चित्रकूट जनपद के दुर्गम और पिछड़े इलाकों में रहने वाले कोल आदिवासी समुदाय के लिए सर्दी का मौसम हमेशा संघर्ष और अभाव लेकर आता है।
ऐसे समय में जब ठंड जीवन को कठिन बना देती है, तब समाजसेवी संस्थाओं द्वारा की गई छोटी-सी मदद भी किसी वरदान से कम नहीं होती।
इसी भावना के साथ श्री भगवान भजनाश्रम वृंदावन शाखा, चित्रकूट द्वारा पाठा क्षेत्र के चूल्ही गांव में
कंबल और खाद्यान्न सामग्री का व्यापक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में
आशा, सम्मान और राहत की गर्माहट भर दी।
चूल्ही गांव में सेवा का मानवीय उत्सव
पाठा क्षेत्र का चूल्ही गांव वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और आर्थिक पिछड़ेपन से जूझता रहा है।
यहां रहने वाले अधिकांश परिवार कोल आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिनकी आजीविका सीमित संसाधनों पर निर्भर है।
सर्दियों के मौसम में इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भोजन और गर्म कपड़ों की होती है।
ऐसे में श्री भगवान भजनाश्रम ट्रस्ट द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल वितरण नहीं,
बल्कि सामाजिक संवेदना और मानवीय जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
355 जरूरतमंदों तक पहुंची राहत सामग्री
कार्यक्रम के दौरान कुल 355 जरूरतमंद आदिवासी परिवारों को खाद्यान्न और सर्दी से बचाव की सामग्री प्रदान की गई।
वितरण में आटा, दाल, चावल, गुड़, मसाले, सरसों का तेल, चीनी जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों के साथ-साथ
कंबल, स्वेटर, मोजे और अन्य गर्म कपड़े शामिल थे।
हर परिवार को सम्मानपूर्वक सामग्री सौंपी गई, जिससे किसी को भी सहायता लेने में संकोच न हो।
प्रशासनिक उपस्थिति से बढ़ा कार्यक्रम का महत्व
इस सेवा कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी मानिकपुर मोहम्मद जसीम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को प्रशासनिक विश्वसनीयता के साथ-साथ सामाजिक महत्व भी प्रदान किया।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में नगर पंचायत मानिकपुर के अधिशासी अधिकारी भारत सिंह और
मानिकपुर कोतवाली प्रभारी श्रीप्रकाश यादव भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे।
अधिकारियों ने आदिवासी परिवारों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को सुना और
सरकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
इससे कार्यक्रम केवल राहत वितरण तक सीमित न रहकर
प्रशासन और समाज के बीच संवाद का सेतु भी बना।
समाजसेवियों की सोच: सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
समाजसेवी केशव प्रसाद यादव ने इस अवसर पर कहा कि
“गरीबों और वंचितों की सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है।
जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं करेगा,
तब तक विकास अधूरा रहेगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल किसी एक दिन की नहीं,
बल्कि निरंतर चलने वाली सेवा परंपरा का हिस्सा है।
ट्रस्ट और दानदाताओं का सराहनीय योगदान
इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बिहारीलाल सर्राफ
और कोलकाता के नवलजी कनोडिया का आर्थिक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
उनके सहयोग से श्री भगवान भजनाश्रम ट्रस्ट वृंदावन के मैनेजर रामावतार यादव
और उनकी टीम ने इस दुर्गम आदिवासी क्षेत्र तक सहायता सामग्री पहुंचाई।
अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस योगदान की खुले मंच से सराहना करते हुए कहा कि
ऐसी सेवाएं सामाजिक असमानता को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं और
अन्य संस्थाओं को भी प्रेरित करती हैं।
सामूहिक सहभागिता बनी कार्यक्रम की ताकत
कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष रामावतार यादव, सभासद शंकर प्रसाद,
जगमोहन सिंह यादव, समाजसेवी आर.के. शर्मा, रोहित, दिलीप अवस्थी,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव कामरेड अमित यादव,
रघुवीर यादव, शिव नायक गुप्ता, ऋतुराज वर्मा, महेश कोल सहित
कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि समाज की वास्तविक ताकत
सरकारी योजनाओं के साथ-साथ सामाजिक सहयोग और संवेदनशीलता में निहित है।
मानवता और सहयोग की जीवंत मिसाल
चूल्ही गांव में आयोजित यह कंबल व खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम
सिर्फ एक राहत अभियान नहीं था, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक था
जहां समाज अपने सबसे कमजोर वर्ग के साथ खड़ा नजर आता है।
कोल आदिवासियों के चेहरों पर दिखी मुस्कान इस बात का प्रमाण है
कि जब सेवा निःस्वार्थ होती है, तो उसका असर गहरा और स्थायी होता है।
❓ सवाल-जवाब
यह वितरण कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया?
यह कार्यक्रम चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र स्थित चूल्ही गांव में आयोजित किया गया।
कितने लोगों को सहायता सामग्री दी गई?
कुल 355 जरूरतमंद कोल आदिवासी परिवारों को खाद्यान्न और कंबल वितरित किए गए।
कौन-कौन सी सामग्री वितरित की गई?
आटा, दाल, चावल, गुड़, मसाले, सरसों का तेल, चीनी, कंबल, स्वेटर, मोजे और अन्य आवश्यक सामग्री।
इस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य क्या था?
सर्दी के मौसम में गरीब और आदिवासी परिवारों को राहत पहुंचाना और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना।









