क्या UP में BJP की पलटेगी दुनिया?
SIR बना सबसे बड़ा खतरा, बदल गए चुनावी समीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उत्तर प्रदेश के एक सरकारी कार्यक्रम में बातचीत करते हुए

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजनीति में SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया ने वह सवाल खड़ा कर दिया है, जिसकी आशंका भारतीय जनता पार्टी को अब तक केवल भीतर-ही-भीतर थी। शहरी वोटर, जो अब तक BJP की ताक़त माने जाते थे, अचानक अपने वोट पुश्तैनी गाँवों की ओर शिफ्ट करते दिख रहे हैं। इसका असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के पूरे गणित को बदलने की क्षमता रखता है।

SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों यह निर्णायक बन गई?

निर्वाचन आयोग द्वारा लागू SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत स्पष्ट निर्देश दिए गए कि एक व्यक्ति केवल एक ही स्थान पर मतदाता हो सकता है। जैसे ही यह नियम लागू हुआ, शहरी क्षेत्रों में डुप्लीकेट, अस्थायी और फर्जी वोटों की पहचान शुरू हो गई।

यहीं से राजनीति की दिशा बदलनी शुरू हुई। वर्षों से नौकरी, व्यापार या पढ़ाई के कारण शहरों में बसे लाखों लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ—वोट शहर में रखें या अपने पुश्तैनी गाँव में?

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शहर बनाम गाँव : मतदाता का बदला हुआ मनोविज्ञान

SIR के आंकड़े बताते हैं कि शहरी मतदाता अचानक गाँव को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसके पीछे पुश्तैनी पहचान, पंचायत राजनीति, भविष्य की सुरक्षा और शहरी जीवन की अस्थिरता जैसे ठोस कारण हैं।

  • गाँव में जमीन और सामाजिक पहचान जुड़ी होती है।
  • पंचायत स्तर पर हर वोट का सीधा असर होता है।
  • शहर में नौकरी और किराए की स्थिति स्थायी नहीं होती।

शहरी सीटों पर बढ़ती राजनीतिक चिंता

उत्तर प्रदेश में शहरी मतदाता लंबे समय से BJP की चुनावी ताक़त रहे हैं। लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा, मेरठ और कानपुर जैसे शहरों में मतदाता सूची के सिकुड़ने के संकेत मिले हैं।

प्रदेश भर में बड़ी संख्या में SIR फॉर्म लंबित हैं, जिससे करोड़ों मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका बनी हुई है। यह स्थिति न केवल राजनीतिक दलों बल्कि चुनाव आयोग के लिए भी चुनौती बन गई है।

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क्या बदलेगा यूपी का चुनावी संतुलन?

अगर शहरी वोट इसी तरह गाँवों की ओर स्थानांतरित होते रहे और ग्रामीण इलाकों में जातीय-स्थानीय समीकरण हावी रहे, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है। SIR प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले चुनाव केवल नारों से नहीं, बल्कि मतदाता की स्थायी पहचान से तय होंगे।

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