं। विधायक की सख्ती एक जरूरी शुरुआत है, लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन की है।

सवाल–जवाब

कामां में पानी की समस्या कब से चल रही है?

कई वार्डों में पिछले पांच से सात दिनों से लगातार जलापूर्ति बाधित है।

विधायक ने क्या निर्देश दिए हैं?

48 घंटे में पानी आपूर्ति बहाल करने और टैंकर व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थायी समाधान क्या हो सकता है?

नए ट्यूबवेल, पाइपलाइन का पुनर्निर्माण और वर्षा जल संचयन से स्थायी समाधान संभव है।

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